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दोहरे कराधान जुड़े समझौते वाले देशों में रहने वाले भारतीयों को नहीं होगी दिक्कत

पिछले एक दशक में प्रवासी भारतीयों की बड़ी संख्या खाड़ी देशों में गई है. संयुक्त राज्य अरब अमीरात के साथ दोहरा कराधान है, लेकिन बहरीन जैसे देश के साथ ऐसा नहीं है.

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प्रवासी भारतीयों पर पड़ेगी टैक्स की मार (फाइल फोटो)
प्रवासी भारतीयों पर पड़ेगी टैक्स की मार (फाइल फोटो)

  • दूसरे देश में रेजिडेंशियल स्टेटस बदलते रहने वालों को टैक्स के दायरे में लाया जाएगा
  • जो विदेश में टैक्स नहीं दे रहे और भारत में कारोबार से जुड़े हैं उन्हें देना होगा टैक्स

बजट में उन प्रवासी भारतीयों पर टैक्स लगाने की बात कही गई है जो विदेश में टैक्स नहीं देते हैं, लेकिन वित्त मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने कहा है कि सरकार की मंशा सभी प्रवासी नागरिकों को देश के भीतर टैक्स के दायरे में लाने की नहीं है. यह टैक्स केवल उन लोगों पर लगाया जाएगा, जो एक देश से दूसरे देश में अपना रेजिडेंशियल स्टेटस बदलते रहते हैं.

साथ ही भारत की मौजूदा रेजिडेंशियल की तय सीमा का गलत इस्तेमाल कर रहे थे. जिन लोगों के पास भारत के साथ-साथ किसी और देश की नागरिकता है और उस देश के साथ दोहरे कराधान संबंधी समझौता तो ऐसे लोगों पर टैक्स की मार नहीं पड़ेगी, लेकिन जो लोग देश के बाहर केवल दिखावे के लिए टैक्स नहीं देने के लिए चले जाते हैं उन पर सरकार टैक्स लगाने जा रही है.

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संयुक्त राज्य अरब अमीरात के साथ दोहरा कराधान

पिछले एक दशक में प्रवासी भारतीयों की बड़ी संख्या खाड़ी देशों में गई है. संयुक्त राज्य अरब अमीरात के साथ दोहरा कराधान है, लेकिन बहरीन जैसे देश के साथ ऐसा नहीं है. ऐसे में उन भारतीय नागरिकों पर जो किसी तरह से भारत में कारोबार से जुड़े हैं या विदेश में टैक्स नहीं दे रहे हैं उनको आने वाले समय में टैक्स देना होगा. सरकार इस बारे में जल्द सफाई पेश करने वाली है.

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1 फरवरी 2020 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नियमों का एक सेट प्रस्तावित किया था, जिसके मुताबिक प्रवासी भारतीयों को अपनी वैश्विक कमाई पर टैक्स देना पड़ेगा. अगर वो विदेश में किसी टैक्स का भुगतान नहीं करते. सरकार ने 'डीम्ड रेजिडेंट' के विचार को जोड़ा है जिसमें भारत के हर नागरिक को 'डीम्ड रेजीडेंट' के तौर पर गिना जाएगा. अगर ये शख्स विदेश में कोई टैक्स नहीं देता तो भारत में उसे टैक्स भरना पड़ेगा.   

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जिनका भारत में कारोबार है उन्हें टैक्स के दायरे में रखा जाएगा

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वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया, 'सरकार ऐसे भारतीय नागरिकों को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है जो न तो भारत के नागरिक हैं और न ही किसी बाहरी देश के नागरिक हैं, बल्कि टैक्स बचाने के लिए दुनिया में घूमते रहते हैं. हमारा इरादा उन लोगों को टैक्स दायरे में लाने का है जिनका भारत में कारोबार है, लेकिन उन्होंने अपनी रिहाइश टैक्स हैवन देशों में बना रखी है.'

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मिसाल के तौर पर अगर एक शख्स भारत और यूएई, दोनों का रेजीडेंट हैं, तो उस पर DTT का ट्राई-ब्रेकर नियम लागू होगा. नियम कहता है अगर आमदनी का खासा हिस्सा दूसरे देश में कमाया जाता है और स्थायी प्रतिष्ठान भारत में है तो भी वो शख्स भारत के टैक्स दायरे से बाहर हो सकता है.

DTT देश में किसी भी टैक्स प्रावधान को ओवर-रूल कर सकता है. ट्राई ब्रेकर नियम उन मामलों में लागू होगा, जहां DTT पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. बहरीन से DTT नहीं है और बहरीन में रहने वाले हर प्रवासी भारतीय (NRI) को भारत में टैक्स भरना पड़ सकता है. 

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182 दिन से ज्यादा रहने पर भारतीय रेजीडेंट माना जाएगा

कई भारतीय, जिनमें से अधिकतर हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) जो भारत में 181 दिन से रह रहे हैं (182 अधिकतम सीमा है) और वो विदेश में कारोबार से धन अर्जित कर रहे हैं तो फिर प्रवासी भारतीय के नाते उन पर विदेशी आमदनी पर किसी तरह का टैक्स भरने की जिम्मेदारी नहीं होगी. अगर वो समय सीमा को लांघते हैं और 182 दिन से अधिक रहते हैं तो उन्हें फिर भारतीय रेजीडेंट ही माना जाएगा.

प्रवासी भारतीयों (NRI) के मूवमेंट और कारोबारी गतिविधियों की लंबे समय से जांच के बाद वित्त मंत्रालय ने पाया कि लोग इस दर्जे का विभिन्न तरीकों से दुरुपयोग कर रहे हैं. वित्त मंत्रालय का मानना है कि 182 दिन का मानक बहुत लंबा है. कुछ लोग अन्य किसी देश में भी कोई टैक्स नहीं भर रहे हैं.

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