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एक तरफ रूस दूसरी तरफ अमेरिका, जानें- भारत किससे खरीदता है ज्यादा हथियार

Modi-Putin Meeting Update: आज की तारीख में आर्थिक तौर पर भारत रूस से ज्यादा अमेरिका के करीब पहुंच गया है. हालांकि भारत चाहता है कि उसके रिश्ते दोनों के साथ बेहतर बना रहे. क्योंकि रूस भारत का उस दौर से साथी है, जब अमेरिका उसके खिलाफ था.

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व्लादिमीर पुतिन से पीएम मोदी की मुलाकात व्लादिमीर पुतिन से पीएम मोदी की मुलाकात
स्टोरी हाइलाइट्स
  • व्लादिमीर पुतिन ने पीएम मोदी से की मुलाकात
  • रक्षा और व्यापार क्षेत्र में साथ काम करने पर सहमति

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भारत के दौरे पर हैं. आर्थिक परिदृश्य से भी पुतिन का यह भारत दौरा बेहद अहम है. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और पुतिन एक साथ बैठे नजर आए तो दुनियाभर में इसका एक अलग संदेश गया होगा. दोनों देशों के मजबूत रिश्तों को एक नया आयाम मिलेगा. पुतिन और पीएम मोदी के बीच इससे पहले अक्टूबर 2018 में मुलाकात हुई थी.

Modi-Putin Meeting Update: दरअसल, रूस और अमेरिका (America) दोनों अपने आप सुपरपावर्स हैं. लेकिन आज की तारीख में आर्थिक तौर पर भारत रूस से ज्यादा अमेरिका के करीब पहुंच गया है. हालांकि भारत चाहता है कि उसके रिश्ते दोनों के साथ बेहतर बना रहे. क्योंकि रूस भारत का उस दौर से साथी है, जब अमेरिका उसके खिलाफ था. ऐसे में भारत के लिए दोनों महत्वपूर्ण है. 

पुतिन की यात्रा पर अमेरिका की नजर

खबर है कि रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत को एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम (Defence System) का मॉडल सौंपने वाले हैं. ये वही मिसाइल्स हैं जिनके चलते भारत पर अमेरिका के प्रतिबंधों का खतरा मंडरा रहा है. हालांकि भारत सिर्फ एस-400 मिसाइल्स ही नहीं बल्कि इसके अलावा एके-203 राइफल्स को लेकर भी 5100 करोड़ का बड़ा कॉन्ट्रेक्ट भी रूस के साथ कर सकता है. 

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कॉन्ट्रेक्ट से भारतीय सेना को 7.5 लाख राइफल्स मिलने की उम्मीद हैं और ये राइफल्स तीस साल पुरानी आईएनएसएएस राइफल्स की जगह ले सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों ही देश इग्ला-एस शॉल्डर फायर्ड मिसाइल पर भी चर्चा कर सकते हैं. दोनों देशों ने महामारी के दौरान वैक्सीन के परीक्षण और उत्पादन से लेकर, नागरिकों के संबंधित देशों में लौटने को लेकर मजबूती से सहयोग किया. 

रूस के साथ व्यापार बढ़ाने पर भारत का फोकस 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि रूस के साथ आर्थिक मामलों में अपनी साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं. सरकार ने 2025 तक 30 अरब डॉलर के व्यापार और 50 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है. उन्होंने कहा कि 'मेक इन इंडिया' के तहत, सह-विकास और सह-उत्पादन रक्षा क्षेत्र में हमारी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं. 

भारत और रूस के बीच हुई कलाश्निकोव सीरीज स्मॉल आर्म्स मैन्युफैक्चरिंग डील के तहत भारत में 6 लाख से ज्यादा AK-203 राइफल्स का निर्माण किया जाएगा. इसके अलावा रूस से 70,000 राइफलें खरीदी जाएंगी, जिसके लिए अगस्त में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे. इसके साथ ही साल 2021-2031 से दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग कार्यक्रम पर समझौता हुआ है.  

भारत में सबसे ज्यादा रूसी हथियार

एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास जो हथियार हैं, उसमें से 86 फीसदी हथियार रूसी मूल के हैं. साल 2014 से लेकर अब तक भारत के करीब 55 फीसदी डिफेंस इंपोर्ट्स रूस से हैं. कहोम स्थित SIPRI की डेटा को मानें तो 2014 के बाद यानी मोदी सरकार आने के बाद भी, रूस ही भारत का सबसे ज्यादा डिफेंस सप्लायर है. उसने भारत को 9.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के हथियारों का निर्यात किया है. हालांकि इस दौरान अमेरिका से 2.3 बिलियन डॉलर के डिफेंस प्रोडक्ट खरीद गए. 

प्रधामनंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहतरीन रिश्ते रहे हैं. अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कॉरपोरेशन एजेंसी (DSCA) की मानें ट्रंप कार्यकाल के अंतिम साल में भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस कारोबार बढ़ा था. 

SIPRI की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016-20 के दौरान भारत के शीर्ष तीन हथियार आपूर्तिकर्ता में रूस 49% के साथ नंबर-1 पर रहा, उसके बाद फ्रांस का 18% और इजराइल का 13% हिस्सा रहा. हालांकि दुनियाभर में सबसे बड़े हथियार सप्लायर्स की लिस्ट में अमेरिका नंबर-1 पर है. साल 2016-20 के दौरान पांच सबसे बड़े हथियार निर्यातकों में अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी और चीन था. जबकि शीर्ष आयातकों में सऊदी अरब, भारत, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया और चीन रहा. 

 

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