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Pakistan Crisis: कभी भारत से खुशहाल था पाकिस्तान, आतंकवाद से महंगाई तक... ऐसी पड़ी मार कि हो गया कंगाल

Pakistan Economic Crisis: साल 1960 में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय जहां 6,797 पाकिस्तानी रुपये थी, तो वहीं उस समय भारत में यह आंकड़ा इससे कम यानी 6,708 रुपये था. यानी भारत के मुकाबले ये 89 रुपये ज्यादा थी. वहीं पाकिस्तान के लोगों को खाने के लाले पड़े हैं.

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छह दशक में पाकिस्तान कैसे होता गया बदहाल?
छह दशक में पाकिस्तान कैसे होता गया बदहाल?

पाकिस्तान (Pakistan) आज दाने-दाने को मोहताज है. देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) खत्म होने की कगार पर है और महंगाई (Pakistan Inflation) अपने चरम पर पहुंच गई है. हालात ये बन गए हैं कि आटे का अकाल पड़ गया है और लोगों की थाली से रोटी गायब हो गई है. क्या आप जानते हैं आज से करीब 60 साल पहले पाकिस्तान, भारत से भी खुशहाल था...लोगों की जेब में पैसा था, लेकिन प्राकृतिक आपदा के अलावा देश की 'आतंकनीति' ने आज ये हालात पैदा कर दिए हैं कि इकोनॉमी (Pakistan Economy) धराशायी हो चुकी है और देश अमेरिका-यूएई जैसे देशों से मदद की गुहार लगा रहा है. 

देश के लोगों को पड़े खाने के लाले
पाकिस्तान में हर बीतते दिन के साथ हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं. सरकार भी ये मान चुकी है कि देश की आर्थिक स्थित खराब हो चुकी है. ताजा हालातों की बात करें तो गेहूं की किल्लत के चलते आटे के दाम 150 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गए हैं, चिकन 650 रुपये प्रति किलो औद दूध भी 150 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने की कगार पर पहुंच जाने के चलते सरकार जरूरी सामानों का आयात करने में भी सक्षम नहीं है. इसके चलते Petrol-Diesel से लेकर रोजमर्रा के सामानों की कमी से लोग जूझ रहे हैं. रसोई गैस सिलेंडर का दाम 10,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच चुका है. 

महंगाई 25 फीसदी के करीब पहुंची
आज हालात ये हो गए हैं कि देश में महंगाई दर 25 फीसदी के करीब पहुंच चुकी है और कभी भारत से ज्यादा प्रति व्यक्ति आय (Pakistan Per Capita Income) वाले पाकिस्तान के लोगों की जेब में पैसा नहीं बचा है. देश की ये स्थिति एकदम से नहीं हुई है, बल्कि धीरे-धीरे पाकिस्तान की हालत पतली होती चली गई. एक ओर जहां Pakistan Economy में घुन लगती गई, तो देश का फोकस जनता की भलाई से ज्यादा आतंकनीति पर रहा. इसके साथ ही बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने भी पाकिस्तान को मस्त से पस्त करने का काम किया. 

89 रुपये ज्यादा थी प्रति व्यक्ति आय 
पाकिस्तान को 14 अगस्त 1947 भारत से अलग एक नए मुल्क के तौर पर पहचान मिली थी. साल 1960 आते-आते देश के हालात भारत से भी बेहतर थे और लोगों की जेब में ज्यादा पैसा था. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों पर गौर करें तो साल 1960 में पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय जहां 6,797 पाकिस्तानी रुपये थी, तो वहीं उस समय भारत में यह आंकड़ा इससे कम यानी 6,708 रुपये था. यानी भारत के मुकाबले ये 89 रुपये ज्यादा थी. लेकिन साल 2021 आते-आते भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,85,552 रुपये पहुंच गई और पाकिस्तान की 1,25,496 पाकिस्तानी रुपये रह गई. 

