भारतीय रुपया शुक्रवार को रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. यह छह महीने में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है. डॉलर की तुलना में रुपया अपने सबसे निचले स्तर 91.9650 पर आ गया. हालांकि इसके बाद रुपया 91.94 पर स्थिर हुआ, जो दिन भर में 0.34% की गिरावट रही. एक सप्ताह में भारतीय रुपया 1.18% और महीने के दौरान 2.3% गिर चुका है.
पूरे सप्तह के दौरान रुपये में आई गिरावट ने चिंता पैदा कर दी है. क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर धमकियां जारी करने और बाद में उन्हें वापस लेने के बावजूद, कमजोर होते डॉलर सूचकांक के मुकाबले अधिकांश एशियाई मुद्राओं में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन रुपये में गिरावट जारी है.
रुपये में क्यों आई बड़ी गिरावट?
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा कि सेकेंडरी मार्केट में विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के चलते रुपया 0.30 पैसे कमजोर होकर 91.90 पर कारोबार कर रहा है. घरेलू मैक्रो फंडामेंटल्स स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं में बढ़ोतरी ने बाजार के सेंटिमेंट को सतर्क बनाए हुए है. निकट भविष्य में रुपये पर दबाव बने रहने की उम्मीद है और इसके 91.35-92.25 के कमजोर ट्रेडिंग दायरे में रहने की संभावना है.
बजट से पहले बढ़ी डॉलर की मांग
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का कहना है कि लंबे सप्ताह और आगामी केंद्रीय बजट से पहले आयातकों और कंपनियों की ओर से डॉलर की भारी मांग के चलते भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया. घरेलू शेयर बाजारों में भारी बिकवाली के कारण यह अस्थिरता और बढ़ गई, जिससे गुरुवार की अस्थायी रिकवरी भी खत्म हो गई. हाजिर USDINR के लिए नजरिया पूरी तरह से सकारात्मक बना हुआ है. हमारा अनुमान है कि यह जोड़ी 92 के स्तर को पार कर सकती है और 91.10 पर इसे सपोर्ट मिल सकता है.
रुपये में गिरावट के कारण शेयर बाजार में भी भारी बिकवाली देखी गई. सेंसेक्स और निफ्टी में शुक्रवार को 1 फीसदी के करीब गिरावट आई. सेंसेक्स 770 अंक टूटकर 81,537 पर बंद हुआ और निफ्टी 241 अंक टूटकर 25,048 पर आ गया.
(नोट- किसी भी तरह के निवेश से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)