दिल्ली में सांसों को बचाने की कवायद के बीच ऑक्सीजन के लिए जद्दोजहद जारी है. लेकिन तंग गलियों में सासों को पहुंचा पाना एक बड़ी चुनौती है. पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में जहां तिल रखने की जगह नही होती, वहां ऑक्सीजन के सिलिंडर पहुंचा पाना असंभव सा लगता है. पिछले लॉकडाउन में ऑक्सीजन के बिना मरीज़ को तड़पता देखने के बाद आसिम और उनके दोस्तों ने तंग गलियों में फ्री ऑक्सीजन का सिलेंडर पहुंचाने का सिलसिला शुरू किया था. अब दिल्ली में कोरोना की चौथी वेव में आसिम इलाके के 'ऑक्सीजन मैन' बन गये.
'ऑक्सीजन मैन' कर रहे हैं लोगों की मदद
आसिम के मुताबिक, बी ह्यूमन एनजीओ के जरिए वो हर रोज़ वो होम आइसोलेशन में रह रहे 250-300 लोगों को फ्री ऑक्सीजन रिफिलिंग कर रहे हैं. साथ ही 300 मरीजो को ऑक्सीजन का सिलेंडर भी पहुंचा रहे हैं. चौथी वेव में ऑक्सीजन की मांग पूरी नही हो पा रही, क्योंकि सख्ती के बाद प्लांट एनजीओ को ऑक्सीजन उतनी नही दे रही जितनी की जरूरत है. दरअसल होम आइसोलेशन में रहे रहे मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर इसलिए भी नही मिल पा रही है, क्योंकि कई मरीजों की मौत के बाद भी सिलेंडर वापस नही हो रहे तो कईयों ने खाली सिलेंडर अब तक वापस नही किया है.
एनजीओ के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सुहैल ने कहा कि, "वो चार रातों से सोए नही है सिंगापुर, यूके, कनाडा, से उन एनआरआई के भी फोन आ रहे हैं, जिनके मां-बाप, रिश्तेदार दिल्ली में ऑक्सीजन से महरूम हैं." पिछले कोरोकाल में 5 ऑक्सीजन सिलेंडर से लोगों को सांस बांटने वाला ये एनजीओ कुछ दोस्तों ने मिलकर खड़ा किया, जो अब दिल्ली एनसीआर में उखड़ रही सांसो को थाम रहे हैं.
'एंबुलेंस मैन' चिरंजीव यूं कर रहे हैं सेवा
उधर, दिल्ली में कोरोना का कहर जारी है. इस बीच कुछ लोग ऐसे हैं जो मुर्दों की मदद को सामने आ रहे हैं. ये हैं दिल्ली का एंबुलेंस मैन चिरंजीव मल्होत्रा. दिल्ली में 300 से ज्यादा मौतें रोज हो रही हैं, ऐसे में अस्पताल से इन लाशों को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की भी कमी पड़ रही है. ऐसी लाशों के अंतिम संस्कार के लिए मदद के लिए सामने आए हैं, दिल्ली के 'एंबुलेंस मैन' चिरंजीव मल्होत्रा.
चिरंजीव मल्होत्रा हर रोज 35 से 40 लाशों का अंतिम संस्कार करवाते हैं. अपनी एंबुलेंस के जरिए अस्पताल से कोरोना से हुई मौत के बाद लाशों को लेकर श्मशान घाट पहुंचाते हैं. जिन लोगों के पास पैसे नहीं होते, उन लाशों का अंतिम संस्कार अपने पैसों से करवाते हैं. कई लोग कोरोना से मौत के बाद अपने परिजनों की लाशों को सड़क पर छोड़ देते हैं या अस्पतालों से नहीं लेकर आते, ऐसी लाशों को भी अपनी एंबुलेंस में रखकर चिरंजीव मल्होत्रा उनका अंतिम संस्कार करवाते हैं.
चिरंजीव मल्होत्रा पिछले एक साल में लावारिस और कोरोना से मृत हुए लगभग 12 सौ लोगों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं. चिरंजीव मल्होत्रा की अपनी तार बनाने की फैक्ट्री है लेकिन इस मुश्किल घड़ी में जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए वह हर रोज कोशिश कर रहे हैं. वे प्रतिदिन लगभग 35 से 40 कोरोना वाली लाशों का अंतिम संस्कार दिल्ली के अलग-अलग श्मशान घाट में करा रहे हैं.