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साइड इनकम पर लगेगा कितना टैक्स? Moonlighting से दूसरी जॉब करने वालों की बढ़ी चिंता

जब आप फ्रीलांसिंग काम से पैसा कमाते हैं, तो ये गलती कभी ना करें कि अपनी पूरी कमाई को इनकम के तौर पर दिखा दें. फ्रीलांसिंग से कमाई करने वाले लोग भी अपनी इनकम का एक हिस्सा खर्च के तौर पर दिखा सकते हैं. इसमें डेटा चार्जेस, इलेक्ट्रिसिटी बिल, सॉफ्टवेयर वगैरह के सब्सक्रिप्शन चार्ज को शामिल किया जा सकता है.

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साइड इनकम पर देना होगा एक्स्ट्रा टैक्स? (Photo: Getty)
साइड इनकम पर देना होगा एक्स्ट्रा टैक्स? (Photo: Getty)

न दिनों जॉब मार्केट में Moonlight पॉलिसी के बहुत चर्चे हैं. एक साथ दो नौकरी करने को लेकर कई कंपनियां जहां इसे लेकर नरम रुख रही हैं, तो कई कंपनियों ने खुलकर इसका विरोध किया है. हालांकि यहां हम बात करेंगे कि अगर आप मूनलाइट पॉलिसी के तहत दूसरी जॉब (Moonlighting) करते हैं, तो क्या आपको एक्स्ट्रा इनकम टैक्स देना होगा.

क्या है मूनलाइटिंग?
वैसे मूनलाइट पॉलिसी का जिक्र सबसे ज्यादा नई पीढ़ी की टेक कंपनियों (New Age Tech Companies or StartUp) और आईटी कंपनियों के एम्प्लॉइज के बीच हो रहा है. कई सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल जहां इस ट्रेंड को एक नए अवसर की तरह देख रहे हैं, तो कई को ढेर सारी चिंताएं भी हैं. सामान्य भाषा में समझें तो मूनलाइटिंग का मतलब है कि कहीं पर पहले से नौकरी करते हुए एक साइड इनकम या दूसरी इनकम करना. 

बात साइड इनकम पर टैक्स की
अब हम बात करते हैं मूनलाइटिंग से होने वाली साइड इनकम पर टैक्स की. अगर आप सैलरीड एम्प्लॉई हैं, तब आपको Income Tax Return का फॉर्म ITR-1 भरना होता है. जबकि अगर आपकी इनकम फ्रीलांसिंग काम से होती है, तब आपको ITR-4 फॉर्म भरना होता है, क्योंकि इस इनकम को Income from Profession माना जाता है.

कौन से खर्चों पर बचा सकते हैं टैक्स
जब आप फ्रीलांसिंग काम से पैसा कमाते हैं, तो ये गलती कभी ना करें कि अपनी पूरी कमाई को इनकम के तौर पर दिखा दें. फ्रीलांसिंग से कमाई करने वाले लोग भी अपनी इनकम का एक हिस्सा खर्च के तौर पर दिखा सकते हैं. ऐसे खर्च जिसकी आपको फ्रीलांसिंग काम करने के लिए जरूरत पड़ी हो. हालांकि इसके लिए आपकी टोटल फ्रीलांसिंग इनकम 50 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. 

इसमें डेटा चार्जेस, इलेक्ट्रिसिटी के उपयोग का उपयुक्त खर्च, सॉफ्टवेयर और अन्य टूल्स के सब्सक्रिप्शन चार्ज इत्यादि को शामिल किया जा सकता है. एक व्यक्ति अपनी कुल फ्रीलांसिग इनकम के 50% तक के बराबर आय को कर योग्य आय (Taxable Income) दिखाने का क्लेम कर सकता है.

उदाहरण के लिए समझें, अगर आपकी फ्रीलांसिंग आय 16 लाख रुपये है, तो आप अपनी टैक्सेबल इनकम 8 लाख रुपये दिखा सकते हैं. ऐसे में अगर आपकी सैलरी से इनकम 20 लाख रुपये है तो आपकी टोटल इनकम 28 लाख रुपये होगी.

मूनलाइटिंग पर कितना लगेगा टैक्स?
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अगर आप अपनी सैलरी वाली नौकरी के साथ-साथ मूनलाइटिंग भी कर रहे हैं, तो आपको अपनी दूसरी जॉब यानी कि फ्रीलांस इनकम को हर तिमाही के आधार पर कैलकुलेट करना चाहिए. TDS का क्रेडिट चुकाने के बाद अगर टैक्स स्लैब के हिसाब से आपकी कोई लायबिलिटी बनती है, तभी आपको एक्स्ट्रा इनकम टैक्स भरना होगा, ऐसा नहीं होने पर कोई टैक्स नहीं देना होगा.

एक और बात, अगर ऊपर वाले उदाहरण की तरह आपकी कुल इनकम 28 लाख रुपये है, तो आपको इनकम टैक्स लॉ के हिसाब से 80C और 80D के तहत मिलने वाली छूट का भी लाभ मिलेगा.


 

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