ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अब भयानक मोड़ पर आ गया है. अमेरिका ईरान पर बड़े हमले की धमकी दे रहा है. वहीं ईरान मिडिल-ईस्ट में अमेरिकी मददगारों के ठिकानों पर मिसाइलें दाग रहा है. जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गया है.
खासकर जब से ईरान ने कतर में LNG प्लांट को निशाना बनाया है, तब से अमेरिका समेत तमाम मिडिल-ईस्ट के देश पलटवार की धमकी दे रहे हैं. ऐसे में ये युद्ध अब आर्थिक तबाही का रूप ले रहा है.
इस बीच ईरान ने नया दांव चल दिया है. तेहरान ने हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स (Transit Fees) लगाने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. बताया जा रहा है कि मौजूदा हालात में ईरान रणनीतिक तौर पर हॉर्मुज रूट को कैश करना चाहता है. जिससे इस रूट पर पूरी तरह से ईरान का नियंत्रण स्थापित हो जाएगा. बता दें, इसी रास्ते से दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस का सप्लाई होता है.
हॉर्मुज पर टैक्स वसूलने की तैयारी में ईरान
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की संसद एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है, इस प्रस्ताव के तहत स्टेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से 'टोल टैक्स' वसूला जा सकता है. यह शुल्क उन देशों से लिया जाएगा, जो इस रास्ते का इस्तेमाल तेल, गैस और व्यापार के लिए करते हैं.
एक तरह से ईरान इस दांव से अमेरिका और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाना चाहता है. अगर टोल लागू होता है तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है. क्योंकि इससे कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ जाएंगी. यानी ईरान अब Hormuz रूट को जियोपॉलिटिकल हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है. हालांकि ईरान इसे सुरक्षा के बदले शुल्क बता रहा है.
वहीं कतर के LNG प्लांट पर हमले से गैस संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है. खासकर यूरोप में गैस की कीमतों में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी जा रही है, क्योंकि यूरोप में सबसे ज्यादा LNG की सप्लाई कतर से होती है. इस बीच कुवैत ने भी पुष्टि की है कि ड्रोन हमले से मीना अल-अहमदी रिफाइनरी में आग लग गई, जिससे प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा है.
भारत के लिए क्या चुनौतियां
फिलहाल भारत सरकार ने LPG की कमी की आशंका से इनकार किया है, और कहा है कि आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि LPG की ऑनलाइन बुकिंग में 94 फीसदी तक बढ़ोतरी आई है. जिसमें अधिकतर लोग पैनिक बुकिंग कर रहे हैं.
होर्मुज रूट से सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, कतर और UAE दुनियाभर में एनर्जी सप्लाई करते हैं. जबकि इसी रूट से तेल और LNG सबसे ज्यादा चीन, भारत, जापान, साउथ कोरिया और यूरोप के कई देशों में पहुंचते हैं. एक तरह से एशियाई देश इस रूट पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं.