बिहार के सीवान जिले में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि दिन दहाड़े ही वारदात को अंजाम दे रहे हैं. बुधवार की शाम सिवान में बंदूक ऐसे गरजी कि बीजेपी नेता के बेटे की मौत हो गई. नगर थाने के आंदर ढाला ओवरब्रिज के पास बदमाशों ने पूर्व एमएलसी व बीजेपी नेता मनोज सिंह के बहनोई और भांजे पर सारे आम गोलियां बरसा दी.
सिवान की इस घयना में भाजपा नेता के भांजे की जान चली गई, जबकि उनके बहनोई जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं. हालांकि, पुलिस ने देर राज हमलावर छोटू यादव का हाफ एनकाउंटर कर दिया. बदमाश को दोनों पैर के घुटने में गोली मारी गई है, लेकिन जिस तरह से एक महीने में दूसरी बार वारदात हुए हैं, उससे सिवान फिर से चर्चा के केंद्र में है.
पांच अप्रैल को सिवान में कुख्यात चंदन सिंह और ऑटो चालक के बीच झड़प होती है, जिसके बाद फायरिंग से पूरा इलाका सहम गया. इसकी शुरुआत महज एक छोटी सी कहासुनी से हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला व्यक्तिगत और राजनीतिक रंजिश में बदल गया. अब 25 दिन के बाद अपराधियों ने बीजेपी के दिग्गज नेता मनोज सिंह के बहनोई और भांजे को सारे आम गोली मार दी गई.
बीजेपी नेता मनोज सिंह के परिवार पर हमला
सिवान की सियासत में मनोज सिंह एक चर्चित नाम है, जो बीजेपी के दिग्गज नेता हैं और सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन हैं. इससे पहले वो एमएलसी रह चुके हैं, जिनके बहनोई व लक्ष्मीपुर निवासी चंदन सिंह और भांजा हर्ष सिंह को बदमाशों ने सारे आम गोली मारी. इस वारदात में हर्ष सिंह की मौत हो गई और चंदन सिंह की हालत गंभीर है. यह घटना उस समय हुई, जब बीजेपी नेता मनोज सिंह के बहनोई चंदन सिंह के परिवार में तिलक समारोह की तैयारियां चल रही थीं.
चंदन सिंह के परिवार के लोग तिलक लेकर जाने वाले थे और चारों तरफ खुशी का माहौल था. चंदन सिंह अपने बेटे हर्ष कुमार के साथ तिलक में जाने के लिए निकले थे. इस दौरान उनकी गाड़ी से एक दूसरी गाड़ी टकरा गई. इसके बाद बहस होने लगी और देखते ही देखते बदमाशों ने अपनी पिस्तौल निकाल ली. अपराधियों ने पिता और पुत्र दोनों पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं. इस फायरिंग में हर्ष सिंह की मौत हो गई और चंदन सिह घायल हैं.
वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश अपनी कार में सवार होकर मौके से बड़ी आसानी से फरार हो गए, लेकिन मामला हाई प्रोफाइल और बीजेपी से नेता से जुड़े होने के चलते पुलिस एक्शन में आई. घटना को अंजाम देने वाले चारों हमलावर की पहचान की गई, जिसमें हुसैनगंज थाना क्षेत्र के हथोड़ा निवासी छोटू यादव का देर रात एनकाउंटर कर दिया गया. इसके अलावा तीन अन्य अपराधियों की तलाश जारी है, लेकिन इस घटना ने फिर से सिवान को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
एक महीने में दूसरी बार सीवान दहला
सिवान एक महीने में दूसरी बार दहला है. 5 अप्रैल को सीवान के एमएच नगर थाना क्षेत्र के सेमरी गांव में एक ऑटो टेम्पो और स्कॉर्पियो के बीच साइड लेने को लेकर मामूली टक्कर हुई. स्कॉर्पियो में कुख्यात चंदन सिंह अपने साथियों के साथ सवार थे जबकि दूसरी तरफ ऑटो चालक के पक्ष में ओसामा शहाब के करीबी माने जाने वाले डब्लू खान और उनके समर्थक थे.टेम्पो चालक के पक्ष में डब्लू खान के उतरने से विवाद ने हिंसक रूप ले लिया.इसके बाद दोनों ही ओर से मुकादमे दर्ज कराए गए हैं, लेकिन सीवान में दहशत का माहौल बन गया है.
