दशकों से दुबई ने खुद को एक ऐसे 'सेफ हेवन' के रूप में बेचा है, जहां भू-राजनीतिक उथल-पुथल और युद्ध के शोर से दूर दुनिया भर का पैसा चैन की नींद सोता है. लेकिन, आज खाड़ी के बदलते समीकरण और ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने इस सुरक्षित माने जाने वाले निवेश के स्वर्ग की बुनियाद को हिलाना शुरू कर दिया है.
हालांकि भू-राजनीतिक जोखिमों की वजह से अक्सर कम समय के लिए अनिश्चितता पैदा होती है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट ने इतिहास में झटकों को सहने और उनसे जल्दी उबरने की क्षमता दिखाई है. एनारॉक ग्रुप (ANAROCK Group) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और रिसर्च हेड डॉ. प्रशांत ठाकुर ने कहा कि मौजूदा स्थिति को मार्केट की मजबूत बुनियाद के संदर्भ में देखने की जरूरत है. वो कहते हैं- "ईरान और खाड़ी के कुछ हिस्सों में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर दुबई के रियल एस्टेट मार्केट को चर्चा के केंद्र में ला दिया है."
उन्होंने आगे बताया, "यूएई (UAE) के कुछ हिस्सों में हमलों की खबरों के बीच, निवेशक स्वाभाविक रूप से यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या क्षेत्रीय अस्थिरता दुनिया के सबसे गतिशील प्रॉपर्टी मार्केट्स में से एक को पटरी से उतार सकती है."
ठाकुर ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन पुराने ट्रेंड्स बताते हैं कि इसका असर लंबे समय तक नहीं रहता. उनके अनुसार, "दुबई के रियल एस्टेट मार्केट ने ऐतिहासिक रूप से झटकों को झेलने और बहुत तेजी से वापसी करने की अद्भुत क्षमता दिखाई है."
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2025 में प्रॉपर्टी मार्केट का रिकॉर्ड प्रदर्शन
दुबई ने मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में बहुत ही मजबूत स्थिति के साथ कदम रखा है. एनारॉक (ANAROCK) के विश्लेषण के अनुसार, साल 2025 में दुबई में लगभग 917 अरब दिरहम (AED) के रियल एस्टेट सौदे दर्ज किए गए, जो लगभग 250 अरब डॉलर के बराबर है. यह शहर के इतिहास में प्रॉपर्टी डील्स की अब तक की सबसे बड़ी वैल्यू है.
साल के दौरान लेनदेन की संख्या 2,70,000 सौदों को पार कर गई, जो बाजार में निवेशकों की भारी भागीदारी और हाई लिक्विडिटी को दर्शाता है. इस ग्रोथ में आवासीय संपत्तियों ने मुख्य भूमिका निभाई. 2025 में करीब 2,00,000 रेजिडेंशियल ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड किए गए, जिनकी कुल वैल्यू करीब 538 अरब दिरहम रही.
पिछले कुछ सालों में प्रॉपर्टी की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया है. साल 2021 के बाद से, दुबई में आवासीय कीमतों में लगभग 60% से 75% तक की वृद्धि हुई है, जो इसे महामारी के बाद के दौर में वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत हाउसिंग साइकिल्स में से एक बनाता है.
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निवेशकों की धारणा पर सबसे पहले दिख सकता है असर
रिपोर्ट के अनुसार, जो बाजार पहले से ही तेजी से विस्तार कर रहे होते हैं, वे भू-राजनीतिक झटकों पर अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं. कीमतों में तत्काल गिरावट के बजाय, इसका पहला असर आमतौर पर लेनदेन की गतिविधियों में देखा जाता है, क्योंकि निवेशक सतर्क हो जाते हैं.
डॉ. प्रशांत ठाकुर ने कहा कि मौजूदा स्थिति एक नई चुनौती भी पेश करती है, उन्होंने बताया, "हालिया संघर्ष एक नया आयाम सामने लाया है. खुद दुबई पर हमले हुए हैं, जो मध्य पूर्व में एक सुरक्षित आर्थिक केंद्र के रूप में इसकी लंबे समय से चली आ रही प्रतिष्ठा की परीक्षा ले रहा है. हालांकि इन घटनाओं से भौतिक नुकसान सीमित रहा है, लेकिन वैश्विक निवेशकों पर इसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता."
दुबई का रियल एस्टेट मार्केट काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर निर्भर है. रिपोर्ट कहती है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की चिंता बढ़ाता है, तो खरीदार अस्थायी रूप से 'देखो और प्रतीक्षा करो' की नीति अपना सकते हैं. इस तरह के बदलाव आमतौर पर सबसे पहले ऑफ-प्लान खरीदारी और सट्टा निवेश को प्रभावित करते हैं, क्योंकि ये सेगमेंट पूरी तरह से निवेशकों के भरोसे और भविष्य की उम्मीदों पर टिके होते हैं.

