भारत और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बातचीत चल रही है, ताकि खाड़ी देशों से तेल का आयात हो सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति के साथ बात की है. वहीं अब खबर आ रही है कि 20 टैंकरों को सुरक्षित 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से पार कराने के लिए भारत और ईरान के बीच बातचीत चल रही है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 20 तेल टैंकरों में से 10 टैंकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी भारतीय रिफाइनरियों द्वारा अनुबंधित एलपीजी ले जा रहे हैं, जबकि पांच टैंकर कच्चा तेल लेकर जा रहे हैं. बाकी टैंकर अन्य रिफाइनरियों के लिए हैं.
LPG और LNG के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है भारत
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये खेप भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, जो अपनी तेल और गैस आपूर्ति के लिए पश्चिम एशिया पर बहुत अधिक निर्भर है. इसके एलएनजी का दो-तिहाई और इसके एलपीजी आयात का लगभग पूरा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. ईरान और भारत के बीच बातचीत विदेश मंत्रालय के स्तर पर चल रही हैं, जो ऐसे समय में हो रही हैं जब फारस की खाड़ी में चल रहे संघर्ष के कारण संकरा जलमार्ग प्रभावी रूप से बंद है.
पारस की खाड़ी में भारत के 28 जहाज
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल के दिनों में इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ तीन वार्ताएं की हैं. सरकार ने गुरुवार को एक जानकारी देते हुए बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज काम कर रहे हैं. इनमें से 24 जहाज होर्मुज के वेस्ट में स्थित हैं, जिनमें 677 भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में हैं, जिनमें 101 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार हैं.
होमुर्ज बंद रहने का ऐलान
गुरुवार को ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा. सर्वोच्च नेता का पदभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में खामेनेई ने कहा कि ईरान अपने खाड़ी अरब पड़ोसियों पर हमले जारी रखेगा और जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद करके अमेरिका और इजराइल के खिलाफ दबाव बनाएगा.
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिससे होकर विश्व के कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों में तेजी आने के बाद से कच्चे तेल, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) से भरे टैंकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं.