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टैक्सफ्री नहीं है Gift में मिला सोना, इससे ज्यादा हुई वैल्यू तो देना पड़ेगा Tax

कुछ मामलों में गिफ्ट में मिला सोना टैक्सफ्री होता है. परिवार के सदस्यों से शादी, सालगिरह या जन्मदिन जैसे मौकों पर गिफ्ट में मिले सोने के गहने टैक्सफ्री होते हैं. एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत में मिलने वाले सोने के गहनों के ऊपर भी टैक्स की देनदारी नहीं बनती है.

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बनती है टैक्स की देनदारी बनती है टैक्स की देनदारी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गिफ्ट में मिले सोने के गहनों पर बनती है टैक्स देनदारी
  • मां-बाप से मिला सोना भी हमेशा के लिए टैक्सफ्री नहीं

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां सोने की खपत काफी ज्यादा है. परंपरागत तौर पर सोने से बने गहने भारतीयों की पसंद रहे हैं. हाल के दिनों में यह निवेश का माध्यम भी बनकर उभरा है. पिछले साल कोरोना महामारी के असर के बाद भी भारतीयों ने सोने की रिकॉर्ड खरीदारी की और गोल्ड इम्पोर्ट (Gold Import) का 10 साल से अधिक समय का हाई बन गया. शादी-विवाह और जन्मदिन जैसे मौकों पर करीबी लोगों को गिफ्ट देने के लिए भी लोग सोने के गहनों को सबसे ज्यादा तरजीह देते हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि गिफ्ट में दिए गए ऐसे गहने टैक्सफ्री (Taxfree) नहीं होते. एक लिमिट के बाद इनके ऊपर भी टैक्स की देनदारी (Tax On Gift) बनती है और नहीं देने पर कर चोरी करने का मामला बन जाता है.

इन मामलों में ही टैक्सफ्री हैं गोल्ड गिफ्ट

टैक्स से जुड़े मामलों में सुझाव व समाधान देने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म Clear Tax के फाउंडर-सीईओ अर्चित गुप्ता ने बताया कि कुछ मामलों में गिफ्ट में मिला सोना टैक्सफ्री होता है. परिवार के सदस्यों से शादी, सालगिरह या जन्मदिन जैसे मौकों पर गिफ्ट में मिले सोने के गहने टैक्सफ्री होते हैं. एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को विरासत में मिलने वाले सोने के गहनों के ऊपर भी टैक्स की देनदारी नहीं बनती है. इन मामलों में गहनों की कीमत या मात्रा की लिमिट नहीं है. हालांकि बाद में अगर आप कभी इन गहनों को बेचते हैं तो आपके ऊपर टैक्स की देनदारी बन जाती है.

ऐसे होता है गिफ्ट पर टैक्स का कलकुलेशन

गुप्ता ने बताया कि ऐसे मामलों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की देनदारी बनती है. कैपिटल गेन टैक्स की गणना करने के लिए होल्डिंग पीरियड को आधार बनाया जाता है. होल्डिंग पीरियड को उस दिन से नहीं गिना जाता है, जिस दिन आपको गिफ्ट मिला था. आपको गिफ्ट देने वाले परिजन ने जिस दिन सोना खरीदा था, इसे उसी दिन से गिना जाता है. उदाहरण के लिए आपकी शादी पर आपकी मां ने सोने के गहने गिफ्ट किए. उन्हें ये गहने उनकी शादी पर उनके पिता यानी आपके नाना से मिले थे. अगर आपके नाना ने अपने जमाने में इन गहनों को एक लाख रुपये में खरीदा था, तो कैपिटल गेन तय करने के लिए इन गहनों की शुरुआती कीमत एक लाख रुपये मानी जाएगी. इसके बाद गहनों के अभी के मूल्य में एक लाख रुपये घटाकर कैपिटल गेन निकाला जाएगा, जिसके ऊपर टैक्स की देनदारी बनेगी.

इससे ज्यादा के हुए गिफ्ट, तो देना होगा टैक्स

Clear Tax के फाउंडर बताते हैं कि शादी पर मिले सारे गिफ्ट भी टैक्सफ्री नहीं होते हैं. परिवार से बाहर के लोगों से मिलने वाले गिफ्ट एक सीमा तक ही टैक्स से मुक्त होते हैं. किसी एक कर आकलन वर्ष के दौरान 50 हजार रुपये तक के गिफ्ट ही टैक्सफ्री होते हैं. यदि आपको किसी एक साल में 50 हजार रुपये से अधिक कीमत के गिफ्ट मिलते हैं, तो इनके ऊपर टैक्स की देनदारी बन जाती है. सभी गिफ्ट की वैल्यू मिलाकर यदि 50 हजार रुपये से अधिक हो गई तो टैक्स की देनदारी पूरी वैल्यू पर बनती है.

इससे कम होल्डिंग पीरियड पर लगेगा अलग टैक्स

कैपिटल गेन टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि होल्डिंग पीरियड कितनी है. अगर होल्डिंग पीरियड 36 महीने से अधिक है तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (Long Term Capital Gain Tax) लगेगा, जो 20 प्रतिशत है. होल्डिंग पीरियड 36 महीने से कम होने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स (Short Term Capital Gain Tax) लगेगा. इसकी दर तय करने के लिए गहने बेचने से मिली राशि को आपकी कुल आय में जोड़ा जाएगा. इसके बाद आपकी आय जिस टैक्स स्लैब में आती है, उसी के हिसाब से टैक्स की दर का निर्धारण होगा.

टैक्स सेविंग के ये हैं उपाय

कर नियमों में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से बचने के भी कुछ प्रावधान किए गए हैं. आयकर अधिनियम की धारा 54एफ (IT Act Section 54F) के तहत ये प्रावधान किए गए हैं. अगर आप गहनों को बेचने से प्राप्त रकम का इस्तेमाल घर बनाने या खरीदने में करते हैं, तो इस सूरत में आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिल जाती है.

 

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