भारत के इलेक्ट्रिक कारों के निर्यात में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है. वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान निर्यात कमाई बढ़कर 369 मिलियन डॉलर हो गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में सिर्फ 22.2 मिलियन डॉलर थी. वहीं निर्यात की गई गाड़ियों की संख्या भी 1,309 से बढ़कर 10,802 यूनिट पहुंच गई. यूरोप इस दौरान भारतीय इलेक्ट्रिक कारों के लिए सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा और स्पेन सबसे आगे रहा.
स्पेन को हुए निर्यात की कीमत 146.4 मिलियन डॉलर रही, जो कुल निर्यात का करीब 40 प्रतिशत है. इस दौरान 4,007 इलेक्ट्रिक गाड़ियां स्पेन भेजी गईं, जिससे यह वैल्यू और वॉल्यूम दोनों के लिहाज से सबसे बड़ा बाजार बन गया. ब्रिटेन दूसरे नंबर पर रहा, जहां 78.7 मिलियन डॉलर की गाड़ियां भेजी गईं. पिछले साल इसी तिमाही में ब्रिटेन को सिर्फ एक गाड़ी भेजी गई थी, इस बार यह संख्या बढ़कर 2,646 हो गई.
यूरोप के कई और देशों में भी भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ी. जर्मनी को 25.1 मिलियन डॉलर, नॉर्वे को 21.1 मिलियन डॉलर और डेनमार्क को 21 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ. इसके अलावा बेल्जियम, नीदरलैंड, ग्रीस, इटली, स्वीडन और पोलैंड को भी अच्छी खासी संख्या में गाड़ियां भेजी गईं.
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यूरोप के अलावा एशिया प्रशांत क्षेत्र में भी भारत ने अपना निर्यात बढ़ाया. जापान को 13.4 मिलियन डॉलर, इजराइल को 2.8 मिलियन डॉलर, ऑस्ट्रेलिया को 2.7 मिलियन डॉलर के साथ सिंगापुर, ताइवान और दक्षिण कोरिया को भी गाड़ियां भेजी गईं. नेपाल जैसे पड़ोसी देश को भी 8.1 मिलियन डॉलर का निर्यात हुआ. लैटिन अमेरिका में ब्राजील, कोलंबिया, चिली और कोस्टा रिका जैसे नए बाजार भी खुले हैं.