इंग्लैंड के पूर्वी इलाके में मधुमक्खियों की प्रजातियां लगातार विलुप्त हो रही हैं. मधुमक्खियों की घटती प्रजातियों की वजह से ब्रिटेन को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है. दरअसल वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिटेन में मधुमक्खियों की 17 प्रजातियां विलुप्त घोषित कर दी गई हैं. इनमें ग्रेट यलो बंबल बी और पॉटर फ्लावर बी जैसी दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं.
इंग्लैंड के पूर्वी हिस्से को मधुमक्खी पालन के लिए सबसे बेहतर इलाका माना जाता है. इंग्लैंड का पूर्वी इलाका लंदन के करीब है. लंदन के 90 फीसदी जंगली पौधे और 75 फीसदी मुख्य फल परागण पर निर्भर है, यहां की अर्थव्यवस्था में सालाना मधुमक्खियों से जुड़े कारोबार से 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक का योगदान है. लेकिन मधुमक्खियों की प्रजातियां लगातार खत्म होने से इस जुड़े अर्थव्यवस्था पर अब खतरा मंडराने लगा है.
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की चीफ एग्जीक्यूटिव तान्या स्टील की मानें तो लंदन दुनिया के उन देशों में से है, जहां प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे मधुमक्खी की कई अहम प्रजातियां लगातार विलुप्त हो रही हैं. इसके अलावा परागण करने वाली बहुमूल्य जीव खतरे में हैं. लंदन के साथ-साथ दुनियाभर में इनकी संख्या में तेजी से कमी आ रही है.
इस रिपोर्ट में मधुमक्खियों की 228 प्रजातियों के आंकड़ों पर रिसर्च किया गया है. शोधकर्ताओं ने मधुमक्खियों के विलुप्त होने के पीछे मधुमक्खियों के रहने की जगह खत्म होना, पेड़-पौधों पर कीटनाशकों का बेतहाशा प्रयोग और प्रदूषण वजहें गिनाईं. मधुमक्खियों की संख्या में कमी उपभोक्ता से लेकर किसान तक को प्रभावित करेगी.
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर की रिपोर्ट में कहा गया है कि मधुमक्खियों की कमी की वजह से सबसे ज्यादा असर सेब के उत्पादन पर पड़ेगा. शोधकर्ताओं का कहना है ब्रिटेन में सेब का उत्पादन तभी बेहतर होगा, जब इनकी संख्या पर्याप्त होगी और सेहतमंद होंगी.
यही नहीं, रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि मधुमक्खियों की 17 प्रजातियां खत्म होने के बाद अब 25 ऐसी मधुमक्खियां हैं, जिनका अस्तित्व खतरे में है. इसकी वजह जलवायु परिवर्तन, रहने के लिए जगह कम होना और इनमें होने वाली बीमारियां भी बताई गई हैं.
वहीं एक और रिसर्च में पाया गया है कि कई दुर्लभ और खास तरह की मधुमक्खियां जीने के लिए संघर्ष कर रही हैं. तापमान में लगातार बढ़ोतरी से इनकी मुश्किलें बढ़ रही हैं. इनमें से 6 प्रजाति ऐसी हैं, जो अधिक खतरा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार को इसे बचाने के लिए जल्द और सार्थक कदम उठाने की जरूरत है.