ग्रैंड वेनिस मॉल धोखाधड़ी मामले में निवेशकों ने रियल एस्टेट प्रमोटर सतिंदर सिंह भसीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन को लेकर प्रमोटर के विरुद्ध आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की अर्जी दाखिल की है.
पहले ही कोर्ट ने भसीन की जमानत रद्द कर 50 करोड़ रुपये की ज़मानत राशि जब्त करने का आदेश दिया है. क्योंकि उन्होंने ज़मानत की शर्तों का पालन नहीं किया.
गैर-जमानती वारंट और लुकआउट सर्कुलर की मांग के बीच, कोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था. रियल एस्टेट के निवेशकों ने सुप्रीम कोर्ट में भसीन के खिलाफ एनबीडब्ल्यू और अवमानना कार्रवाई की मांग की अर्जी दी है. क्योंकि जमानत रद्द होने के बावजूद उन्होंने अब तक आत्मसमर्पण नहीं किया है.
निवेशकों ने सुप्रीम कोर्ट में तत्काल याचिकाएं दायर कर रियल एस्टेट प्रमोटर सतिंदर सिंह भसीन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. ग्रैंड वेनिस बायर्स एसोसिएशन की अर्जियों में कहा गया है कि भसीन ने 2 अप्रैल 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन नहीं किया. उसमें उन्हें सात दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था. इस बाबत 9 अप्रैल की तय समयसीमा भी बिना अनुपालन के गुजर चुकी है. इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इसे जानबूझकर और कोर्ट के आदेश की सोची-समझी अवहेलना बताया है.
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याचिका में यह भी कहा गया है कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय बढ़ाने की मांग खारिज किए जाने के बाद भी भसीन आत्मसमर्पण से बचते रहे. वो रिकॉल एप्लिकेशन सहित अन्य कानूनी उपायों का सहारा लेते रहे. आवेदकों के अनुसार, यह अदालत के आदेशों को टालने और उनसे बचने की एक सोची-समझी रणनीति है. आवेदन में कड़े शब्दों में कहा गया है कि ऐसा आचरण सुप्रीम कोर्ट की गरिमा के लिए सीधी चुनौती है.
भसीन पर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का आरोप
चेतावनी दी गई है कि अगर इस तरह की अवहेलना को अनदेखा किया गया, तो यह एक खतरनाक मिसाल बनेगी, जिससे पक्षकार प्रक्रिया संबंधी उपायों के जरिए अदालत के आदेशों से बच निकलेंगे. भसीन के पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया से बच निकलने की आशंका भी जताई गई है. .
याचिका में भसीन पर महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने का भी आरोप है. कहा गया है कि उन्होंने दिल्ली और गौतम बुद्ध नगर की अदालतों में लंबित कई एफआईआर और समानांतर मामलों का खुलासा नहीं किया, जो उनकी नीयत और पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है. यह मामला ग्रेटर नोएडा स्थित ‘ग्रैंड वेनेजिया’ प्रोजेक्ट के घर खरीदारों की शिकायतों से जुड़ा है, जिन्होंने धोखाधड़ी, धन के दुरुपयोग और आवंटन में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. भसीन को 2019 में सख्त शर्तों के साथ जमानत मिली थी, लेकिन उन शर्तों के पालन में विफल रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर आत्मसमर्पण का निर्देश दिया.
लगातार अवहेलना के मद्देनज़र याचिकाकर्ताओं ने गैर-जमानती वारंट जारी करने, अवमानना कार्यवाही शुरू करने और देश छोड़ने से रोकने के लिए लुकआउट सर्कुलर जारी करने की मांग की है. याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि बिना देरी भसीन को हिरासत में लिया जाए और उसके आदेशों की गरिमा बनाए रखी जाए. निवेशक लवलीन कौर भल्ला ने भी 2 अप्रैल के फैसले को तुरंत लागू कराने के लिए अर्जी दाखिल की है.
उनकी याचिका में भी आत्मसमर्पण सुनिश्चित करने और कथित जानबूझकर अवहेलना के मद्देनज़र अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है. इस महीने की शुरुआत में, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने भसीन की जमानत रद्द करते हुए कहा था कि उन्होंने नवंबर 2019 में जमानत देते समय तय की गई शर्तों का पालन नहीं किया. कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था. वर्तमान याचिकाएं अब इस आदेश के सख्त पालन की मांग कर रही हैं, क्योंकि अब तक उसका अनुपालन नहीं हुआ है.
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