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कोरोना: नए तरीके से हो सकते हैं टेस्ट, कम समय में मिलेगी सटीक जानकारी

इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग, ईटीएच ज्यूरिख के सहकर्मी जिंग वांग और उनके साथी कोरोना की टेस्टिंग के लिए एक ऐसी टेस्टिंग किट बनाना चाहते थे जो SARS-CoV-2 वायरस का सटीकता के साथ पता लगा ले और जो पीसीआर का व्यावहारिक विकल्प बन सके.

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कोरोना की सटीक पहचान करना अब भी बड़ी समस्या (फाइल-AP)
कोरोना की सटीक पहचान करना अब भी बड़ी समस्या (फाइल-AP)

  • ज्यूरिख में फोटोथर्मल सेंसिंग पर आधारित टेस्ट तैयार
  • कोरोना के परीक्षण को PCR का विकल्प बना सकता है

कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के बीच एक राहतभरी खबर है कि वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई टेस्ट किट विकसित की है जिसके जरिए नोवल कोरोना वायरस की और सटीक तरीके के अलावा जल्दी से पहचान की जा सकती है. कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में उपयोग किए जाने वाले पोलीमरेज चेन रिएक्शन (PCR) आधारित टेस्ट पर बने दबाव को दूर कर सकता है.

अब तक लाखों लोगों का कोरोना वायरस के लिए टेस्ट किया गया है, जिसमें पीसीआर पर निर्भर एक किट का उपयोग किया गया, यह एक संवेदनशील तरीका है जो रोगी के स्वैब से SARS-CoV-2 RNA को बढ़ाता है ताकि वायरस की छोटी से छोटी मात्रा का पता लगाया जा सके.

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टेस्ट में सटीकता का दावा

हालांकि, महामारी के विकराल रूप धारण करने के बाद एसीएस नैनो जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, शोध को लेकर बढ़े दबाव के कारण लैब में तनाव बढ़ता जा रहा है.

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अब, कई खोजकर्ताओं में शामिल स्विट्जरलैंड के ईटीएच ज्यूरिख स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने प्लास्मोनिक फोटोथर्मल सेंसिंग पर आधारित एक ऐसा टेस्ट विकसित किया है जिसके जरिए संभावित रूप से बेहद सटीकता के साथ परीक्षण किया जा सकता है.

रिफ्रेक्टिव इंडेक्स में एक स्थानीय परिवर्तन के रूप में निर्मित एक मैटेलिक नैनो स्ट्रक्चर की सतह पर अणुओं के बीच के संबंधों का पता लगाया जा सकता है.

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस पर राजी हैं कि कोरोना वायरस (COVID-19) के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए टेस्ट बढ़ाए जाएं.

सटीक रिजल्ट नहीं

हालांकि, सीमित सप्लाई और पीसीआर मशीनों के जरिए लिए गए सैंपल रिजल्ट में देरी और प्रयोगशाला कर्मियों की कमी के कारण कई देशों में कोरोना परीक्षण नहीं हो पा रहा है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि अब तक के परीक्षणों में कई निगेटिव और कई पॉजिटिव रिजल्ट भी सामने आए हैं. उनका कहना है कि कंपाउंड टोमोग्राफी (CT) जैसे कई अन्य तरीकों ने भी तेज या रियल टाइम रिजल्ट नहीं दिया है.

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इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग, ईटीएच ज्यूरिख के सहकर्मी जिंग वांग और उनके साथी कोरोना की टेस्टिंग के लिए एक ऐसी टेस्टिंग किट बनाना चाहते थे जो SARS-CoV-2 वायरस की सटीकता के साथ पता लगा ले और जो पीसीआर का व्यवहारिक विकल्प बन सके.

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