रोहित की सैलरी 50 हजार थी, उसने घर खरीद लिया, मेरी सैलरी तो उससे ज्यादा ही है, मुझे भी अब घर खरीद लेना चाहिए. क्या दूसरे को देखकर घर खरीदना सही फैसला होगा? और 50 हजार सैलरी पर रोहित को घर खरीदना चाहिए था? ये ऐसे सवाल हैं, जिसके जवाब आपको भी जानना चाहिए. कब घर खरीदना चाहिए, घर खरीदने के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए, कहां खरीदना चाहिए? अगर इन सवालों के जवाब आप जान जाएंगे, तो फिर होम लोन के चक्कर में कभी नहीं फंसेंगे.
दरअसल, सभी का सपना होता है कि सबसे पहले उसके पास अपना एक घर हो, फिर बाकी की चीजें. घर के साथ इमोशनल एंगल भी जुड़ा होता है. इसलिए कुछ लोग नौकरी पकड़ते ही सबसे पहले घर खरीद लेते हैं, खासकर मेट्रो शहरों में फ्लैट खरीदने का प्रचलन है. ये संभव इसलिए भी है कि आसानी से होम लोन मिल जाता है, और डाउन पेमेंट (Down Payment) में लोग पूरी सेविंग झोंक देते हैं.
फ्लैट खरीदने का सबसे आसान फॉर्मूला
नियम ये कहता है कि अगर आप प्राइवेट जॉब में हैं तो घर खरीदने (Buy House) से पहले कम से कम इन 4 पहलुओं पर आपको विचार करना चाहिए, उसके बाद फैसला लें. जब आप इन पहलुओं पर विचार करेंगे, तो आपको किसी एक्सपर्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी, आप खुद फैसला ले सकते हैं कि आपके लिए सबसे पहले घर जरूरी है या नहीं?
कितनी होनी चाहिए सैलरी (पहला पैमाना): नौकरी-पेशा लोगों को तब घर खरीदना चाहिए, जब होम लोन की EMI की राशि कमाई यानी सैलरी का केवल 20 से 25 फीसदी हिस्सा हो. उदाहरण के तौर पर अगर आपकी मंथली सैलरी 1 लाख रुपये है, तो आप 25 हजार रुपये महीने होम लोन की EMI चुका सकते हैं. लेकिन अगर सैलरी 50 से 70 हजार रुपये के बीच है और होम लोन लेकर घर खरीदते हैं, उसकी EMI हर 25 हजार रुपये महीने आती है तो फिर वित्तीय तौर पर ये फैसला गलत माना जाएगा. अपने लोन के जाल में फंस सकते हैं. क्योंकि अधिकरत लोग होम लोन कम से कम 20 साल के लिए लेते हैं.
यह सोच या सलाह बिल्कुल गलत है कि घर खरीदना ही नहीं चाहिए, किराये पर ही रहने में फायदा है. अगर सैलरी की 25 फीसदी राशि ही लोन की EMI बनती है तो जरूर घर खरीदें. हालांकि अगर सैलरी 50 से 70 हजार रुपये के बीच है और होम लोन की मंथली किस्त 20 हजार रुपये तक रहती है, तो आप अधिकतम 25 लाख रुपये तक का घर ले सकते हैं.
लेकिन अगर घर की कीमत 30 लाख रुपये से अधिक है, फिर 50 से 70 हजार की सैलरी वालों के लिए किराये पर ही रहने में फायदा है. इस दौरान हर महीने बचत पर फोकस करें, और जब सैलरी एक लाख रुपये के आसपास पहुंच जाए, फिर अधिक डाउन पेमेंट कर घर खरीद सकते हैं. जितना अधिक डाउन पेमेंट करेंगे, उतनी कम EMI बनेगी. वित्तीय तौर पर माना जाता है कि अगर किसी की सैलरी एक लाख रुपये है, तो वो 30 से 35 लाख रुपये तक का घर खरीदने का फैसला ले सकता है. वहीं अगर सैलरी डेढ़ लाख रुपये महीने है, तो 50 लाख रुपये तक घर खरीदना सही रहेगा. यानी हर हाल में सैलरी का अधिकतम 25 फीसदी राशि ही होम लोन की EMI होनी चाहिए.
घर की जरूरत है या नहीं (दूसरा पैमाना): हर किसी को जरूरत के हिसाब से फैसला लेना चाहिए. आप काम क्या करते हैं, आपका जॉब प्रोफाइल क्या है? इस आधार पर फैसला लेना चाहिए. अगर आप सबसे पहले घर ले लेते हैं तो एक तरह से आप उस शहर में बंधकर रह जाएंगे. अधिकतर लोग करियर ग्रोथ की वजह से शुरुआती दौर में एक शहर से दूसरे शहर में शिफ्ट हो जाते हैं. लेकिन पहली नौकरी के साथ ही घर खरीद लेने पर लोग नौकरी बदलने की स्थिति में नहीं रहते हैं. क्योंकि नए शहर में जाकर किराये पर रहना और फिर अपने घर को किराये पर देना वो उचित नहीं समझते. साथ ही अगर सेक्योर जॉब नहीं है तो फिर हड़बड़ी में घर न खरीदें.
कहां खरीदें घर (तीसरा पैमाना): अगर घर खरीदने का फैसला कर लिया है तो फिर प्रॉपर्टी का चयन जरूर करें. अगर फ्लैट खरीदना है, तो ऐसे लोकेशन मे खरीदें जहां रेंट में अच्छी रकम मिलती हो. साथ ही फ्लैट की कीमत में सालाना कम से कम 10 फीसदी की बढ़ोतरी हो. ताकि महंगाई के हिसाब से फ्लैट की कीमत भी बढ़ती जाए और जब होम लोन चुकता हो जाए यानी 20 साल के बाद तो फ्लैट की मौजूदा कीमत बॉयिंग प्राइस की तुलना में कम से कम तिगुनी होनी चाहिए.
फ्यूचर प्लान न हो प्रभावित (चौथा पैमाना): कुछ लोग पहली नौकरी के साथ ही घर और कार खरीद कर अपने ऊपर EMI की बोझ डाल लेते हैं. जो आगे चलकर बिल्कुल गलत फैसला साबित होता है. क्योंकि लोन की EMI चुकाने में आपके समय निकल जाएंगे. आप सेविंग के बारे में सोच नहीं पाएंगे, क्योंकि सैलरी आते ही EMI के बाद उतने पैसे बचेंगे, जिससे आप घर के खर्चे पूरे कर सकते हैं, चाहकर भी सेविंग नहीं कर पाएंगे. इसलिए जरूरत के हिसाब से फैसले लें. कमाई को आधार बनाकर फैसले लेंगे तो वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. एक और काम की बात ये है कि पहली नौकरी के साथ ही अगर सेविंग (Saving) की शुरुआत कर देंगे तो 40 साल की उम्र में आप अपने रिटायरमेंट को लेकर आश्वस्त हो जाएंगे.