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बिहार में सड़कों की खस्ता हालत पर सरकार सख्त, निरीक्षण करने उतरी 82 अधिकारियों की टीम

बिहार में रोड और पुल की निर्माण गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. अधिकारियों को प्रमंडल आवंटित किए गए हैं. निर्धारित चेकलिस्ट के आधार पर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी.

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बिहार में सड़कों के हाल पर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी टीम
बिहार में सड़कों के हाल पर शासन को रिपोर्ट सौंपेगी टीम

बिहार में सड़कों और पुल-पुलिया की निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं. विपक्ष भी इसे लेकर सरकार को घेरता आया है. सीएम नीतीश कुमार की सूबे की सत्ता से चला-चली की बेला में इसे लेकर सरकार अब एक्टिव मोड में आ गई है. ग्रामीण इलाकों में सड़क, पुल की गुणवत्ता को लेकर अब सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है. ग्रामीण कार्य विभाग ने 9 से 11 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में सड़कों का हाल जानने के लिए अधिकारियों की फोज उतार दी है.

सूबे के 82 वरिष्ठ अधिकारियों की टीम जमीन पर उतरकर सड़कों, पुलों की गुणवत्ता जांचेगी. अभियंता प्रमुख जयकिशोर ठाकुर के निर्देश पर तैनात ये अधिकारी अपने-अपने (जो आवंटित किए गए हैं) प्रमंडलों में जाकर निर्माणाधीन और निर्मित सड़कों-पुलों का भौतिक सत्यापन करेंगे. इसके लिए चेकलिस्ट भी तैयार की गई है, जिसके आधार पर सभी अधिकारी शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है. सरकार के मुताबिक इस अभियान का फोकस केवल निर्माण कार्यों की प्रगति तक सीमित नहीं है.

अधिकारियों का कहना है कि गुणवत्ता नियंत्रण के तकनीकी पहलुओं की गहन जांच भी इस अभियान के दौरान की जाएगी. इस निरीक्षण के दौरान साइट पर गुणवत्ता प्रयोगशाला, जरूरी रजिस्टर, टेस्ट रिपोर्ट, निविदा प्रक्रिया, एग्रीमेंट, बीमा, परफॉर्मेंस सिक्योरिटी, मानव संसाधन और उपकरणों की उपलब्धता की भी समीक्षा होगी. इस दौरान अधिकारियों की टीम 'हमारा बिहार, हमारी सड़क' ऐप पर दर्ज शिकायतों के निस्तारण की स्थिति का भी आकलन करेगी. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का टास्क भी दिया गया है कि आम जनता की समस्याओं का समय पर समाधान हो.

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ग्रामीण कार्य विभाग की विशेष नजर उन परियोजनाओं पर है, जिनकी निविदाएं 15 प्रतिशत से कम दर पर स्वीकृत हुई हैं. ऐसे सभी कार्यों का जियोटैग्ड फोटो के साथ अनिवार्य भौतिक सत्यापन किया जाएगा. निरीक्षण के दौरान पर्ट चार्ट, मिट्टी कटाई स्थल, खनन और चालान समेत अन्य तकनीकी दस्तावेजों की भी जांच होगी. उन सड़कों की स्थिति भी परखी जाएगी, जिनका डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड खत्म हो चुका है. कोई सड़क इस जांच में खराब पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार को सात दिन के भीतर मरम्मत का निर्देश दिया जाएगा.

अधिकारियों के मुताबिक तय समय में सुधार नहीं होने की स्थिति में अनुबंध रद्द कर ठेकेदार के जोखिम और लागत पर कार्रवाई की जाएगी. ग्रामीण कार्य विभाग का यह भी कहना है कि यह सख्त कदम ग्रामीण इलाकों में टिकाऊ और बेहतर सड़क नेटवर्क सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है. गौरतलब है कि बिहार में पुल गिरने की कई घटनाओं के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे थे.

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