फिजिकल सोने में निवेश कम हो, इसी उद्देश्य से साल 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की शुरुआत की गई थी, यह स्कीम चंद वर्षों में ही काफी पापुलर हो गई. वैसे भी हमारे देश में सोने को सुरक्षित निवेश के तौर देखा जाता है, और अगर सरकार निवेश की गारंटी ले, तो फिर लोग पैसे लगाने से बिल्कुल नहीं हिचकते हैं.
दरअसल, SGB धीरे-धीरे सरकारी खजाने पर बोझ बनता जा रहा था. जिसके बाद सरकार इससे पीछा छुड़ाने का मन बना लिया. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की आखिरी किस्त फरवरी 2024 में जारी की गई थी, उस समय सोने का भाव 6,263 प्रति ग्राम भाव था. फरवरी-2025 के बजट के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि SGB की नई किस्त अब नहीं जारी की जाएगी, हालांकि पुराने सब्सक्रिप्शन जारी रहेंगे.
2 साल से SGB पर ब्रेक
साल 2015 में SGB पहली बार लॉन्च की गई थी. लॉन्च से फरवरी- 2024 तक SGB की कुल 67 किस्तें जारी की गई थीं. जिसमें करीब 72,274 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदे गए. यह निवेश लगभग 146.96 टन सोने के बराबर है.
दरअसल, पिछले 18 महीने में जिस तेजी से सोने के दाम बढ़े हैं. उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अगर सरकार SGB पर रोक नहीं लगाई होती तो सरकारी खजाने पर इसका काफी बोझ बढ़ जाता, क्योंकि पिछले डेढ़ साल सोने की कीमत करीब दोगुनी हो चुकी है. यानी सरकार को कीमतें बढ़ने की भनक लग चुकी थीं.
अभी के भाव से तुलना करें, तो फिलहाल सोने की कीमत 14,000 रुपये प्रति ग्राम के आसपास है. अगर किसी ने फरवरी- 2024 की SGB सीरीज में निवेश किया होता तो 2 साल में ही उनका निवेश डबल हो जाता. उदाहरण के लिए 2017-18 के दौरान SGB में निवेश करने वालों को 300% से ज्यादा का लाभ मिलता, यानी 8 साल में निवेश करीब-करीब 4 गुना हो जाता.
सरकार को होने वाला था भारी नुकसान
बता दें, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने आखिरी बार फरवरी 2024 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी किए थे, उस समय सोने का थोक बाजार भाव लगभग इसी रेंज में था. उसके बाद से कोई किस्त नहीं आई है, करीब 2 साल हो चुके हैं. हालांकि पुराने बॉन्ड परिपक्व हो रहे हैं, और RBI समय-समय पर Redemption प्राइस की घोषणा करता रहता है, जैसे कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में भी हुई थी.
इस योजना के तहत निवेशक सोने के बाजार भाव पर आधारित बॉन्ड खरीदते थे, जिन पर 2.5% प्रति वर्ष ब्याज भी मिलता था, जो सोने के भाव बढ़ने के साथ जुड़ा हुआ था. अब अगर अभी तक बॉन्ड जारी होते रहता तो RBI को मौजूदा भाव के हिसाब से सोने के बराबर रुपये देना पड़ता, जो कि भारी वित्तीय बोझ बन जाता. इसके अलावा 2.5% वार्षिक ब्याज और बॉन्ड की परिपक्वता पर रिटर्न देना भी सार्वजनिक उधारी की लागत को बढ़ा रहा था, जो कि सरकार के लिए एक तरह से डबल झटका था.
जिनके पास हैं SGB, वो अब क्या करें?
हालांकि जिन निवेशकों ने पहले SGB में निवेश किया था, उनके बॉन्ड परिपक्व हो रहे हैं, उन्हें मौजूदा भाव के हिसाब से पैसे मिल रहे हैं. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) योजना की शुरुआत 2015 में भारत सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मिलकर की थी, ताकि लोगों को सोने में निवेश का सुरक्षित वैकल्पिक तरीका दिया जा सके.
अब नए SGB नहीं जारी किए जा रहे, लेकिन पहले से जारी बॉन्ड अभी भी वैध हैं और निवेशक उन्हें बाजार में बेच सकते हैं, एक्सचेंज में ट्रेड कर सकते हैं या परिपक्व होने पर RBI से रिडीम कर सकते हैं. सोवरेन गोल्ड बॉन्ड की सबसे खास बात यह थी कि इसने भारत के पारंपरिक भौतिक सोने के निवेश को एक फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट के रूप में बदल दिया था.