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सांस से होने लगे कोरोना टेस्ट, तुरंत रिजल्ट...अमेरिका में भी मांगी गई मंजूरी

ये कोविड टेस्ट ब्रेथ एनालाइजर के जरिए किये जाते हैं. सिंगापुर और नीदरलैंड जैसे मुल्कों में पहले ही इस टेस्ट को मंजूरी दी जा चुकी है और वहां इसका इस्तेमाल भी किया जा रहा है. अब अमेरिका में भी इसके उपयोग की मंजूरी मांगी गई है. 

ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के दौरान (फोटो-रॉयटर्स) ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के दौरान (फोटो-रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ब्रेथ एनालाइजर के जरिए हो रहे कोरोना टेस्ट
  • कई देशों में इस डिवाइस का होने लगा उपयोग
  • एक कंपनी ने अमेरिका में भी मांगी मंजूरी

भारत में जिस तकनीक का इस्तेमाल नशा करने वालों के बारे में पता लगाने के लिए किया जाता है वैसा ही तरीका कुछ देशों में कोरोना टेस्ट के लिए उपयोग में लाया जा रहा है. यानी सांस से ही कोरोना के नेगेटिव या पॉजिटिव होने का पता किया जा रहा है. ये बेहद आसान तरीका है जिसका रिजल्ट कुछ सेंकड्स में ही आ जाता है. 

ये कोविड टेस्ट ब्रेथ एनालाइजर के जरिए किये जाते हैं. सिंगापुर और नीदरलैंड जैसे मुल्कों में पहले ही इस टेस्ट को मंजूरी दी जा चुकी है और वहां इसका इस्तेमाल भी किया जा रहा है. अब अमेरिका में भी इसके उपयोग की मंजूरी मांगी गई है. 

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बताया है कि कंपनी ने अपने कोविड-19 ब्रेथ एनालाइजर के इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अमेरिकन फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में आवेदन किया है. 

क्या है ये टेस्ट, कैसे होता है? 

दुनिया भर की तमाम कंपनी इस तकनीक को विकसित करने में लगी हैं. ताकि जीवन का हिस्सा बन चुके कोरोना से निपटना आसान हो सके. इसी कड़ी में डच कंपनी ब्रेथोमिक्स ने SpiroNose नाम की डिवाइस तैयार की. ये डिवाइस पानी के बोतल के आकार की है. जिस शख्स का कोरोना टेस्ट करना होता है उसे इस डिवाइस में अपनी सांस छोड़नी पड़ती है. अगर, उस शख्स के अंदर कोरोना के लक्षण होते हैं तो ये डिवाइस उसे डिटेक्ट कर लेती है और कुछ सेकंड में ही पता लग जाता है कि वो इंसान कोरोना पॉजिटिव है या नेगेटिव.

SpiroNose डिवाइस

ब्रेथोनिक्स कंपनी की इस डिवाइस को सिंगापुर में मई के महीने में ही मंजूरी दे दी गई थी. ब्रेथोनिक्स के अलावा सिंगापुर में सिल्वर फैक्ट्री टेक्नोलॉजी के कोविड-19 ब्रेक एनालाइजर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. नीदरलैंड में भी इस कोरोना टेस्टिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. अब अमेरिका में भी तैयारी की जा रही है. ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में अपने कोविड-19 ब्रेथ एनालाइजर के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मांगी है. 

कंपनी का क्या है कहना

ब्रेथोमिक्स के चीफ टेक्नोलॉजी एंड साइंटिफिक ऑफिसर ने बताया, ''हम अपने सिस्टम को ट्रेन करते वक्त बताते हैं कि ये अस्थमा की स्मैल है या ये लंग कैंसर की स्मैल है. इस तरह डाटाबेस तैयार हो जाता है.'' उन्होंने बताया कि नीदरलैंड में बड़ी संख्या में टेस्टिंस सेंटर्स पर इस डिवाइस का इस्तेमाल किया जा रहा है, हालांकि कुछ जगह समस्या भी देखने को मिली. मई में ही एम्सटर्डम के हेल्थ डिपार्टमेंट ने 25 गलत रिपोर्ट आने पर SpiroNose के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. ब्रेथोमिक्स के अधिकारी ने बताया कि वो डिवाइस नहीं, इस्तेमाल करने वाली गलती थी. लिहाजा, स्पिरोनोज की टेस्टिंग बाद में शुरू हो गई थी. 

SpiroNose की स्टडी

स्पिरोनोज को लेकर 4,510 लोगों पर एक स्टडी की गई थी. रिसर्चर्स की एक टीम ने बताया कि डिवाइस ने कम से कम 98 प्रतिशत लोगों की सही पहचान की, जिन्हें कोविड था. हालांकि, स्टडी में ये भी पाया गया कि SpiroNose में फॉल्स पॉजिटिव की संभावना ज्यादा हैं.  इस वजह से यह डिवाइस लोगों को इस्तेमाल के लिए नहीं दी गई.

बहरहाल, ये तकनीक अब धीरे-धीरे इस्तेमाल में लाई जा रही है. कुछ विशेषज्ञ इसकी प्रमाणिकता को मान रहे हैं तो कुछ इसे उपयोगी मानते हुए एक बेहतर वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में देख रहे हैं. इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी में कैमिस्ट पॉल थॉमस का कहना है कि ''ये अब स्पष्ट हो चुका है कि आप इस बीमारी (कोविड) का ब्रेथ टेस्ट से पता लगा सकते हैं.''

वहीं, कुछ रिसर्चर्स का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि ये सांस आधारित ये टेस्ट अभी किये जा रहे कोविड टेस्ट को पूरी तरह से रिप्लेस कर पाएगा.

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