1 अप्रैल से देश में नया लेबर कोड लागू हो चुका है और अब इस महीने की सैलरी नए लेबर कोड के नियम के आधार पर आएगी. इस नियम से कुछ कर्मचारियों के लिए इन-हैंड सैलरी घट सकती है, क्योंकि नए नियम के तहत सैलरी स्ट्रक्चर को लेकर एक खास बदलाव हुआ है. (Photo: ITG)
सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव
नए लेबर कोड के तहत अब सैलरी स्ट्रक्चर में 50 फीसदी बेसिक, 50 फीसदी में महंगाई भत्ता और अन्य अलाउंस रखा गया है, जबकि पहले ऐसा नहीं था. पहले बेसिक सैलरी कम होती थी और बाकी भत्ता ज्यादा होता था और फिर इसमें से पीएफ आदि की कटौती होती थी. (Photo: File/ITG)
बेसिक में जुड़ जाएगा एक्स्ट्रा अमाउंट
नए नियम के तहत अगर बोनस, मकान किराया भत्ता और विशेष भत्ते 50 फीसदी सैलरी से ज्यादा होते हैं तो इसे बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा. इससे कर्मचारियों के बेसिक में इजाफा हो जाएगा. इसके साथ ही पीएफ और बीमा कंर्टीब्यूशन में भी बदलाव होगा. (Photo: Pixabay)
ग्रेच्युटी में होगा इजाफा
कुल मिलाकर, रिटायरमेंट और सामाजिक सुरक्षा लाभ जैसे कि ग्रेच्युटी, बीमा कवरेज और पीएफ में योगदान में बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि कर्मचारियों के लिए घर में मिलने वाले वेतन में अधिक कटौती के कारण थोड़ी कमी आ सकती है. (Photo: Pixabay)
6 लाख सीटीसी सैलरी स्ट्रक्चर
मान लीजिए आपका सीटीसी 6 लाख रुपये है. नए नियम के तहत अब बेसिक सैलरी 20 हजार रुपये से बढ़कर 25,000 रुपये हो जाएगा. फिर HRA 10 हजार से बढ़कर 12,500 रुपये हो जाएगा. बाकी कुल भत्ता 17,600 से कम होकर 10,100 रुपये हो जाएगा. इस नए सैलरी स्ट्रक्चर पर आपकी कुल सैलरी ₹ 47,600 होगी. (Photo: Pixabay)
पीएफ और अन्य कटौती के बाद इन-हैंड सैलरी
अब 47,600 रुपये में से कर्मचारी द्वारा पीएफ में योगदान 3000 रुपये होगा, जो पहले के नियम के तहत 2400 रुपये होता. साथ ही प्रोफेशनल टैक्स 200 रुपये देना होगा. इस हिसाब से देखा जाए तो इन हैंड सैलरी 6 लाख रुपये की सीटीसी पर 600 रुपये कम होकर 44,400 रुपये आएगी. (Photo: File/ITG)