
बिहार की सियासत में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है. सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही पूरे राज्य में राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने सचिवालय पहुंचकर अपने पद का औपचारिक रूप से कार्यभार संभाला और अधिकारियों के साथ पहली अहम बैठक की.
मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रवेश करते ही सम्राट चौधरी ने कई महत्वपूर्ण फाइलों की समीक्षा की और प्रशासनिक कामकाज को तेज करने से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए. इसके बाद मुख्य सचिव और विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिवों की पहली औपचारिक बैठक हुई, जिसमें उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए.
शपथ लेते ही मुख्यमंत्री ने संभाला कार्यभार
अपनी पहली ही बैठक में मुख्यमंत्री ने पांच बड़े निर्देश जारी किए. उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान दोगुनी गति से किया जाए और प्रशासनिक कामकाज में तेजी लाई जाए. उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर सख्ती से काम करने के निर्देश दिए और कहा कि राज्य में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी काम को लंबित रखने की प्रवृत्ति खत्म होनी चाहिए और जनता की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिया कि काम को टालने की आदत पर रोक लगाई जाए.
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति, तेज प्रशासन पर जोर
इसके अलावा उन्होंने प्रखंड, अंचल और थाना स्तर पर आम जनता को सुविधाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराने और समय पर शिकायतों के समाधान पर जोर दिया. सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार को एक विकसित और समृद्ध राज्य बनाने के लिए सभी अधिकारियों को एकजुट होकर अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा.
सचिवालय से सामने आई तस्वीरों में मुख्यमंत्री को फाइलों की बारीकी से जांच करते और अधिकारियों को निर्देश देते हुए देखा गया. उनकी मौजूदगी में यह बैठक प्रशासनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.