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मलेशिया से इम्पोर्ट होने वाले सब्जेक्ट गुड्स पर भारत ने बढ़ायी 5% कस्टम ड्यूटी

मलेशिया से आयात होने वाले सब्जेक्ट गुड्स पर भारत सरकार ने 5 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है. भारत-मलेशिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के तहत कस्टम ड्यूटी में ये बढ़ोतरी की गई है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

  • मलेशिया से आयात होने सब्जेक्ट गुड्स पर बढ़ाई गई कस्टम ड्यूटी
  • 180 दिनों के लिए किया गया इजाफा
मलेशिया से आयात होने वाले सब्जेक्ट गुड्स पर भारत सरकार ने 5 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगाने का ऐलान किया है. भारत-मलेशिया व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते के तहत कस्टम ड्यूटी में ये बढ़ोतरी की गई है. हालांकि ये इजाफा 180 दिनों के लिए ही किया गया है.सरकार का मानना है कि इस कदम से घरेलू व्यापारियों के हितों की रक्षा होगी.

मलेशिया से आयात किए जाने वाले रिफाइंड पाम तेल पर पांच प्रतिशत सेफगार्ड शुल्क लगाया गया है. इस फैसले के बाद इस तेल पर आयात शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है जो 6 महीने बना रहेगा.

भारत दुनिया में वनस्पति तेलों का सबसे बड़ा आयातक है, जो एक साल में लगभग 10 बिलियन डॉलर के मूल्य के उत्पाद आयात करता है. जो कच्चे तेल और सोने के बाद इसका सबसे बड़ा आयात है. देश में वनस्पति तेलों की खपत जिसमें ताड़ का तेल और सोयाइल शामिल है, बीते 20 वर्षों में तेजी से बढ़ी है.

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रेवेन्यू विभाग ने इस मामले में नोटिफिकेशन जारी किया है. इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि रिफाइंड ब्लीच्ड डियोडराइज्ड पामोलीन और रिफाइंड ब्लीच्ड डियोडराइज्ड पाम ऑयल पर 180 दिन के लिए सीमाशुल्क बढ़ाया जा रहा है.

व्यापार उपचार महानिदेशालय वाणिज्य विभाग ने सॉल्वेंट एस्ट्रेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) की शिकायत पर मलेशिया से आयात में कथित वृद्धि की जांच करने के बाद इस शुल्क बढ़ोत्तरी की सिफारिश की थी.

मलेशिया से पाम तेल का आयात भारत-मलेशिया वृहद आर्थिक सहयोग समझौते के तहत किया जाता है. इसके तहत कच्चे पाम तेल के आयात पर मौजूदा आयात शुल्क 40 प्रतिशत और रिफाइंड पाम तेल पर 45 प्रतिशत है.

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