मौसम की बेरुखी के बावजूद मक्के की फसल काफी अच्छी हुई है, लेकिन लॉकडाउन में समस्तीपुर में इसके खरीदार नहीं मिल रहे हैं. इस वजह से किसानों के सामने आर्थिक संकट आ गई है. किसान खेत से फसल काटकर अपने घरों के सामने रखने को मजबूर हैं.
इस बार किसान दोहरी मार झेलने को विवश हैं. एक ओर ओलावृष्टि और बारिश से फसल को नुकसान हुआ, बावजूद इसके मक्के की अच्छी पैदावार हुई, लेकिन खरीदार नहीं हैं. पिछले साल 1700 के रेट तक मक्का किसानों के दरवाजे से ही बिक जाता था. मंडी जाने की जरूरत भी नहीं पड़ती थी. इस बार लॉकडाउन में दरवाजे पर व्यापारी का आना तो दूर बाजार में भी मक्का के खरीदार नहीं है.
मक्का से जुड़े किसानों को कदम-कदम पर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. काफी मशक्कत के बाद फसल कटकर तैयार भी हो गई तो इसे मंडी या संबंधित कारखाना तक भेजना मुश्किल हो रहा है. तैयार फसल को रखने की समस्या भी बनी हुई है.
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समस्तीपुर में कल्याणपुर प्रखंड के किसान संजीव कुमार सिंह कहते हैं कि इस बार आंधी-तूफान आने के बाद भी फसल अच्छी हुई है. हम लोग फसल काटकर तैयार भी कर लिए हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से तैयार फसल बाजार नहीं जा पा रहा है. इस वजह से किसानों में भारी निराशा है.कोरोना कमांडोज़ का हौसला बढ़ाएं और उन्हें शुक्रिया कहें...
किसान अमरजीत सिंह कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण मक्का का रेट ही नहीं है. इसी की कमाई से हम आगे का खेती करते हैं. अब जब फसल बिकेगा नहीं तो पैसा आएगा नहीं. फिर आगे खेती कैसी होगी. किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कर्ज लेकर खेती करते है. इसी खेती से खाना-पीना चलता है.