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कोरोना की दूसरी लहर के बावजूद निजीकरण लक्ष्य से पीछे नहीं हटेगी सरकार: निर्मला 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सब कुछ सही दिशा में चल रहा है. विनिवेश कार्यक्रम पटरी पर चल रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की जो योजनाएं हैं, उनसे कोरोना की दूसरी लहर से प्रभावित किसानों, बेरोजगारों और अनाथ हुए बच्चों को मदद मिलेगी. 

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई मसलों पर बात की (फोटो: बंदीप सिंह) वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई मसलों पर बात की (फोटो: बंदीप सिंह)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सरकार की विनिवेश योजना पटरी पर है: FM
  • BPCL, एअर इंडिया पर भी कोई संशय नहीं

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कोरोना की दूसरी लहर से इकोनॉमी के सामने आने वाली चुनौतियों के बावजूद सरकार विनिवेश और निजीकरण के अपने लक्ष्य को लेकर अडिग है. उन्होंने कहा कि बजट में जो लक्ष्य तय किए गए हैं, उन्हेंं सरकार हासिल करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार की जो योजनाएं हैं, उनसे किसानों, बेरोजगारों और महामारी से अनाथ हुए बच्चों को मदद मिलेगी. 

इंडिया टुडे मैगजीन को दिए एक खास इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा, 'विनिवेश कार्यक्रम पटरी पर है और सरकार ने बजट में जो कहा है उसे पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है.' उन्होंने कहा कि बजट में निजीकरण और एसेट मॉनेटाइजेशन के जिन साहसिक कदमों की बात की है, उससे कदम पीछे खींचने का सवाल ही नहीं उठता. आप मुझसे एअर इंडिया, बीपीसीएल के बारे में पूछ सकते हैं. आप कैबिनेट से मंजूर पूरी सूची पढ़ सकते हैं.

वित्त मंत्री ने कहा, 'मैं कहूंगी कि सब कुछ सही दिशा में चल रहा है.यह पूरी तरह से पटरी पर चल रहा है. यह सब तो बजट में बाकायदा है और संसद से इसे मंजूरी मिल चुकी है. मैं उस पर कायम हूं. यह हमारा बजट है.' 

जीडीपी का गोता लगाना बड़ी चुनौती 

सकल घरेलू उत्पाद (GDP) सहित सभी बड़े आर्थिक सूचकांक गोता लगा रहे हों तो बतौर वित्त मंत्री आपको कैसा लगता है? इस सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा, ' देखिए, मैं इसे बड़ी चुनौती की तरह देखती हूं, जो यह आश्वस्त करने के लिए अच्छी- खासी एकाग्रता की मांग करती है कि हम हर पल ऐसे कदम उठाने के काबिल हैं, जिससे लोगों की मदद हो. मैं यह बिल्कुल नहीं कहना चाहती कि इस तरह के आंकड़े मुझे परेशान नहीं करते, मगर मुझे लोगों की दुख- तकलीफ और अनेक परिवारों पर टूट पड़ी त्रासदियों के बारे में भी सोचना है. तो, यही मेरे दिल पर एक बोझ की तरह है. मुझे इसके साथ कुछ इस ढंग से पेश आना है कि चाहे यह पूरी तरह न मिटाया जा सके पर उसकी ओर कदम बढ़े.' 

दूसरी लहर में सरकार ने की गफलत? 

कोविड की दूसरी लहर को लेकर मोदी सरकार की गफलतों के बारे में काफी आलोचना हुई है. इस सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा, 'मैं इसके लिए किसी को दोष नहीं देती. समस्या इतनी भयावह थी, जिस तेजी से दूसरी लहर ने हमला बोला, लोगों को गहरे, त्रासद अनुभव से गुजरना पड़ा, यह स्वाभाविक था कि सरकार पर सवाल उठते. हमें फौरन लोगों की मदद को आगे आना पड़ा और पक्का करना पड़ा कि व्यवस्था सुधरे.' 

दूसरी लहर के असर का अभी आकलन जल्दबाजी 

वित्त मंत्री ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के असर का अभी आकलन करना जल्दबाजी है. एक तो दूसरी लहर के असर का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी. यह पिछली बार से अलग है, इसका प्रबंधन राज्य अलग-अलग तरह के लॉकडाउन के जरिए कर रहे हैं. दूसरी लहर की व्यापकता और प्रचंडता पहली से अलग है.

दूसरी बात, हमने आत्मनिर्भर पैकेज के जो ऐलान किए थे और कुछ का तो केंद्रीय बजट से ठीक पहले ही हुआ था, उसके नतीजे दिखे हैं. बजट ऐसे समय तैयार हुआ था जब हमारे सामने कोविड ग्रस्त अर्थव्यवस्था थी लेकिन हम आसन्न दूसरी लहर से वाकिफ नहीं थे. इसलिए बजट महामारी के नुक्सान की भरपाई के लिए था. बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के मद में, और उसी तरह स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पूंजीगत खर्चों में काफी बढ़ोतरी है.

उन्होंने कहा कि  बजट बड़ी शिद्दत से तैयार किया गया है, सभी संबंधित पक्षों से काफी जानकारियां ली गईं और सही प्राथमिकताएं तय की गईं. अगर पूरे साल के संदर्भ में सही अर्थों में अमल हुआ तो बजट कोविड से संबंधित और उससे उपजने वाली अनेक समस्याओं का हल करने में कामयाब रहेगा. 

गरीबों और बेरोजगारों के लिए क्या करेगी सरकार?  

कोविड की लहरों से बड़े पैमाने पर नौकरियां और रोजगार खत्म हुए हैं, कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बीच 2 करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए. इनके बारे में सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा, 'जैसा कि मैंने पहले कहा, बजट दूसरी लहर की जानकारी के बिना, कोविड के बाद के दौर में आर्थिक बहाली के मद्देनजर तैयार किया गया था. हमने इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े प्रावधान किए, जिसका रोजगार पर फर्क पड़ेगा. फिर स्वास्थ्य पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाया गया जिसका स्वास्थ्य सूचकांक पर असर पड़ेगा.' 

अनाथ बच्चों की कर रहे मदद 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'किसानों के लिए पीएम किसान सक्वमान निधि योजना के लाभ के अलावा हमने इस साल प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण विधि से एमएसपी पर गेहूं और धान की इतनी खरीद की, जितनी पहले कभी नहीं हुई थी. इसका मतलब है कि पैसा किसानों के हाथ में जा रहा है, जिसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फर्क पड़ेगा. इसके अलावा हम लोगों को ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि) से पैसा निकालने की इजाजत दे रहे हैं और महामारी में अनाथ हुए बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए उनके खाते में ठीकठाक एकमुश्त रकम डाल रहे हैं.' 

 


 

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