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Budget 2022: दहलीज पर बजट, उससे पहले इस अमेरिकी फैसले से हिल गया बाजार

रिकॉर्ड महंगाई (Inflation) को देखते हुए सेंट्रल बैंक (US Central Bank) मार्च में ब्याज दर बढ़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. फेड रिजर्व के चेयरमैन ने इस बात का भी इशारा किया कि मार्च से फेडरल रिजर्व की हर बैठक में ब्याज दर को बढ़ाया जा सकता है. अमेरिका में महंगाई करीब 4 दशक के हाई पर है और फेडरल रिजर्व को यह बात परेशान कर रही है.

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अगले सप्ताह आने वाला है बजट अगले सप्ताह आने वाला है बजट
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दर बढ़ाना जरूरी
  • ब्याज दर बढ़ने पर शेयर मार्केट से पैसे निकालते हैं इन्वेस्टर

अगले सप्ताह की शुरुआत में बजट (Budget 2022) पेश होने वाला है, लेकिन घरेलू शेयर बाजार (Share Market) लगातार गिरते जा रहे हैं. दरअसल अमेरिकी सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के एक ऐलान से भारत समेत दुनिया भर के बाजार हिल गए हैं. फेडरल रिजर्व ने फिलहाल तो ब्याज दर (US Rate Hike) नहीं बढ़ाया है, लेकिन मार्च के बाद इसे लगातार बढ़ाने का साफ ऐलान किया है.

रिकॉर्ड महंगाई से उड़ी फेडरल रिजर्व की नींद

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन Jerome Powell ने इस सप्ताह हुई दो दिनों की बैठक के बाद बुधवार को फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड महंगाई (Inflation) को देखते हुए सेंट्रल बैंक (US Central Bank) मार्च में ब्याज दर बढ़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार है. इसके साथ ही उन्होंने इस बात का भी इशारा किया कि मार्च से फेडरल रिजर्व की हर बैठक में ब्याज दर को बढ़ाया जा सकता है. अमेरिका में महंगाई करीब 4 दशक के हाई पर है और फेडरल रिजर्व को यह बात परेशान कर रही है.

इस साल 4 बार बढ़ सकती है ब्याज दर

कोरोना महामारी के बाद दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों ने इकोनॉमी (Economy) को सपोर्ट करने की रणनीति को तरजीह दी. इसके लिए ब्याज दरें लगातार कम की गईं. लगभग सभी मेजर इकोनॉमीज में अभी ब्याज दरें ऑल टाइम लो पर हैं. अमेरिका में 2018 के बाद ब्याज दरें नहीं बढ़ाई गई हैं. अब महंगाई के बेकाबू हो जाने के कारण दरें बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है. इस कारण 2022 में फेडरल रिजर्व 4 बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है. यह इशारा पाते ही इन्वेस्टर्स शेयर मार्केट से तेजी से पैसे निकालने में लगे हुए हैं.

8 साल बाद इतना महंगा हुआ है क्रूड ऑयल

दूसरी ओर यूक्रेन संकट (Ukraine Crisis) का भी बाजार पर बुरा असर पड़ रहा है. रूस ने यूक्रेन की सीमा पर करीब 1 लाख सैनिकों की तैनाती की है. अमेरिका और उसके सहयोगी देश मानते हैं कि रूस यूक्रेन पर हमला कर सकता है. इस आशंका को देखते हुए नाटो ने भी पूर्वी यूरोप में सैनिकों, जहाजों, फायटर जेट आदि की संख्या बढ़ा दी है. इस सकंट के बाद कच्चे तेल की कीमत (Crude Oil Prices) में आग लगी हुई है. अभी ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 90 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा है, जो 8 साल में सबसे ज्यादा है.

फेड का हिंट मिलते ही पैसे निकालने लगे इन्वेस्टर

आज बाजार खुलते ही 2 फीसदी तक गिर गया. सेंसेक्स (BSE Sensex) शुरुआती कारोबार में ही 57 हजार अंक के स्तर से नीचे फिसल गया. निफ्टी (NSE Nifty) को भी कोई सपोर्ट मिलने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है और यह 17 हजार अंक से नीचे आया हुआ है. इससे पहले पिछले सप्ताह से ही बाजार लगातार नीचे आया है. मंगलवार को करीब 0.50 फीसदी की तेजी से पहले घरेलू बाजार में लगातार 5 दिन गिरावट आई थी. शेयर बाजार अभी 1 महीने से ज्यादा समय के निचले स्तर पर आ चुका है.

अगले सप्ताह संसद में पेश होगा बजट

बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आ रही है, जब नया बजट चंद दिनों दूर है. इस सप्ताह आज के बाद बस एक दिन बाजार में कारोबार होने वाला है. अगले सप्ताह से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है. अगले सप्ताह के पहले दिन आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) पेश होगी और उसके एक दिन बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) बजट पेश करेंगी. कोरोना की तीसरी लहर और अर्थव्यवस्था पर छाए संकट के बादल के चलते यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार इस बार सुपर बजट करने वाली है. बजट में इंफ्रा, एग्री, डिफेंस और हेल्थकेयर जैसे सेक्टरों पर खर्च बढ़ाए जाने के अनुमान हैं. अगर अनुमान सही निकला तो अगेल सप्ताह शेयर मार्केट को उबरने का बढ़िया मौका मिल सकता है.

 

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