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फर्जी कॉल, नकली पहचान और लाखों की ठगी... मुजफ्फरपुर में साइबर गैंग का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 17 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है. दरअसल, आरोपियों ने खुद को सीबीआई और पुलिस अधिकारी बताकर व्हाट्सएप कॉल से धमकाया और पैसे ट्रांसफर करवाए थे.

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3 मोबाइल, 13 चेकबुक और डेबिट कार्ड बरामद.(Photo: Manibhushan Sharma/ITG)
3 मोबाइल, 13 चेकबुक और डेबिट कार्ड बरामद.(Photo: Manibhushan Sharma/ITG)

बिहार के मुजफ्फरपुर से साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. साइबर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने भोला प्रसाद महतो नामक व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय व्हाट्सएप नंबरों से कॉल किया. कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और पुलिसकर्मी बताकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की धमकी दी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया.

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डर और दबाव में आकर पीड़ित से आरोपियों ने करीब 17 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए. इस तरह ठगी की इस वारदात को अंजाम दिया गया, जिससे साइबर अपराध का गंभीर मामला सामने आया.

विशेष टीम ने की तकनीकी जांच

इस मामले में साइबर थाना कांड संख्या 58/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया.

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इस टीम ने तकनीकी जांच के साथ संदिग्ध बैंक खातों का गहन विश्लेषण किया. जांच के दौरान बैंक खातों और कॉल डिटेल्स के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई.

तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर पुलिस ने वैशाली जिले के गोरौल थाना क्षेत्र के रहने वाले ब्रजेश कुमार और कृष्णा कुमार को गिरफ्तार किया. इसके साथ ही मुजफ्फरपुर के मनियारी थाना क्षेत्र निवासी विक्रम कुमार को भी पकड़ा गया.

बरामदगी और आगे की कार्रवाई

गिरफ्तार आरोपियों के पास से ठगी में इस्तेमाल किए गए 3 मोबाइल फोन, 13 चेकबुक और पासबुक, 3 डेबिट कार्ड समेत कई बैंकिंग दस्तावेज बरामद किए गए हैं.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इन खातों से देश के विभिन्न राज्यों में कई शिकायतें जुड़ी हुई हैं. इससे गिरोह के नेटवर्क के व्यापक होने की आशंका जताई जा रही है.

फिलहाल, गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. साथ ही आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जांच भी जारी है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है.

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