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‘मुफ्त’ कोरोना वैक्सीन का पैसा महंगे पेट्रोल-डीजल से वसूल रही सरकार? क्या कहते हैं आंकड़े

क्या आपने कभी सोचा है कि आपको लग रही कोरोना की मुफ्त वैक्सीन के लिए सरकार के पास पैसा कहां से आ रहा है? पेट्रोल और डीजल के लगातार महंगे होने और इस पर लगने वाले भारी-भरकम टैक्स की वजह क्या मुफ्त में चलाया जा रहा कोरोना वैक्सीनेशन है? जानें इस खबर में पूरी बात

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महंगे पेट्रोल-डीजल पर पेट्रोलियम राज्यमंत्री का बयान
  • पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से केंद्र की कमाई 3.35 लाख करोड़
  • जीएसटी के दायरे में नहीं आता पेट्रोल-डीजल

सरकार देश की पूरी आबादी के लिए मुफ्त कोरोना वैक्सीनेशन कार्यक्रम चला रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि इसके लिए लगने वाले भारी भरकम बजट का इंतजाम सरकार कहां से कर रही है और क्या लगातार महंगे हो रहे पेट्रोल-डीजल के पीछे ये एक बड़ी वजह है. तो पेट्रोलियम राज्य मंत्री रामेश्वर तेली के पास इसका जवाब है...

क्या कहना है पेट्रोलियम मंत्री का?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली का कहना है, ''पेट्रोल महंगा नहीं है, बल्कि केन्द्र और राज्य सरकारों ने इस पर टैक्स लगाया हुआ है. सरकार सभी को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन दे रही है. इस वैक्सीन के लिए पैसा कहां से आ रहा है? आपने तो इस वैक्सीन के लिए कोई पैसा नहीं दिया, तो इस तरह के टैक्स से ही इसके लिए पैसा आ रहा है.''

लेकिन क्या पेट्रोलियम राज्यमंत्री का ये बयान उतना सीधा है जितना दिखता है. अगर उनकी बात को आंकड़ों पर परखा जाए तो काफी कुछ अलग स्थिति नजर आती है. लेकिन उससे पहले हमें समझना होगा कि पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स का क्या गणित है.

पेट्रोल-डीजल पर टैक्स का गणित

पेट्रोल और डीजल अभी जीएसटी के दायरे में नहीं आता है. ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकारें दोनों ही इस पर टैक्स की वसूली करती हैं. केन्द्र सरकार इस पर उत्पाद शुल्क लगाती है तो राज्य सरकारें इस पर वैट जैसा कर लगाती हैं. पेट्रोल और डीजल पर करीब 30 रुपये का टैक्स केन्द्र सरकार और 30 रुपये का ही टैक्स राज्य सरकारें वसूलती हैं. ऐसे में इनकी कीमत 30 रुपये लीटर के आसपास है जबकि ग्राहक को अभी लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का दाम देना पड़ रहा है.

कोरोना से पहले केन्द्र सरकार पेट्रोल पर 19.98 रुपये और डीजल पर 15.83 रुपये का टैक्स वसूलती थी जिसे पिछले साल उसने बढ़ाकर क्रमश: 32.90 रुपये और 31.80 रुपये कर दिया.

पेट्रोल डीजल से 88% बढ़ी सरकार की आय

सरकार ने 2021 में मॉनसून सत्र के दौरान संसद में जानकारी दी कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क से उसकी आय 88% बढ़ी है. इस तरह उसका ईंधन से टैक्स कलेक्शन बढ़कर 3.35 लाख करोड़ रुपये रहा है. जबकि सालभर पहले इससे सरकार की आय 1.78 लाख करोड़ रुपये थी. पेट्रोलियम राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने ये जानकारी दी. वहीं वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का कहना है कि अप्रैल-जून में सरकार का उत्पाद शुल्क से कर संग्रह 1.01 लाख करोड़ रुपये रहा है. फिर सरकार ने कोविड-19 के वैक्सीनेशन पर कितना खर्च किया?

कोरोना वैक्सीन का बजट

फरवरी 2021 में सरकार ने अपने आम बजट में कोरोना वैक्सीनेशन के लिए 35,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया था. वहीं पेट्रोल और डीजल पर कर से सरकार की आय 3.35 लाख करोड़ रुपये रही है. ऐसे में अगर सरकार ये कह रही है कि महंगे पेट्रोल-डीजल की वजह मुफ्त कोरोना वैक्सीन है, तो ये आंकड़े ये तस्वीर बयां नहीं करते हैं.

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