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कोरोना केस में 78% कमी, वैक्सीनेशन भी तेज, लेकिन नियमों का पालन अब भी जरूरी: स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि कोरोना के मामलों में 78 फीसदी कमी हुई है.कोरोना के रोजाना मामलों की संख्या एक लाख से कम हो गई है. 24 राज्यों में प्रतिदिन मामलों की संख्या एक हजार से कम हो गई है.

भारत में कोरोना की रफ्तार थमने लगी है. (फाइल फोटो) भारत में कोरोना की रफ्तार थमने लगी है. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कोरोना को लेकर जारी नियमों का पालन करते रहें- वीके पॉल
  • कोरोना के नए मामलों में 78 फीसदी कमी

देश में कोरोना के मामले धीरे-धीरे अब और कम होने लगे हैं. शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि कोरोना के मामलों में 78 फीसदी कमी हुई है.कोरोना के रोजाना मामलों की संख्या एक लाख से कम हो गई है. 24 राज्यों में प्रतिदिन मामलों की संख्या एक हजार से कम हो गई है. इस सप्ताह कोरोना के मामलों में 31 फीसदी की कमी देखी गई है.

स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि 9 जून तक 196 जिले ऐसे थे जहां रोजाना 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. बीते दो महीने में कोरोना के सबसे कम मामले सामने आए हैं. स्वास्थ्य सुविधाओं पर बोझ भी कम हुआ है. रिकवरी रेट और ठीक होने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है. भारत में रोजाना कोरोना टेस्टिंग बढ़ाई गई है. संक्रमण दर में लगातार कमी देखी जा रही है. 31 अप्रैल के बाद से 74 प्रतिशत की कमी देखी गई है. बीते कुछ दिनों से देश में पॉजिटिविटी रेट पांच प्रतिशत से कम हो गया है. आज यह 4.7 प्रतिशत है.

21 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉजिटिविटी में कमी देखी गई है. देश में वैक्सीनेशन पर काम जारी है. 19.85 करोड़ लोगों को कोरोना की पहली डोज लग गई है. अबतक कुल 24.6 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी है. यह दुनिया में दूसरा सबसे ज्यादा वैक्सीनेशन का आंकड़ा है.

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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सचिवों ने राज्य के स्वास्थ्य सचिवों के संग कल (गुरुवार) बैठक की थी जहां फ्रंटलाइन वर्कर्स और हेल्थ वर्कर्स को दूसरी डोज सुनिश्चित करने को लेकर चर्चा की गई. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया गया कि अगर हम मास्क नहीं लगाएंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करेंगे तो संक्रमण फिर से फैल सकता है. कोरोना के मामले भले कम हो रहे हैं लेकिन हम लोगों से अपील करते हैं कि मास्क लगाएं और एहतियात बरते. हमें यह तय करना है कि कोरोना के मामले दोबारा ना बढ़ें. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा गया कि हमें एहतियात बरतना जारी रखना है. इलाज से बेहतर बचाव है.

उन्होंने कहा कि अगर हम इसका बचाव करेंगे और कोरोना के मामले नहीं बढ़ेंगे तो स्वास्थ्य सुविधाओं पर बोझ नहीं बढ़ेगा, जिससे लोगों को अच्छा इलाज मिलने में आसानी होगी. हमें शुरुआत में कुछ हजार बेड्स मिले थे. एक साल में 17 लाख हॉस्पिटल बेड, 54 हजार वेंटिलेटर बनाए गए हैं. मेडिकल स्टाफ बढ़ाने की भी पहल की गई है.

एहतियात बरतना जरूरी

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वीके पॉल ने कहा कि हम अनलॉक की तरफ बढ़ते हैं और अगर लोग एहतियात नहीं बरतेंगे तो फिर से दिक्कतें बढ़ जाएंगी. हम यह बात बार-बार कह रहे हैं. हमें नियमों का सख्ती से पालन करना है. पार्टी करने का समय अभी नहीं आया है. नियमों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर हमें कुछ कदम उठाने की जरूरत है. हमने नेशनल सीरो सर्वे करने की तैयारी की है जिससे कि यह पता लगाया जा सके कि संक्रमण कितना है और इसमें कौन सा वायरस है. हमें राज्य स्तर पर भी सीरो सर्वे करना होगा. हॉटस्पाट बंद रहने चाहिए, उसके अलावा चीजें खोलीं जा सकती हैं. वैक्सीनेश बढ़ाया जा रहा है, ये जल्द ही 25 करोड़ हो जाएगा. जिन लोगों को वैक्सीन नहीं लगी है, उन्हें वैक्सीन लेनी चाहिए और सभी की जिम्मेदारी है कि लोगों को कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज भी लगे.

उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस की दवाओं की उपलब्धता भी बढ़ा दी गई है. पूरी ताकत के साथ इंतजाम किए जा रहे हैं. वैक्सीन के दूसरे डोज के गैप को लेकर उन्होंने कहा कि इसपर अध्ययन जारी है. इसपर आम लोगों के बीच बहस है लेकिन फैसला कमेटियों को लेना है. परेशान होने की जरूरत नहीं है, फैसला लेते वक्त सभी बातों का ध्यान रखा जाएगा.

कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के आंकड़े 20 जून तक

कोवैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के आंकड़ों को लेकर डॉक्टर वीके पॉल ने कहा कि यह तीस जून तक एक जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा. भारत में बनीं वैक्सीन को अमेरिका में यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने आपात इस्तेमाल को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद इस वैक्सीन के प्रभावी होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इस पर वीके पॉल ने कहा कि अमेरिका की इस संस्था के फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ता है. सभी देशों के अपने संस्थान हैं और अपने मानक हैं. हम उसका सम्मान करते हैं. हमारे देश के पास अपना सिस्टम है. 

 

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