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20 हजार के खर्च में बिना ट्रैफिक पटना से प्रयागराज तक का सफर, गंगा में नाव के जरिए महाकुंभ में पहुंचे ये 7 लोग

बसों और ट्रेनों में भारी भीड़ देखकर बिहार के सात लड़कों ने प्रयागराज पहुंचकर कुंभ में स्नान करने के लिए जो निंजा टेक्नीक अपनाई वो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. सिर्फ 20 हजार रुपये के खर्च में ये सात युवा बक्सर से प्रयागराज गंगा नदी में नाव की यात्रा कर संगम तट पर पहुंच गए और फिर स्नान कर इसी रास्ते से सुरक्षित अपने घर भी लौट गए. अब उन्होंने बताया कि उन्होंने ये यात्रा कैसे संभव बनाई और उनका अनुभव कैसा रहा.

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नाव से बिहार से प्रयागराज पहुंचे सात युवक
नाव से बिहार से प्रयागराज पहुंचे सात युवक

यूपी के प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में हर कोई पुण्य की डुबकी लगा लेना चाहता है. लेकिन बस और ट्रेनों में लोगों को जगह नहीं मिल रही है और हवाई जहाज का किराया इतना है कि आप उतने पैसे में विदेश पहुंच सकते हैं. इसलिए बिहार के सात युवा लड़कों ने महाकुंभ जाने के लिए ऐसी निंजा टेक्नीक का इस्तेमाल किया जिसके बाद अब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

84 घंटे में 550 किलोमीटर की यात्रा

इन सात लड़कों ने एक नाव से 84 घंटे में 550 किलोमीटर की यात्रा पूरी की और बिना किसी ट्रैफिक जाम में फंसे सीधे गंगा के रास्ते प्रयागराज पहुंच गए और वहां से डुबकी लगाकर सुरक्षित अपने घर भी पहुंच गए हैं. अब इन सात युवाओं ने बताया कि आखिर उन्होंने ये यात्रा कैसे सभंव बनाई.

गंगा नदी के रास्ते बक्सर से प्रयागराज पहुंचने वाले इन सातों लोगों की टीम में शामिल बक्सर के कम्हरिया गांव के रहने वाले सुखदेव चौधरी, आडू चौधरी, सुमन चौधरी, मुन्नू चौधरी सहित सभी लोग ने इस अनोखे कुंभ यात्रा की पूरी कहानी बताई है.

नाव से जाने का प्लान क्यों बनाया ?

इनमें से एक ने कहा, 'हमने कुंभ यात्रा के बारे में सोचा लेकिन सड़क जाम था, ट्रेन में सीट नहीं थी तो हमारे दिमाग में नाव से यात्रा करने का विचार आया. नावा से यात्रा करने का फैसला करने वाले मुन्नू ने बताया कि पहले उन लोगों ने एक नाव की व्यवस्था की और उसमें दो-दो मोटर लगवाए ताकि अगर एक मोटर खराब हो जाए तो दूसरे मोटर के सहारे वो अपनी यात्रा को जारी रख सकें.

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5 दिनों में पूरी की आने-जाने की यात्रा

भरौली के रहने वाले मुन्नू ने बताया कि हम लोग राशन, पीने का पानी, पैसा और पेट्रोल (ईंधन) लेकर सात दोस्त बक्सर से निकल पड़े.  मुन्नू ने कहा गंगा नदी में लगातार नाव चलने के बाद मोटर गर्म हो जाती थी जिसके बाद उसे बंद करना पड़ता था. इसके बाद बारी-बारी से सभी दोस्त 5 से 6 किलोमीटर नाव को खुद (मैन्यूअली) चलाते थे ताकि मोटर को ठंडा होने का समय दिया जा सके. रात में वो लोग बारी-बारी से सोते थे और एक व्यक्ति नाव को दिशा दे रहा होता था.

नाव से यात्रा कर कुंभ पहुंचने वाले इन लोगों ने बताया कि ये लोग 11 तारीख को घर से निकलने के बाद 13 फरवरी को तड़के संगम पर पहुंच गए और डुबकी लगाने के बाद 16 तारीख की रात 10 बजे ये लोग बक्सर सुरक्षित वापस पहुंच गए.

नाव से प्रयागराज जाने में कितना खर्च आया

इस टीम में यात्रा कर रहे सुमन चौधरी ने बताया कि इस पूरे यात्रा में करीब 20000 का खर्च आया जिसमें पेट्रोल के अलावा राशन और खाने का खर्च भी शामिल है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा केवल प्रोफेशनल लोग ही कर सकते हैं आम जनता के लिए यात्रा कठिनाई भरा और खतरनाक हो सकता है. अब इन सात लोगों की नाव से प्रयागराज की यात्रा सोशल मीडिया के साथ ही पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.

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