अमेरिका के वेनेजुएला (US Vs Venezuela) में स्ट्राइक की और सैन्य अभियान के दौरान वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro), उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की गिरफ्तारी की गई. डोनाल्ड ट्रंप के मादुरो पर इस एक्शन ने दुनिया में टेंशन बढ़ा दी है. ट्रंप ने इस कार्रवाई के बाद साफ कर दिया कि अमेरिकी तेल कंपनियां वहां पर एंट्री करेंगी और अरबों डॉलर का निवेश करेंगी. मतलब Venezuea Oil Sector पर अमेरिकी कंट्रोल होगा. अमेरिका के इस कदम को भू-रणनीतिज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company)जैसा करार दिया है, उन्होंने कहा कि ये कार्रवाई साम्राज्यवादी इतिहास की याद दिलाती है.
ईस्ट इंडिया कंपनी से की तुलना
Brahma Chellaney के मुताबिक, वेनेजुएला में अमेरिका की स्ट्राइक और सैन्य कार्रवाई, जिसमें वाशिंगटन ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को ड्रग्स की तस्करी के आरोपों में गिरफ्तार किया और न्यूयॉर्क (New York) ले जाया गया, ठीक साम्राज्यवादी इतिहास की याद ताजा करती है. चेलानी ने इस पूरी घटना की तुलना ब्रिटिश की ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उप-महाद्वीप पर किए गए कब्जे से की है.
उन्होंने कहा कि वाशिंगटन (Washington) के कंट्रोल में होने के कारण वेनेजुएला अमेरिकी अधीनता की ओर बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का प्रमुख बिंदु Donald Trump को दुनिया के सबसे बड़े प्रूव्ड ऑयल रिजर्व तक पहुंच प्रदान करना है, जो अनुमानित 303 अरब बैरल का है.
'US का गुलाम बनने की ओर वेनेजुएला'
भू-रणनीतिज्ञ ब्रह्मा चेलानी चेलानी ने आगे कहा कि अमेरिकी की वेनेजुएला में इस कार्रवाई का मॉडल साम्राज्यवादी इतिहास की याद दिलाता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह ब्रिटेन (Britain) की ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित किया (जो उस समय दुनिया की टॉप इकोनॉमी थी) और ब्रिटेन ने इसे पूर्ण प्रभुत्व में बदलकर भारत की संपत्ति और संसाधनों को लूटा था.
Venezuela now appears headed for U.S. vassalage. As The New York Times puts it, “The U.S. will provide a vision for how Venezuela should be run and will expect the interim government to carry that out during a transition period, under the threat of further military intervention.”…
— Dr. Brahma Chellaney (@Chellaney) January 5, 2026
चेलानी ने कहा कि,'ऐसा लगता है वेनेज़ुएला अब US के गुलाम बनने की ओर बढ़ रहा है. न्यूयॉर्क टाइम्स में भी बताया गया है कि जैसा कि ट्रंप ने खुद साफ-साफ कह दिया है कि Venezuela का अंतरिम लीडर तभी तक सत्ता में रहेगा जब तक वह वही करेगा जो हम चाहते हैं.'
वेनेजुएला और तेल का भंडार
लंदन स्थित एनर्जी इंस्टीट्यूट के अनुसार, वेनेजुएला के पास जितना तेल का भंडार है, वो दुनिया के ज्ञात ऑयल रिजर्वों का करीब 17% है. इस प्रकार यह ओपेक (OPEC) मेंबर्स में सऊदी अरब से भी आगे है.लेकिन, इस खजाने के होने के बावजूद वेनेजुएला का कच्चा तेल उत्पादन (Crude Oil Production) अपनी क्षमता से काफी कम है. इसकी वजह लगातार देश में मिसमैनेजमेंट, सीमित निवेश और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हैं.
वेनेजुएला में 1970 के दशक में कच्चे तेल का उत्पादन अपने चरम पर था और ये लगभग 35 लाख बैरल प्रति दिन था.लेकिन, 2010 के दशक तक दैनिक क्रूड उत्पादन 20 लाख बैरल से नीचे गिर गया था. जबकि पिछले वर्ष 2025 में ये औसत 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया. Venezuela की परिचालन से जुड़ी परेशानियां बिजली की अनियमित आपूर्ति से और भी अधिक बढ़ गई हैं, जिससे माइनिंग और ऑयल एक्टिविटीज अक्सर बाधित होती रही हैं.
तेल के साथ यहां भी ट्रंप की नजर
ट्रंप ने ऐसे ही Venezuela पर एक्शन नहीं लिया है, बल्कि उनकी नजर देश के अन्य खनिज संपदाओं पर भी है. सरकारी रिपोर्ट्स की मानें, तो कोयले (अनुमानित 3 अरब मीट्रिक टन), निकेल (407,885 मीट्रिक टन) के भंडार वहां पर हैं. इसके साथ ही सोना (Gold), लौह अयस्क और बॉक्साइट (Bauxite) के अनुमानित भंडार भी बताए गए हैं.