टूरिज्म सेक्टर पर भी खतरा
मिडिल ईस्ट में हर साल पर्यटन से लगभग $367 बिलियन की कमाई होती है. अगर इलाके में युद्ध या तनाव लंबे समय तक चलता है, तो लोग यहां आने से डरेंगे और यात्रा कम हो जाएगी. जब पर्यटक कम आएंगे, तो इसका सीधा असर होटलों, किराये पर मिलने वाले अपार्टमेंट और बाजारों की दुकानों पर पड़ेगा, जिससे प्रॉपर्टी की वैल्यू भी प्रभावित हो सकती है.
अस्थिरता के कारण पर्यटकों की संख्या में 23 मिलियन से 38 मिलियन तक की कमी आ सकती है. इसके परिणामस्वरूप पर्यटन राजस्व में लगभग $34 बिलियन से $56 बिलियन का नुकसान हो सकता है. अगर ऐसा होता है, तो इसका सबसे गहरा असर शॉर्ट-टर्म रेंटल अपार्टमेंट, होटल संपत्तियों और उन रिटेल प्रॉपर्टीज पर पड़ सकता है जो पर्यटन क्षेत्रों में स्थित हैं.
हालांकि, दुबई में घरों की मांग केवल पर्यटन पर निर्भर नहीं है. वहां रहने वाली प्रवासियों की बड़ी आबादी लगातार आवासीय मांग को सहारा दे रही है.
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दुबई के रियल एस्टेट में भारतीय निवेशकों का दबदबा
दुबई की सबसे बड़ी ताकतों में से एक इसके निवेशकों की विविधता है. शहर के प्रॉपर्टी मार्केट में 150 से अधिक देशों के खरीदार हिस्सा लेते हैं, जो इसे दुनिया के सबसे अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट ईकोसिस्टम में से एक बनाता है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कुल आबादी में लगभग 88% से 89% प्रवासी हैं, जो विभिन्न बजट और श्रेणियों में घरों की एक बड़ी और निरंतर मांग पैदा करते हैं.
भारतीय निवेशकों की अहम भूमिका
दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट में भारतीय खरीदार सबसे महत्वपूर्ण निवेशक समूहों में से एक बने हुए हैं. एनारॉक (ANAROCK) के विश्लेषण के अनुसार, दुबई में विदेशी संपत्ति खरीद में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी लगभग 20% से 22% है, जो उन्हें विदेशी निवेशकों का सबसे बड़ा समूह बनाती है.
भारतीय डेवलपर्स का विस्तार
भारतीय मूल की कंपनियां भी दुबई में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही हैं. हालांकि, इस सेक्टर में अभी भी एमार (Emaar), दमैक (DAMAC), नखील (Nakheel) और मेरास (Meraas) जैसे स्थानीय डेवलपर्स का दबदबा है, लेकिन अनुमान है कि दुबई के कुल अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में भारतीय मूल की कंपनियों की हिस्सेदारी लगभग 8% से 10% है.
शोभा रियल्टी (Sobha Realty) और डेन्यूब प्रॉपर्टीज (Danube Properties) जैसी कंपनियों ने बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई है. इनके अलावा, शापूरजी पलोनजी रियल एस्टेट और कासाग्रैंड जैसे अन्य डेवलपर्स ने भी प्रीमियम प्रोजेक्ट्स के साथ दुबई के बाजार में कदम रखा है.
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पिछले दो दशकों में दुबई के रियल एस्टेट बाजार ने कई चुनौतीपूर्ण दौर देखे हैं, जहां 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान कीमतों में 50% से 60% की भारी गिरावट आई और रिकवरी में सात साल लग गए, वहीं 2014-2019 के बीच तेल की कीमतों में कमी के कारण भी बाजार में 30% तक का सुधार देखा गया. हालांकि, कोविड-19 महामारी के दौरान बाजार ने अपनी मजबूती साबित की और मात्र 18 महीनों में वापसी कर ली.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव के चलते निवेशक फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं, जिससे आने वाले समय में लेनदेन की गति थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन एक ग्लोबल लाइफस्टाइल हब के रूप में दुबई की पहचान, उसका विविध निवेशक आधार और लचीली नीतियां इसे एक ऐसा मजबूत ढांचागत समर्थन प्रदान करती हैं, जिससे बाजार के लंबी अवधि में स्थिर रहने की पूरी संभावना है.
(डिस्क्लेमर: इस लेख में विशेषज्ञों/ब्रोकरेज द्वारा व्यक्त किए गए विचार, राय, और सुझाव उनके अपने हैं और इंडिया टुडे ग्रुप के विचारों को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं, किसी भी वास्तविक निवेश या ट्रेडिंग का फैसला लेने से पहले एक योग्य ब्रोकर या वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की सलाह दी जाती है.)