आम बजट के बाद से शेयर बाजार की चाल में जो रिवर्स गियर लगा है, उस पर ब्रेक लगता नहीं दिख रहा है. सरकार की ओर से लगातार अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए घोषणाएं हो रही हैं. लेकिन उसका असर कुछ दिन में ही बेअसर हो जा रहा है. पिछले हफ्ते वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का बड़ा ऐलान किया. लगा कि इस ऐलान से स्थिति बदल जाएगी. लेकिन दो दिन बाद ही फिर से शेयर बाजार पस्त हो गया.
दरअसल कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के ऐलान के बाद दो दिन तक शेयर बाजार में बढ़त देखने को मिली. लेकिन तीसरे दिन बाजार फिर पहले की तरह दबाव में आ गया. बीते शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का ऐलान किया, और जिससे उस दिन सेंसेक्स 2000 अंक से ज्यादा उछल गया.
सोमवार को भी बाजार में कॉरपोरेट टैक्स की वजह से बढ़त देखी गई. लेकिन मंगलवार को फिर बाजार में दबाव हावी हो गया. उसके बाद बुधवार यानी 25 सितंबर को बाजार सुबह लाल निशान के साथ खुला और बंद होते-होते सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक लुढ़क गया.
सोमवार को 1,000 अंकों से अधिक उछाल के बाद बुधवार को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. बीएसई का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 503.62 अंक (1.29%) लुढ़ककर 38,593.52 पर बंद हुआ. एनएसई का निफ्टी 148.00 अंकों (1.28%) की गिरावट के साथ 11,440.20 पर बंद हुआ. (Photo: Getty)
आखिर क्यों आई गिरावट?
- बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलचल है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है. इस खबर के बाद अमेरिकी बाजार में अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया है. अमेरिका की सियासी सरगर्मी की वजह से भारत समेत एशियाई बाजारों में हलचल मच गई है. यहां बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप पर संवैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप है. हालांकि ट्रंप ने आरोपों से इनकार किया है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी इतिहास में मुझसे बुरा बर्ताव किसी दूसरे राष्ट्रपति के साथ नहीं किया गया है.
- भारतीय शेयर बाजार में गिरावट की एक अन्य वजह एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की ताजा रिपोर्ट है. एडीबी ने लगातार चौथी बार जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है. एडीबी रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.50 फीसदी रहने का अनुमान है. एडीबी ने इसके साथ ही भारत में अनिश्चितता के माहौल का भी जिक्र किया है.
- इसके अलावा मुनाफावसूली की वजह से भी बाजार में गिरावट देखने को मिली है. बाजार के एक्सपर्ट कहते हैं कि शुक्रवार और सोमवार की तेजी के बाद अब आगे स्थिर माहौल होने की आशंका में निवेशकों ने शेयर बेचने शुरू कर दिए हैं.
बता दें, बजट से पहले शेयर बाजार में शानदार रौनक थी.
लेकिन उसके बाद से जो गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ, वो थमने का नाम नहीं ले
रहा है. 5 जुलाई (बजट के दिन) से बीते गुरुवार तक सेंसेक्स में 4 हजार से
ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी. बजट के दिन 5 जुलाई को सेंसेक्स ने
40 हजार के आंकड़े को भी पार कर लिया था.
दरअसल प्रचंड जीत के साथ मोदी सरकार की सत्ता में वापसी हुई थी, जिसका शेयर बाजार ने भी शानदार तरीके से स्वागत किया था. क्योंकि शेयर बाजार को सरकार से बजट में खासी उम्मीदें थीं. लेकिन बजट के बाद से बाजार की चाल में रिवर्स गियर लग गया है.
इस बीच लगातार स्टॉक मार्केट के लाल निशान ने निवेशकों को डरा दिया है. निवेशक अब बाजार में पैसा लगाने से बच रहे हैं. अगर सेक्टर की बात करें तो बैंकिंग, रियल एस्टेट, एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर का सबसे बुरा हाल है. अब तक निवेशकों के शेयर बाजार में करोड़ों रुपये स्वाहा हो चुका है.
हालांकि हालात को काबू में करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. लेकिन लगता है कि शेयर बाजार को सरकार से जो उम्मीदें हैं वो पूरी नहीं हो पा रही है. अब तक कॉरपोरेट टैक्स में कटौती का असर खत्म होता दिख रहा है. ऐसे में सरकार के लिए भी यह चिंता का विषय है कि आखिर बाजार में ठहराव अब कैसे लाया जाए. (Photo: Getty)
सरकार की ओर से करीब-करीब हर हफ्ते अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए ऐलान किए जा रहे हैं. लेकिन इस बीच अब मंदी की आहट ने लोगों को डरा दिया है. अगर फेस्टिव सीजन के दौरान भी शेयर बाजार में रौनक नहीं लौटी, तो फिर यह खतरे की घंटी होगी. (Photo: Getty)