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Iran War Impact: संकट में ₹18500Cr का कारोबार... ईरान युद्ध का बुरा असर, इस सेक्टर की बढ़ी टेंशन

Iran War से भारत के जेम्स एंड ज्वेलरी बिजनेस पर असर पड़ता दिख रहा है. जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) ने कहा है कि मार्च में इस युद्ध के चलते व्यापार का 20% हिस्सा प्रभावित हो सकता है.

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जेम्स-ज्वेलरी बिजनेस पर ईरान युद्ध का बुरा असर. (Photo: Reuters)
जेम्स-ज्वेलरी बिजनेस पर ईरान युद्ध का बुरा असर. (Photo: Reuters)

अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान युद्ध (US-Israel Iran War) का असर शेयर बाजारों से लेकर तेल-गैस की किल्लत के रूप में दिख रहा है. इसके अलावा अन्य कई सेक्टर्स भी इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. भारत का जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट भी सहमा हुआ है और नुकसान की चिंता बढ़ गई है. जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से 2 अरब डॉलर (करीब 18500 करोड़ रुपये) मूल्य के रत्नों और आभूषणों के निर्यात पर असर पड़ सकता है. 

'हम इसे डायवर्ट नहीं कर सकते'
GJEPC के मुताबिक, मार्च में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध से बढ़े पश्चिम एशिया में संकट के कारण रत्नों और आभूषणों के व्यापार का 20% हिस्सा प्रभावित होगा. काउंसिल के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर सब्यसाची रे का कहना है कि युद्ध से जो उस 2 अरब डॉलर का कारोबार प्रभावित होता दिख रहा है, हम तमाम कोशिशें करके करीब 800 मिलियन डॉलर के सामान को डायवर्ट कर सकते हैं, लेकिन 1.2 अरब डॉलर को हम कहीं भी डायवर्ट नहीं कर सकते.

भारत का बड़ा है निर्यात 
भारत ने FY2025 में 29 अरब डॉलर मूल्य के रत्न और आभूषणों का निर्यात किया था और सबसे बड़ा बाजार अमेरिका था, जहां से 9.24 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट किया गया था. इसके बाद दूसरे नंबर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का स्थान रहा था और निर्यात का आंकड़ा 7.87 अरब डॉलर था. हालांकि, पिछले साल अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (US Tariff) के बाद UAE रत्न और आभूषणों के लिए भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार बनकर उभरा था, जिसने चालू वित्त वर्ष में अब तक 8.33 अरब डॉलर का आयात किया है.

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युद्ध की जद में दुबई, तो बढ़ी चिंता 
सब्यसाची रे का कहना है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से  दुबई (Dubai) के प्रभावित होने से भारत से किए जाने वाले निर्यात पर असर होगा. उन्होंने कहा कि दुबई मुख्य रूप से वही सामान लेता है, जो हम भारत में बेचते हैं यानी भारी सोने के आभूषण (Gold Jewellery), जिन्हें आप कहीं और नहीं बेच या भेज सकते. इस सेक्टर के लिए दुबई पूरे पश्चिम एशिया के लिए एक सेंटर के रूप में काम करता है. भारतीय रत्नों और आभूषणों की खेप खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) में वितरित होने से पहले दुबई ही पहुंचती है.

टेंशन की ये बड़ी वजह
दरअसल, अन्य कारोबारों के विपरीत जहां पानी के जहाज परिवहन का मुख्य माध्यम है, जेम्स एंड ज्वेलरी का व्यापार ज्यादातर हवाई मार्ग से होता है. लेकिन US-Israel Vs Iran War के चलते खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और हमलों के चलते हवाई अड्डों के बार-बार बंद होने से इस उद्योग की मुश्किलें और बढ़ रही हैं. 

रे की मानें, तो Dubai में हमारे ज्वेलर्स को कतर और सऊदी अरब में माल भेजने में दिक्कतें आ रही हैं. ईरान समेत सभी GCC खरीदार दुबई में खरीदारी करने आते थे और यही नहीं उत्तरी अफ्रीका के ग्राहक भी यहां पहुंचते थे. अब यह सब पूरी तरह बंद हो गया है, पर्यटक नहीं आ रहे हैं. हमलों से ग्राहकों का भरोसा डगमगा गया है.

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