अब बुधवार को बीजेपी नेता मनोज सिंह की बहनोई और भांजे पर अपरिधियों ने दिन दहाड़े हमला कर दिया. इस घटना में मनोज सिंह के भाजे की मौत हो गई और बहनोई गंभीर रूप से जख्मी हैं. भाजपा नेता के रिश्तेदारों पर हुए इस हमले ने सिवान की कानून व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस भले ही छोटू यादव का हाफ एनकाउंटर करके मामले को शांत करने की कोशिश कर रही हो, लेकिन सिवान में फिर से अपराधी सिर उठाने लगे हैं और लोगों में दहशत का माहौल बन रहा.
जानिए कौन है बीजेपी नेता मनोज सिंह?
मनोज सिंह सिवान की सियासत में एक जाना और पहचाना नाम है. एमएलसी रह चुके हैं और सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन हैं, 2025 में रघुनाथपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयार कर रहे थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल सका. मनोज कुमार सिंह 2021 में लोजपा के टिकट पर रघुनाथपुर क्षेत्र से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं. वहां उनको हार का सामना करना पड़ा था. उसके बाद से वो फिर से भाजपा में शामिल हो गए.
मनोज सिंह कॉपरेटिव बैंक के दूसरी बार चेयरमैन हैं मनोज कुमार सिंह को पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का धुर विरोधी माना जाता रहा है. रघुनाथपुर सीट से बाहुबली शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब विधायक हैं, मनोज सिंह के साथ शहाबुद्दीन के रिश्ते जगजाहिर हैं, लेकिन दोस्ती बाद में अदावत में बदल गई थी. इसके बाद दोनों के रिश्ते अलग-अलग हो गए, लेकिन शहाबुद्दीन के निधन के बाद फिर से दोनों परिवार साथ आए हैं.
शहाबुद्दीन से मनोज की दोस्ती और अदावत
मनोज सिंह और शहाबुद्दीन एक ही गांव के रहने वाले हैं. मोहम्मद शहाबुद्दीन का उदय हुआ भाकपा (माले)के आतंक की वजह से, जब ज़मींदारों ने उनका समर्थन किया. इनमें ब्राह्मण, ठाकुर, भूमिहार और कायस्थ किसान थे. भाकपा (माले) ने संपन्न किसानों को खूब परेशान किया. खूब हमले किए. इस दौरान मनोज सिंह और शहाबुद्दीन की दोस्ती हुई. इस तरह दोनों बचपन से दोस्त रहे, एक दूसरे लिए सियासी मददगार भी बनते रहे, लेकिन दोस्ती तब दुश्मनी में बदल गई, जब मनोज सिंह के भाई की हत्या हो गई.
साल 2005 में मनोज सिंह के भाई मृत्युंजय सिंह की 2005 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस हत्या में रियाजुद्दीन का नाम आया था. मनोज सिंह की लड़ाई हरिशंकर यादव से थी, जिन्हें शहाबुद्दीन का भी करीबी कहा जाता था. इसके बाद मनोज सिंह ने अपनी अलग राह चुन ली और राजनीति में भी हाथ-पैर आजमाने लगे. इस दौरान शहाबुद्दीन जेल गए और बाद में उनका निधन हो गया तो मनोज सिंह का दबदबा सिवान में स्थापित होने लगा और सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन बन गए.
शहाबुद्दीन परिवार से मनोज सिंह के रिश्ते
मनोज सिंह सिवान की राजनीति पर अपनी पकड़ बनाने के लिए रघुनाथपुर सीट से चुनाव भी लड़े, लेकिन जीत नहीं सके. इसके 2023 में कॉपरेटिव बैंक का चुनाव हुआ तो मनोज सिंह की राह काफी मुश्किल लग रही थी. ऐसे में मनोज सिंह के लिए शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब मददगार साबित हुईं. भाजपा नेता मनोज सिंह ने 18 वोटों से जीत दर्ज की थी.
मनोज सिंह ने अपनी जीत का श्रेय हिना शहाब को दिया. पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन अब दुनिया में नहीं रहे, जो कुछ भी अनबन थी वह उनसे थी.उनके परिवार से मेरी कोई दुश्मनी नहीं है. उनके परिवार के सहयोग से मैंने चुनाव जीता है. 19 के 19 मुस्लिम वोट मुझे मिले हैं. इस तरह मनोज सिंह और शहाबुद्दीन परिवार की चली आ रही अदावत खत्म हुई. ओसामा शहाब 2025 में विधानसभा चुनाव लड़े और मनोज सिंह को टिकट नहीं मिला, तो अंदर खाने कहा जाता है कि मनोज सिंह का मौन समर्थन मनोज को रहा.