
माइनिंग व मेटल बिजनेस (Mining And Metal Business) का बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले वेदांता ग्रुप के चेयरमैन (Vedanta Group Chairman) अनिल अग्रवाल सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वो युवाओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अपने अनुभव या कोई घटना शेयर करते रहते हैं. आज एक बार फिर से उन्होंने युवा एंटरप्रेन्योर्स को शानदार सलाह दी है. उन्होंने एंटरप्रेन्योर्स से दो चीजों को अपने बिजनेस में अप्लाई करने को कहा है.
एंटरप्रेन्योर्स को दी सलाह
उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि अक्सर एंटरप्रेन्योर्स मुझसे पूछते हैं कि वे अपने बिजनेस को कैसे आगे बढ़ाएं? मैं उन्हें केवल दो सलाह देता हूं. पहला कि अपने युवा टैलेंट को मजबूत बनाएं और दूसरा ये कि स्थानीय लोगों को बिजनेस चलाने की आजादी दें. इस दौरान अनिल अग्रवाल ने एक किस्से का भी जिक्र किया.
उन्होंने लिखा- 'साल 1990 में मुझे एक अन्य कंपनी के दिवालिया होने के बारे में पता चला. कंपनी का नाम कॉपर माइंस ऑफ तस्मानिया था, जो ऑस्ट्रेलिया में थी. मैं भारत से वहां यह देखने के लिए पहुंचा कि क्या मैं इसे खरीद सकता हूं. मुझे यह सुझाव दिया गया कि ये सौदा जोखिम भरा हो सकता है. मगर मेरा भरोसा बहुत मजबूत था.'
अच्छी अंग्रेजी नहीं आती थी
मुझे याद है कि इस सौदे को पूरा करने के लिए मैं तस्मानिया के प्रधानमंत्री से मिलने गया. मैंने नमस्कार के साथ उनका अभिवादन किया और उन्हें अपनी योजना के बारे में बताया. हालांकि, मुझे बहुत अच्छी अंग्रेजी नहीं आती थी लेकिन उन्हें समझाने के लिए मेरे पास मिट्टी और माइनिंग के बारे में काफी ज्ञान था. उन्होंने मुझे प्लांट देने का फैसला किया. हमने ये सौदा 25 लाख डॉलर में तय किया.
पहला काम
अग्रवाल बताते हैं कि प्लांट को खरीदने के बाद मैंने दो काम किए. पहला- मैंने प्लांट के जनरल मैनेजर को ही कंपनी का प्रमुख बनाया. मैंने उस युवा लड़के को अपने तरीके से काम करने की आजादी दी. जिस लगन और समर्पण के साथ उसने काम किया, वैसी लगन मुझे कंपनी के किसी भी टॉप अधिकारी में नजर नहीं आया. वह कंपनी को नई ऊंचाईयों पर ले गया. मैंने पाया कि उनको बस पंख देने की देर है, उड़ के आसमान को वो खुद छू लेंगे.

दूसरा काम
दूसरा- मैंने सीनियर लीडरशिप में केवल 3 लोगों के साथ कंपनी का आकार घटा दिया. बाकी कंपनी का पूरा कामकाज स्थानीय लोगों को सौंप दिया. जैसे दूध में चीनी मिलाओ तो उसकी मिठास बढ़ जाती है, बिल्कुल वैसे ही, जब आप अपने घर से दूर पराये देश में अपना व्यापार स्थापित करते हैं, तो आपको बेहतर परिणाम के लिए स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम करना होगा.
पहले साल में हमने लगभग 2.5 करोड़ डॉलर का प्रॉफिट बनाया और हम लगातार 10 वर्षों तक मुनाफा कमाते रहे. हमने स्थानीय लोगों पर कंपनी चलाने के लिए भरोसा किया और युवा प्रतिभाओं को आजादी दी. ऑस्ट्रेलिया में हमारी सफलता ने सब कुछ बदल दिया. इसने आगे की बढ़ोतरी का रास्ता खोल दिया.
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में रखा कदम
Social Media पर खासे सक्रिय रहने वाले बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) आए दिन अपने करियर की यात्राओं और उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से शेयर करते रहते हैं. आने वाले समय में अनिल अग्रवाल भारत को सेमीकंडक्टर (Semiconductor) के मामले में आत्मनिर्भर (Aatmanirbhar Bharat) बनाने में योगदान देने वाले हैं.