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बजट भाषण में सीतारमण ने 3 बार नौकरी और एक बार किया रोजगार का जिक्र

इंडिया टुडे डाटा इंटेलिजेंस यूनिट ने वित्त मंत्री के भाषण का विश्लेषण किया और पाया कि चुनाव से पहले कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल के भाषण में जिस किसान को प्रमुखता मिली थी इस बार वो नदारद हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)

देश की पहली महिला वित्त मंत्री का पहला बजट आ गया है. अपने पहले बजट में निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया कि फिर से सत्ता में आयी मोदी सरकार के लिए निवेश सबसे बड़ा मुद्दा है. इंडिया टुडे डाटा इंटेलिजेंस यूनिट ने वित्त मंत्री के भाषण का विश्लेषण किया और पाया कि चुनाव से पहले कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल के भाषण में जिस किसान को प्रमुखता मिली थी इस बार वो नदारद हैं.

शब्दों का चयन – सीतारमण बनाम गोयल

इस बार जिन शब्दों को वित्त मंत्री के भाषण में प्रमुखता मिली वो हैं- निवेश जिसका जिक्र 27 बार किया गया. आधारभूत संरचना का 25, बैंक 24, विकास 19, टेक्नोलॉजी 17, पूंजी 17 और डिजिटल का 16 बार जिक्र आया.

कृषि से जुड़े किसी भी शब्द को प्रमुखता नहीं मिली. पिछली बार कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल के भाषण में वो सारे शब्द थे. पिछली बार पीयूष गोयल ने किसान 17, विकास 16, वृद्धि 15, जीएसटी 15, गरीब 14  का नाम लिया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था इस सरकार के कार्यकाल के पूरे होने तक 5 हजार करोड़ डॉलर को पार कर जाए.  इसलिए आधारभूत संरचना का विकास, देश में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने, बैंकिंग सेक्टर में बदलाव और नई तकनीक का इस्तेमाल बहुत जरूरी है. सीतारमण का भाषण भी इसी ओर इशारा करता है.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि ज्यादातर बार वो गरीब शब्द का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि निर्मला सीतारमण के भाषण में सिर्फ 1 बार गरीब शब्द बोला गया जबकि अंतरिम बजट में पीयूष गोयल ने 14 बार इसी शब्द का इस्तेमाल किया था.

बीजेपी को पिछले दिनों हिंदी भाषी तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से हाथ धोना पड़ा था. वहां किसान समस्या एक बड़ा मुद्दा था. हालांकि लोकसभा चुनावों में बीजेपी को यहां जबरदस्त जीत मिली.

 ये साफ दिखाता है कि चुनाव से पहले मोदी सरकार के लिए किसान पहली प्राथमिकता थे.चुनाव के बाद अब हालात ऐसे नहीं दिखते. इस बार वित्त मंत्री के भाषण में 9 बार किसान का जिक्र किया गया, जबकि गोयल के भाषण में ये संख्या 17 थी.

रोजगार पर अब भी जोर नहीं

चुनाव से पहले बेरोजगारी के आंकड़े लीक हो गए थे और उससे मोदी सरकार के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई थी. पीयूष गोयल के भाषण में रोजगार का 6 और नौकरी का 10 बार जिक्र हुआ था. जबकि निर्मला सीतारमण के भाषण में इसका जिक्र कम हुआ. पूरे भाषण में वित्त मंत्री सीतारमण ने सिर्फ 3 बार नौकरी का जिक्र किया जबकि रोजगार के बारे में 1 बार कहा.

नोट– इसमें आंकड़े थोड़े अलग हो सकते हैं, वित्तमंत्री के भाषण के उतने ही हिस्से का विश्लेषण किया गया है जिसे वित्त मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है.

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