
एक दौर था जब सेडान को प्रीमियम और लग्ज़री माना जाता था. जब भी कार का जिक्र होता था तो ज्यादातर लोगों के जेहन में एक सेडान की ही छवि उभरती थी. लेकिन समय के साथ सेडान कारों की डिमांड कम होती जा रही है. पिछले एक दशक में इंडियन ऑटो सेक्टर तेजी से बदला है और साथ ही लोगों की पसंद, प्राथमिकताएं और जरूरतें भी बदली हैं. जिसका नतीजा है कि, सेडान कारों की जगह अब स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल्स, यानी कि SUV ने ले ली है.
भारत में SUV का जो क्रेज है वो सबसे जुदा है, हमें नहीं लगता कि भारत में एसयूवी के जितने रूप हैं उतने किसी अन्य बाजार में होंगे. यहां तो हैचबैक जितनी बड़ी कारों को भी प्लास्टिक क्लैडिंग से सजा कर SUV कैटेगरी में रखकर बेचा गया है. माइक्रो, मिनी, कॉम्पैक्ट, मिड-साइज, फुल-साइज, क्रॉसओवर जैसे कई ऐसे बॉडी टाइप हैं जिनकी बिक्री भारतीय बाजार में की जा रही है. हालांकि सबसे ज्यादा डिमांड में कॉम्पैक्ट और मिड-साइज की एसयूवी कारों की है.

टॉप 25 की लिस्ट में केवल 1 कार:
बीते मई महीने में वाहनों की बिक्री का आंकड़ा सामने आ चुका है, Maruti Baleno इस महीने देश की सबसे ज्यादा बेची जाने वाली कार बनी है. लेकिन इस बार के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि, देश की टॉप 25 बेस्ट सेलिंग कारों की लिस्ट में केवल एक ही सेडान कार जगह बना पाई. संभव है कि, आपने तकरीबन अंदाजा लगा लिया होगा, ये Maruti Dzire.
मारुति सुजुकी की कॉम्पैक्ट सेडान कार मारुति डिजायर एकमात्र ऐसी सेडान है जिसने इस लिस्ट में जगह बनाया है. कंपनी ने इस कार के कुल 11,315 यूनिट्स की बिक्री की है जो कि पिछले साल के इसी महीने में बेचे गए कुल 11,603 यूनिट्स के मुकाबले तकरीबन 2% कम है. वहीं अन्य सेग्मेंट की बात करें तो 8 हैचबैक, 11 एसयूवी, 4 एमपीवी और वैन कैटेगरी की 1 कार इस लिस्ट में शामिल हैं. ये लिस्ट इस बात की गवाह है कि
मई महीने में टॉप 25 लिस्ट में शामिल कारें:
क्या खत्म हो रहा है सेडान कार क्रेज:
कॉम्पैक्ट सेडान कारों की बात करें तो इस समय बाजार में मारुति डिजायर के अलावा टाटा टिगोर, हुंडई ऑरा और होंडा अमेज जैसे मॉडल शामिल हैं. बीते मई महीने में देश की सबसे सस्ती सेडान के तौर पर जानी जाने वाली Tata Tigor के बमुश्किल 2,701 यूनिट्स की बिक्री हुई है. वहीं हुंडई ऑरा-एक्सेंट के कुल 4,707 यूनिट्स बेचे हैं. इसके अलावा होंडा अमेज के 3,128 यूनिट्स की बिक्री हुई है. ये वो सेडान कारें जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय रही हैं. इसमें टिगोर और ऑरा सीएनजी विकल्प के साथ भी आती हैं.

SUV ने ले ली जगह:
इस समय ज्यादातर लोगों को SUV गाड़ियां पसंद आ रही हैं. जिस तरह बाजार में माइक्रो, मिनी और कॉम्पैक्ट सेग्मेंट मशहूर हो रहा है लोग SUV पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कम कीमत, स्पोर्टी लुक, लो-मेंटनेंस और बेहतर माइलेज है. लेकिन क्या बाजार में मौजूद सभी गाड़ियां को एसयूवी कहना सही है, क्या वो सभी कारें जो एसयूवी के नाम पर बेची जा रही है वो मानकों को पूरा करती हैं.
SUV का चलन इस कदर बढ़ा है कि कई वाहन निर्माता कंपनियां भी अपने छोटे वाहनों को एसयूवी कह कर प्रचारित कर रही हैं. लेकिन ऐसे समय में सरकार SUVs को कैसे देखती है जब ब्रांड छोटी कारों को एसयूवी वाहनों के रूप में मार्केटिंग कर रहे हैं? किसी भी वाहन को स्पोर्ट यूटिलिटी व्हीकल (SUV) कह देना किस हद तक सही है?
सरकार ने समझाई थी SUV की परिभाषा:
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 48वीं वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक हुई थी, जिसमें वित्त मंत्री ने वाहन निर्माताओं के लिए स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) की एकल परिभाषा को स्पष्ट करते वाहनों पर लगने वाले टैक्स को भी समझाया था. जिसके अनुसार, एक कार को एसयूवी या स्पोर्ट्स यूटिलिटी वाहन तभी माना जाएगा जब वह इन मानदंडों को पूरा करेगा. अर्थात्: ऐसे वाहन जिनकी इंजन की क्षमता 1,500cc से अधिक है, जिनकी लंबाई 4,000mm से अधिक है; और जिनका ग्राउंड क्लीयरेंस 170 मिमी या उससे अधिक है उसे ही एसयूवी की श्रेणी में रखा जाएगा.