हर कोई नौकरी (Job) क्यों करता है, इसलिए कि वो परिवार की जरूरतों को पूरा कर सके. भारतीय परिवेश में अधिकतर नौकरी-पेशा लोगों का लक्ष्य होता है कि उसके पास एक घर हो, एक कार हो और बैंक बैलेंस हो. क्योंकि मध्यवर्गीय परिवार इससे ज्यादा की न तो उम्मीद करता है, और न ही उतनी सैलरी होती है, जिससे इससे ज्यादा बड़े सपने देखा जाए.
अब सवाल उठता है कि घर, गाड़ी और बैंक बैलेंस के लिए कितनी सैलरी (Salary) होनी चाहिए, ताकि इन सपनों को पूरा किया जा सके. सबसे खास बात ये है कि आमदनी और खर्च शहर के हिसाब से तय होता है. अगर छोटे शहर हैं, तो वहां घर सस्ता मिल जाएगा. दैनिक जरूरत की चीजें भी सस्ती मिल जाएंगी. लेकिन अगर मेट्रो शहर (Metro City) है तो यहां सबकुछ छोटे शहर के मुकाबले महंगा हो जाता है.
लेकिन ये भी सच है कि अधिकतर प्राइवेट जॉब (Private Job) भी बड़े यानी मेट्रो शहरों में ही है. इसलिए नौकरी बड़े शहरों में करते-करते अधिकतर लोग बसने का प्लान भी वहीं कर लेते हैं. इसके लिए सैलरी और खर्च के बीच के तालमेल बैठाना होता है. अब सीधे मुद्दे पर लौटते हैं... एक मेट्रो शहर में घर, गाड़ी और बैंक बैलेंस के लिए कितनी सैलरी होनी चाहिए?
50 हजार की सैलरी में सपने कैसे सच करें?
इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के हिसाब से बड़े शहरों में औसतन 50 हजार रुपये सैलरी होती है. अधिकतर लोग इससे ज्यादा भी सैलरी पाते हैं, जबकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जिनकी सैलरी 50 हजार रुपये महीने से भी कम होती है. लेकिन एक अनुमान के मुताबिक 4-5 साल एक्सपीरियंस वालों की सैलरी 50 हजार रुपये महीने होती है.
अब आइए जानते हैं कैसे 50 हजार रुपये महीने की सैलरी पर कोई घर, गाड़ी खरीदने से लेकर बैंक बैलेंस तक कर सकता है. फॉर्मूला ये कहता है कि सैलरी में से आधी राशि यानी 25 हजार रुपये घर खर्च के लिए अलग कर देना चाहिए. उसके बाद बाकी बचे 25 हजार रुपये में से आपको घर, गाड़ी और बैंक बैलेंस (Bank Balance) का प्लान करना होगा.
वैसे तो मेट्रो शहरों में 2 BHK फ्लैट की कीमत कम से कम 30 लाख रुपये होती है. जिसे खरीदने के लिए न्यूनतम 3 से 5 लाख रुपये तक का डाउन पेमेंट करना होता है. उसके बाद बाकी का पैसा बैंक से होम लोन लेना पड़ता है. अगर 25 लाख रुपये बैंक से होम लोन लेते हैं, तो उसकी EMI हर महीने करीब 20-22 हजार रुपये आएगी. लेकिन अगर 50 हजार सैलरी वाले 20 से 22 हजार रुपये महीने EMI चुकाने में लगा देंगे तो फिर कार, सेविंग और बैंक बैलेंस कैसे?
हर किसी के लिए इमरजेंसी फंड जरूरी
ऊपर हमने कई जगह बैंक बैलेंस का जिक्र किया है, यहां बैंक बैलेंस का मतलब है इमरजेंसी फंड. जो हर किसी को रखना चाहिए. नियम के मुताबिक हर किसी को अपने तीन महीने का खर्च इमरजेंसी फंड के तौर पर रखना चाहिए. यानी अगर किसी का मंथली खर्च 25 हजार रुपये महीने है तो उसे 75 हजार रुपये अपने अकाउंट में इमरजेंसी फंड के तौर पर रखना चाहिए.
अब आपको बताते हैं कि कैसे 50 हजार रुपये की सैलरी वाले ये सब संभव कर सकते हैं. सबसे खास बात घर-गाड़ी खरीदें या ना खरीदें. लेकिन हर महीने 20 से 30 फीसदी सेविंग जरूर करें. ऐसे में अगर आपकी सैलरी 30 हजार है या 40 हजार, आपको हर महीने इसमें से 20 फीसदी राशि बचानी चाहिए. ऐसे में 30 हजार की सैलरी वाला हर महीने 20 फीसदी बचाता है, तो 50 हजार की सैलरी तक पहुंचते-पहुंचते उसके पास बचत की राशि बढ़कर बड़ा फंड बन जाएगा. इसलिए कम सैलरी वालों की ये कोशिश होनी चाहिए, कि घर खरीदते समय ज्यादा से ज्यादा डाउन पेमेंट कर दिया जाए.
घर-कार के लिए ये होना चाहिए प्लान
बचत फॉर्मूला ये कहता है कि 50 हजार वेतन वालों को 30 लाख का घर खरीदने के लिए 20 से 22 हजार रुपये महीने की EMI आएगी, जबकि सेविंग की राशि से सेकंड हैंड छोटी कार खरीद सकते हैं, जो 2 से 3 लाख रुपये में आ जाएगी. वहीं अगर 50 हजार की सैलरी वाले शुरू से 20 फीसदी सेविंग करते आए तो उस राशि का इस्तेमाल कार खरीदने में कर सकते हैं. इसके अलावा हर साल सैलरी बढ़ने पर सेविंग को भी बढ़ाते रहें.
अगर छोटे शहरों की बात करते हैं, जहां घर 20 लाख रुपये में आसानी से मिल जाता है. जिसकी EMI करीब 15 हजार रुपये महीने बैठती है. यहां भी फॉर्मूले के मुताबिक 3 लाख रुपये में पुरानी कार खरीद सकते हैं. यही नहीं, छोटे शहरों में आसानी से 20 से 30 फीसदी की राशि सेविंग भी कर सकते हैं. लेकिन मुश्किल तो बड़े शहरों में होता है. क्योंकि यहां तो बड़ी राशि होम लोन की EMI में चली जाती है.
लेकिन यहां भी 50 हजार महीने कमाने वाले 30 लाख का घर, 2 से 3 लाख में कार और करीब 1 लाख रुपये का इमरजेंसी फंड आसानी कर सकता है. इसके लिए केवल नौकरी पकड़ते ही सैलरी में से 20 से 30 फीसदी राशि सेविंग करनी होगी. फिर 50 हजार की आमदनी पर ही घर, गाड़ी और बैंक बैलेंस का सपना पूरा हो सकता है.