देश का आम बजट (Budget 2026) आने वाला है और पूरे देश की निगाहें इसमें होने वाले ऐलानों पर रहेंगी. वित्त मंत्री निर्मला सीारमण 1 फरवरी 2026 को इसे संसद में पेश करेंगी. Budget से जुड़ी कुछ खास बातों पर गौर करें, तो इसमें इसे पेश करने से पहले हलवा सेरेमनी की परंपरा शामिल है, इसका खास महत्व है. आइए जानते हैं क्या होती है ये (Halwa Ceremony), क्यों है खास और कितनी पुरानी है ये परंपरा?
रविवार को पेश होगा इस बार का बजट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार (PM Narendra Modi Govt) का बजट 2026 पेश किए जाने को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. निर्मला सीतारमण की बजट टीम लगातार इस पर काम कर रही है और इस बार खास बात ये है कि Budget 2026 रविवार के दिन पेश होने वाला है. इसकी पुष्टि बीते दिनों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा की गई थी. हर साल संसद में बजट पेश होने से पहले वित्त मंत्री और इस काम से जुड़े अन्य वित्त मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारी के बीच हलवा सेरेमनी सेलिब्रेट की जाती है, जो लंबे समय से चली आ रही है.
आजादी के बाद से जारी है 'Halwa' परंपरा
देश का आम बजट पेश किए जाने से पहले Halwa Ceremony की ये परंपरा आजादी के बाद से ही चली आ रही है. हलवा सेरेमनी का आयोजन हमेशा बजट पेश करने की तैयारी पूरी होने के बाद किया जाता है. इसमें वित्त मंत्री के साथ ही वित्त मंत्रालय के तमाम बड़े अधिकारी और कर्मचारी मौजूद, जो इस बजट डॉ्क्यूमेंट को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
क्या है हलवा सेरेमनी का महत्व?
Budget से जुड़े तमाम काम पूरे होने के बाद वित्त मंत्रालय के 10 नार्थ ब्लॉक स्थित परिसर में ही बड़ी कड़ाही में हलवा तैयार किया जाता है. इसके बाद वित्त मंत्री द्वारा खुद सभी कर्मचारियों, छपाई कार्य से जुड़े कर्मियों और वित्त अधिकारियों को ये हलवा बांटा जाता है. हलवा सेरेमनी के पीछे मान्यता रही है कि हर शुभ काम करने से पहले कुछ मीठा खाना चाहिए, इसलिए बजट जैसे बड़े इवेंट से पहले इस सेरेमनी का आयोजन किया जाता है.
कॉन्फिडेंशियल होता है बजट डॉक्यूमेंट
Budget Halwa Ceremony से जुड़ी क और खास बात ये है कि बजट डॉक्यूमेंट की कोई भी जानकारी लीक ना हो सके, इसके मद्देनजर हलवा सेरेमनी के बाद इससे जुड़े कर्मचारी और अधिकारी वित्त मंत्रालय परिसर में ही उस समय तक रहते हैं, जब तक कि वित्त मंत्री द्वारा संसद में बजट पेश ना कर दिया जाए. मतलब वे पूरी दुनिया से कटे हुए रहते हैं, न मोबाइल फोन, न इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं. इलाज के लिए भी खास इंतजाम किए जाते हैं.