बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के साथ ही राज्य में नीतीश कुमार के शासन का नया दौर शुरू हो गई हैं. शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद बिहार के मंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार ने आने वाले पांच सालों में बिहार को एक विकसित राज्य बनाने की चुनौती स्वीकार कर ली है. उन्होंने जोर देकर कहा कि 'कानून का शासन' नई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी.
विकसित बिहार की चुनौती स्वीकार: दिलीप जायसवाल
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, 'आज हमने एक विकसित बिहार के सपने को पूरा करने की चुनौती स्वीकार की है, आने वाले दिनों में युवाओं को रोजगार, महिलाओं को सम्मान और स्वरोजगार के अवसर देना सरकार का मुख्य एजेंडा रहेगा. इसके साथ ही कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाना और जनता का भरोसा जीतना हमारी पहली जिम्मेदारी है.'
नई सरकार का यह शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड दसवीं बार पद की शपथ ली. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने पूरे आयोजन को और भी महत्वपूर्ण बना दिया. मंच पर एनडीए के कई शीर्ष नेता उपस्थित थे, जिनमें भाजपा विधानमंडल दल के नेता सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी शामिल थे, दोनों ने पूर्व सरकार में डिप्टी सीएम के रूप में भूमिका निभाई थी.
अगला पांच साल बिहार के लिए निर्णायक: दिलीप जायसवाल
नए मंत्रिमंडल में कई प्रमुख चेहरों को शामिल किया गया है. नए मंत्रियों में तीन ऐसे नेता भी हैं जो विधान परिषद के सदस्य हैं. दिलीप जयसवाल, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी सहयोगी अशोक चौधरी, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन है.
जायसवाल ने कहा, 'हम पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ इस चुनौती को स्वीकार कर रहे हैं, सरकार की कोशिश होगी कि प्रभावी शासन व्यवस्था के जरिए जनता का भरोसा वापस मजबूत किया जाए. उन्होंने संकेत दिया कि अगली पांच साल की अवधि बिहार के विकास के लिए निर्णायक साबित होगी.
नई सरकार की प्राथमिकताओं रोजगार, सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और महिलाओं के लिए सम्मान जनता में नई उम्मीदें जगाई हैं. अब निगाहें इस बात पर हैं कि एनडीए सरकार इन वादों को जमीन पर कैसे उतारती है.