खत्म होने की कगार पर Forex Reserve 
इन 60 सालों में भारत ने रॉकेट की रफ्तार से आगे बढ़ने का काम किया, जबकि पाकिस्तान आतंकवादियों की शरणस्थली बनकर लगातार गर्त में जाता रहा. आज पाकिस्तान बुरी तरह कर्ज के जाल में फंसा हुआ है. पाकिस्तानी इकोनॉमी पर पैनी निगाह रखने वाले इकोनॉमिस्ट्स की मानें तो उसे सालाना आधार पर अगले दो सालों में प्रति वर्ष 20-20 अरब डॉलर से ज्यादा कर्ज का भुगतान करना है. इस पेमेंट के लाले हैं और आर्थिक संकट से जूझता पाकिस्तान कर्ज पर कर्ज लेता जा रहा है.

विदेशी मुद्रा भंडार की बात करें तो वर्ल्ड बैंक डाटा (World Bank Data) के मुताबिक, साल 1960 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5.46 हजार करोड़ रुपये था, जबकि पाकिस्तान का 2.61 हजार करोड़ पाकिस्तानी रुपये था. लेकिन साल 2021 में जहां पाकिस्तान का Forex Reserve महज 35,000 करोड़ रुपये रह गया, तो दूसरी ओर भारत दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था बनकर उभरा और 2021 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 45.92 लाख करोड़ रुपये हो गया. ताजा आंकड़ों को देखें तो बीती छह जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में India's Forex Reserve 561.58 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे पहले 30 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में ये आंकड़ा 562.85 अरब डॉलर था. वहीं पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 2014 के निचले स्तर पर आ गया है. 

आतंकनीति के आगे शिक्षित आबादी फेल
एक ओर जहां पाकिस्तान दुनिया भर में आतंक की सरजमीं के तौर पर मशहूर होता चला गया, तो वहीं देश की शिक्षित आबादी का आंकड़ा कम होता चला गया. भारत और पाकिस्तान में अंतर को देखें तो 1960 में पाकिस्तान की शिक्षित आबादी 16.4 फीसदी थी, वहीं भारत की 18.3 फीसदी. जबकि साल 2021 में ये फासला बहुत बड़ा हो गया. वर्ल्ड बैंक के डाटा को देखें तो ये आंकड़ा भारत में 74 फीसदी और पाकिस्तान में 58 फीसदी था. 

एक नहीं, Pak की बदहाली के कई कारण
पाकिस्तान की चरमरा चुकी अर्थव्यवस्था के कारणों पर गौर करें तो एक नहीं बल्कि कई वजहें सामने आती हैं. देश में जिस तेजी से महंगाई बढ़ी लोगों की परचेजिंग पावर भी उसी रफ्तार से घटी है. सरकार आंख मूंदे बैठे रही और सरकार का खजाना खाली हो गया. इससे जरूरी सामानों के आयात के भी लाले पड़ गए. आतंकी गतिविधियों के चलते पाकिस्तान से बड़ी-बड़ी कंपनियों ने अपना कारोबार समेट लिया और इकोनॉमी पर गहरी चोट लगी.

पहले से बदहाल अर्थव्यवस्था के लिए बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा घाव पर नमक छिड़कने वाली साबित हुई. पिछले साल जून में आई विकराल बाढ़ के चलते देश को तकरीबन 30 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. इस बीच देश को सही ट्रैक पर लाने के बजाय सियासी गलियारों में अलग ही घमासान चल रहा है. 

जिसका दुश्मन पास रखा, उससे मदद की गुहार
आज इकोनॉमी ध्वस्त होने के बाद पाकिस्तान दूसरे देशों की ओर आस भरी निगाहों से देख रहा है. इसमें अमेरिका भी शामिल है. लेकिन, दुनिया जानती है आतंकियों का अड्डा कहे जाने वाले पाकिस्तान ने ही अमेरिका के मोस्ट वांटेड और वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर अटैक के सरगना अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को शरण दी थी. जिसे अमेरिका की सेना ने 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था. फिलहाल, पाकिस्तान सिर्फ अमेरिका-यूएई से ही नहीं बल्कि आईएमएफ जैसे वैश्विक निकायों से भी मदद मांग रहा है. 


 

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