बिहार में 16 मार्च को राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव में 5वीं सीट का गणित बेहद दिलचस्प हो गया है. इस सीट पर एनडीए की ओर से उपेन्द्र कुशवाहा और महागठबंधन की तरफ से अमरेंद्र धारी सिंह मैदान में हैं. पांचवीं सीट के लिए जीत का आंकड़ा 41 वोट है.
मौजूदा स्थिति में एनडीए के पास 38 वोट हैं, यानी तीन वोट कम हैं. वहीं महागठबंधन भी जरूरी आंकड़े से 6 वोट पीछे है. ऐसे में छोटे दलों के विधायक इस चुनाव में निर्णायक भूमिका में आ गए हैं.
बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए सबसे अहम भूमिका असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के 5 विधायकों और बहुजन समाज पार्टी (BSP) के एक विधायक की मानी जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक, दो दिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान और अन्य नेताओं से मुलाकात कर राज्यसभा चुनाव में समर्थन मांगा है.
बताया जा रहा है कि यह बातचीत सकारात्मक रही है. अख्तरुल इमान ने 15 मार्च को पटना में इफ्तार दावत भी रखी है, जिसमें तेजस्वी यादव को आमंत्रित किया गया है. अख्तरुल इमान ने भी तेजस्वी के साथ मुलाकात के बाद संकेत दिया था कि बातचीत काफी सकारात्मक रही है.
ओवैसी लेंगे अंतिम फैसला
अख्तरुल इमान का कहना है कि तेजस्वी यादव के साथ हुई बातचीत की जानकारी पार्टी प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को दी जाएगी और अंतिम फैसला वही लेंगे.
अख्तरुल इमान ने कहा "तेजस्वी के साथ बातचीत काफी पॉजिटिव रही है और अब हम लोग असदुद्दीन ओवैसी साहब से मिलकर उन्हें सब कुछ बताएंगे और फिर जैसा उनका फैसला होगा वैसा किया जाएगा".
सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि बैठक में संभावित ‘GIVE and TAKE’ फॉर्मूले पर बात हुई है.
माना जा रहा है कि अगर AIMIM के 5 विधायक राज्यसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार को समर्थन देते हैं तो आगामी बिहार एमएलसी चुनाव में महागठबंधन की ओर से AIMIM को एक सीट दी जा सकती है.
उधर, एनडीए उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा ने भी AIMIM नेताओं से संपर्क साधा है. ऐसे में इस चुनाव में AIMIM के विधायक किंगमेकर की भूमिका में नजर आ रहे हैं.
अब सबकी नजर 16 मार्च की वोटिंग पर टिकी है, जब यह साफ होगा कि AIMIM के विधायक एनडीए के साथ जाते हैं या महागठबंधन के साथ.