अब नेत्रहीन लोग भी दिल्ली के नेशनल म्यूजियम जाकर ऐतिहासिक चीजों और इतिहास की जानकारी ले सकेंगे. नेत्रहीन लोग म्यूजियम में रखी इतिहास को संजोए हर चीज को चाहे आंखों से नहीं, पर अपने स्पर्श से समझ पाएंगे और उसका अनुभव कर पाएंगे. इसके लिए म्यूजियम में रखी चीजों के नकली नमूने बनाए जा रहे हैं.
इस समय नेशनल म्यूजियम में सभ्यता से जुड़ी तमाम चीजें रखी हैं. म्यूजियम में हड़प्पा संस्कृति, चोल शासन, मौर्य वंश, गुप्त शासन काल, मुगल काल और ब्रिटिश काल जैसे तमाम ऐतिहासिक काल से जुड़ी वस्तुएं जैसे मूर्तियों, तस्वीरों, बर्तन, हथियार, कपड़े आदि के लगभग 2 लाख नमूने हैं.
हो चुकी है 'अनुभव' गैलरी की शुरुआत
एक छोटे स्तर पर नेशनल म्यूजियम को ब्लाइंड फ्रेंडली बनाया जा चुका है. लगभग चार महीने पहले म्यूजियम में 'अनुभव' नाम की गैलरी स्थापित की गई, जिसमें इतिहास से जुड़ी मूर्तियों, पेंटिंग, हथियारों के 22 हूबहू नमूने बनाकर रखे गए हैं, जिसे छूकर नेत्रहीन पर्यटक चीजों को महसूस कर सकते हैं. म्यूजियम की संग्रह सहायक शिक्षा रिजी शिबा ने बताया कि पुरानी धरोहर को छूने से खराब होने का खतरा रहता है और इसी बात को ध्यान में रखकर कुछ नमूनों के साथ इस गैलरी की शुरुआत की गई है.
नमूनों के साथ ऑडियो भी तैयार
इस सुविधा के चलते अब तक गैलरी को देखने के लिए 70 नेत्रहीन पर्यटक आ चुके है. इस गैलरी की एक और विशेषता है कि नेत्रहीन लोगों के लिए विशेष तौर पर बनाए गए हर नमूने के बारे में विस्तार से बताता एक ऑडियो भी तैयार किया गया है, जिसे नेत्रहीनों की जरूरत के हिसाब से बनाया गया है. शिबा के मुताबिक ऑडियो और स्पर्श के जरिए नेत्रहीन काफी हद तक हमारी सभ्यता से जुड़ी चीजों के बारे में जान सकेंगे.
हर काल के कुछ चीजों का हुआ चुनाव
अब इसी कोशिश को बड़े पैमाने पर शुरू किया जा रहा है. शिबा ने बताया कि म्यूजियम में लगभग दस गैलरी हैं, जिसमें हर काल से जुड़ी तमाम वस्तुएं हैं. इनकी संख्या लाखों में है. इसलिए सभी के नमूने नहीं बन सकते, हर गैलरी से थोड़े-बहुत सामानों के नमूनें बनवाए जा रहे हैं, जिससे उस युग की ज्यादा से ज्यादा जानकारी मिल सके. जैसे कि हड़प्पा संस्कृति से जुड़ी मूर्तियों, बर्तन, हथियारों के नमूनों का चुनाव किया गया है. इसी तरह और गैलरी से चीजों का चुनाव करके हूबहू नमूने तैयार किए जा रहे हैं.
नेशनल म्यूजियम के कलाकार बना रहे नमूनें
नमूने बनाने के लिए चार चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें प्लास्टर ऑफ पेरिस, पत्थर, मेटल और फाइबर ग्लास का इस्तेमाल किया जा रहा है और इनको नेशनल म्यूजियम के कलाकार ही बना रहे हैं. कुल मिलाकर इसके जरिए पूरे नेशनल म्यूजियम को एक छोटे म्यूजियम में समेटा जा रहा है, जिससे नेत्रहीन पर्यटकों को यहां आकर पूरे नेशनल म्यूजियम को जानने और समझने का मौका मिल सके.
नेत्रहीन लोगों की जरूरत का ख्याल
शिबा ने बताया कि देखने पर पता चल जाता है कि हर युग में चीजों को बनाने में इस्तेमाल की गई शैली अलग-अलग है, चाहे वो मूर्तियां हों, कपड़े या आभूषण. एक आम पर्यटक इन चीजों को देखकर इस बात का अंदाजा लगा सकता है, लेकिन नेत्रहीन पर्यटक को ये बातें पता नहीं चल सकतीं. नमूनों को हूबहू बनाने का मकसद ही यही है कि नेत्रहीन पर्यटकों को यहां आकर पूरा मजा आए.
हिंदी में ऑडियो भी होगा उपलब्ध
अभी ऑडियो इंग्लिश में उपलबध हैं. जैसे ही नई गैलरी बनकर तैयार होगी, उसके लिए हिंदी ऑडियो भी जारी होगा. नई गैलरी की एक अनोखी बात ये भी है कि इसमें हर युग से जुड़े कुछ वास्तविक नमूनों को भी रखा जाएगा. शिबा ने बताया कि इसके लिए एक्सपर्ट से सलाह ली जा चुकी है कि उनको छूने से उसका कोई नुकसान ना हो. मकसद यही है कि कुछ नेत्रहीन पर्यटक असली और नकली नमूनों का भी अंदाजा लगा सकते हैं.