भारत के बड़े शहरों में मेट्रो केवल लोगों को मंजिल पर पहुंचाने का जरिया नहीं रही, बल्कि यह लोगों की जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है. सुबह की भागदौड़ से लेकर देर शाम घर लौटने तक, मेट्रो ने न सिर्फ ट्रैफिक के तनाव को खत्म किया है, बल्कि लोगों को 'समय की दौलत' भी दी है. लेकिन मेट्रो का असर यहीं खत्म नहीं होता. आज के दौर में मेट्रो की पटरी जहां-जहां से गुजर रही है, वह अपने साथ न केवल विकास, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक समृद्धि भी ला रही है.
मेट्रो के पास प्रॉपर्टी की कीमतें कई गुना तेजी से बढ़ रही हैं. जिन लोगों ने ऐसे इलाकों में घर लिया था उन्हें मोटा मुनाफा भी मिल रहा है. साथ ही जिन शहरों में मेट्रो आने की घोषणा होती है, पहले ही उस इलाके में प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने लगते हैं.
मेट्रो के पास घर क्यों है बेहतर
मेट्रो के पास बसना अब स्टेटस सिंबल के साथ-साथ एक स्मार्ट फाइनेंशियल फैसला भी साबित हो रहा है.
देश के बड़े शहरों में मेट्रो ने न सिर्फ लोगों के सफर को आसान बनाया है बल्कि उनको आर्थिक रुप से भी मजबूत किया है. हाल ही में आई प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि मेट्रो के पास रहने वाले लोग न केवल समय बचा रहे हैं, बल्कि अपने बैंक लोन और ईएमआई को लेकर भी पहले से कहीं ज्यादा अनुशासित हुए हैं.
अक्सर माना जाता है कि बुनियादी ढांचे के विकास से केवल नौकरियां पैदा होती हैं, लेकिन यह रिपोर्ट एक अलग ही कहानी बयां करती है. रिपोर्ट के अनुसार, मेट्रो कनेक्टिविटी ने परिवारों के आर्थिक व्यवहार ' को बदल दिया है. मेट्रो कॉरिडोर के करीब रहने वाले लोग अब अपने होम लोन की किश्तें समय पर चुका रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग अपना कर्ज समय से पहले खत्म कर रहे हैं.
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क्यों कम हो रहा है लोन का बोझ?
रिपोर्ट में ये तर्क दिया गया था कि जब किसी इलाके में मेट्रो आती है, तो निजी वाहनों से आजादी से मिल जाती है, लोग कार या बाइक की जगह मेट्रो का उपयोग करने लगते हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की बचत होती है. गाड़ियों के रखरखाव पर होने वाला मोटा खर्च बच जाता है. यात्रा के खर्च में होने वाली इस बचत को मध्यमवर्गीय परिवार अपने सबसे बड़े वित्तीय बोझ यानी होम लोन को कम करने में लगा रहे हैं.
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