NBFC कंपनी के शेयरों में पिछले कुछ महीनों से शानदार तेजी देखी जा रही है. इस शेयर निवेशकों खूब रिटर्न दिया है. अब पिछले एक महीने का ही आंकड़ा देखें तो यह शेयर 34 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है और पिछले छह महीने में इसने 74 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है.
शुक्रवार को भी इस शेयर में शानदार तेजी देखने को मिली थी. यह शेयर 20 फीसदी का अपर सर्किट लगाकर 84 रुपये पर पहुंच गया. यह इस शेयर का 52 सप्ताह का हाई लेवल है. हम जिस शेयर की बात कर रहे हैं, वह सरकारी कंपनी IFCI Ltd है.
क्यों 20 फीसदी उछला ये शेयर?
कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स ने IFCI के शेयरों में आई इस तेज उछाल की वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) में इसकी इनडायरेक्ट उपस्थिति है. सरकारी मालिकाना वाली ये कंपनी स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SHCIL) में अपनी बहुत बड़ी हिस्सेदारी के माध्यम से NSE में हिस्सेदारी रखती है.
NSE का आईपीओ जल्द आने की उम्मीद में इस शेयर में शानदार तेजी देखी जा रही है. मास्टर कैपिटल सर्विसेज के मुख्य रिसर्च अधिकारी रवि सिंह ने कहा कि आईएफसीआई के निवेश एनएसई से जुड़े हुए हैं, और इस उम्मीद के बीच स्टॉक में तेजी आ रही है कि एक्सचेंज की सार्वजनिक लिस्टिंग अंतिम चरण के करीब है. वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में इक्विटी स्ट्रैटेजी की निदेशक क्रांति बाथिनी ने भी कहा कि आईएफसीआई के शेयर की कीमत में उतार-चढ़ाव एनएसई आईपीओ के कारण दिखाई दे रहा है.
शेयर पर तकनीकी नजरिया क्या कहता है?
एंजल वन के टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च के चीफ मैनेजर ओशो कृष्ण ने कहा कि IFCI के शेयरों की कीमत और वॉल्यूम में जबरदस्त उछाल आया है और यह 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. शेयर ने 65-70 रुपये के स्तर को तोड़ते हुए तेजी से उछाल मारा है. इसके अलावा, हाल ही में आई गिरावट का भी जबरदस्त फायदा उठाया गया है. संकेतक काफी ऊंचे हैं, और 88-90 रुपये के दायरे में निकट प्रतिरोध मौजूद है. जब तक तेज़ी बनी रहती है, तब तक प्रॉफिट बुक करने की सलाह दी जाती है.
कंपनी के चौथी तिमाही के नतीजे
मार्च में समाप्त तिमाही के लिए, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) ने ऑपरेशन से कुल राजस्व 470 करोड़ रुपये दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष की इसी तिमाही में यह 413.61 करोड़ रुपये था, जो लगभग 13.63 प्रतिशत की बढ़ोतरी है.
इस तिमाही में ब्याज से होने वाली आय पिछले वर्ष की इसी अवधि के 149.07 करोड़ रुपये से बढ़कर 153.40 करोड़ रुपये हो गई. हालांकि, प्रॉफिट आफ्टर टैक्स वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में घटकर 34 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 260 करोड़ रुपये था. मार्च 2026 तक, सरकार के पास IFCI में 72.57 प्रतिशत हिस्सेदारी थी.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)