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तमिलनाडु में बनी पहली Range Rover फैक्ट्री से रोल-आउट, CM स्टालिन ने संभाली स्टीयरिंग

JLR Factory Tamilnadu: चेन्नई से करीब 90 किलोमीटर दूर बने इस प्लांट को सिर्फ 16 महीने में तैयार किया गया. बीते कल इस फैक्ट्री से पहली कार को रोल आउट किया गया, जिसे मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने खुद ड्राइव किया.

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CM स्टालिन ने फैक्ट्री से निकली पहली रेंज रोवर को ड्राइव किया. Photo: X/@mkstalin
CM स्टालिन ने फैक्ट्री से निकली पहली रेंज रोवर को ड्राइव किया. Photo: X/@mkstalin

तमिलनाडु के रानीपेट में बीते सोमवार की सुबह कुछ अलग थी. बड़ी फैक्ट्री, चमचमाती कार, कैमरों की भीड़ और बीच में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन. मौका था खास, क्योंकि टाटा मोटर्स के नए प्लांट से बनी पहली लग्जरी कार बाहर निकल रही थी. कार कोई आम नहीं थी, रेंज रोवर एवोक. और इसे चलाने वाले थे खुद मुख्यमंत्री. यानी उद्घाटन भी और टेस्ट ड्राइव भी. यह पूरा कार्यक्रम रानीपेट जिले के पनापक्कम इलाके में बने टाटा मोटर्स के नए ग्रीनफील्ड प्लांट में हुआ. 

चेन्नई से करीब 90 किलोमीटर दूर बने इस प्लांट को सिर्फ 16 महीने में तैयार किया गया. सरकार ने इसे तेज काम और मजबूत सिस्टम का उदाहरण बताया. इस प्लांट में बनने वाली पहली कार रेंज रोवर एवोक को रोल-आउट किया गया. यह जगुआर लैंड रोवर यानी JLR ब्रांड का हिस्सा है. शुरुआत में यहां इस कार की CKD असेम्बली होगी. यानी गाड़ी के पार्ट्स बाहर से आएंगे और यहां जोड़कर तैयार की जाएगी. इसकी एक्स शोरूम कीमत 65 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है.

JLR Factory in Tamilnadu
जगुआर लैंडरोवर की इस फैक्ट्री में कुल 9000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. Photo: ITG

जब स्टालिन ने संभाली स्टीयरिंग

फैक्ट्री के अंदर अधिकारी, इंजीनियर और कर्मचारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इस पहली कार को टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के साथ चलाया. स्टालिन ने कहा कि यह दिन द्रविड़ मॉडल की रफ्तार और भरोसे को दिखाता है. इसके अलावा उनके आधिकारिक 'X' हैंडल से इसकी कुछ तस्वीरों को भी साझा किया गया. 

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इस पोस्ट में स्टालिन ने लिखा कि, "कल की विंटेज रूह और आज हाथों में मॉडर्न ठाठ. 1958 की सीरीज वन लैंडरोवर चलाने का अनुभव हो या जगुआर लैंड रोवर की रेंज रोवर इवोक की. आज की टेक्नोलॉजी को महसूस करना ठीक वैसा ही है जैसे दो दिन में दो दौर का गुजरना. लेकिन खुशी वही पुरानी है. चार पहियों पर मिलने वाला सुकून ही मेरी असली थेरेपी है."

9000 करोड़ का निवेश, हजारों नौकरियां

यह प्लांट SIPCOT की 480 एकड़ जमीन पर बना है. इसमें कुल 9000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. पहले चरण में 900 करोड़ रुपये लगाए गए हैं. आने वाले चार से पांच साल में यह प्लांट हर साल ढाई से तीन लाख गाड़ियां बना सकेगा. इससे करीब 5000 लोगों को सीधी नौकरी मिलेगी और हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है.

फिलहाल यहां रेंज रोवर एवोक बनेगी, लेकिन आगे चलकर टाटा और JLR की दूसरी गाड़ियां भी इसी प्लांट से निकलेंगी. टाटा का कहना है कि आने वाले सालों में यहां नई टेक्नोलॉजी और हाई एंड मैन्युफैक्चरिंग पर काम होगा. रानीपेट प्लांट दक्षिण भारत में टाटा मोटर्स का दूसरा बड़ा मैन्युफैक्चरिंग सेंटर है. इससे पहले कर्नाटक के धारवाड़ में टाटा का प्लांट है. इसके साथ ही भारत अब JLR के ग्लोबल प्रोडक्शन नेटवर्क का हिस्सा बन गया है, जिसमें ब्रिटेन, चीन और ब्राजील जैसे देश शामिल हैं.

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तमिलनाडु पहले से ही कार मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हब रहा है. यहां हुंडई, फोर्ड, रेनो निसान और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियां मौजूद हैं. पिछले 6 महीनों में दो नए बड़े प्लांट शुरू हुए हैं, जिनमें वियतनाम की इलेक्ट्रिक कार कंपनी विनफास्ट का भारत का पहला प्लांट भी शामिल है.

एन चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत के यूके, यूएई और यूरोप के साथ हुए व्यापार समझौते भारतीय गाड़ियों को विदेशी बाजारों तक पहुंचने में मदद करेंगे. इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच होने वाली ट्रेड डील से भी नए मौके बनेंगे. रानीपेट का यह प्लांट टाटा मोटर्स की लंबी रणनीति का हिस्सा है. कंपनी पहले ही गुजरात के साणंद में फोर्ड का प्लांट खरीद चुकी है. अब दक्षिण भारत में यह नई फैक्ट्री टाटा के ऑटोमोबाइल भविष्य की बड़ी कड़ी बन रही है.
 

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