scorecardresearch
 

‘जुगाड़ू इंडियंस’ का मस्त बिजनेस आइडिया, Audi की बैटरी से चला रहे ई-रिक्शे!

कार के लिए हाई-वोल्टेज बैटरी की जरूरत होती है और एक निश्चित समय के बाद उसकी लाइफ कार के लिए सही नहीं रहती. इसलिए इस स्टार्टअप कंपनी ने इन बैटरी को दूसरा जीवन देने का रास्ता निकाला और इन्हें ई-रिक्शा में इस्तेमाल करने का नायाब प्रयोग किया.

X
Audi की बैटरी से चल रहा ई-रिक्शा Audi की बैटरी से चल रहा ई-रिक्शा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • Audi e-tron की बैटरी का इस्तेमाल
  • सोलर एनर्जी से चार्ज होगी बैटरी

‘जुगाड़’ के मामले में भारतीयों को पूरी दुनिया में कोई टक्कर नहीं दे सकता. हम कभी स्कूटर के इंजन से आटा चक्की बना देते हैं, तो कभी लालटेन से रनवे को रोशन करके विमान की लैंडिंग करा देते हैं. अब जब देश में स्टार्टअप की लहर चल रही है, तब एक स्टार्टअप कंपनी ने ऐसे ही एक ‘जुगाड़ू’ आइडिया को जबरदस्त बिजनेस मॉडल बना लिया है. ये स्टार्टअप पुरानी बैटरियों को फिर से इस्तेमाल लायक बनाता है. इससे दो फायदे होते हैं-पहला ये बैटरी से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करता है, दूसरा बैटरी के रिसाइकिल से उसके इस्तेमाल की लागत को कम करता है.

Audi की बैटरी से चल रहे ई-रिक्शे
जर्मन-इंडियन स्टार्टअप कंपनी Nunam ने बैटरी री-यूज की दुनिया में एक अनोखा प्रयोग किया. जब हर तरफ इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर क्रेज बढ़ रहा है, तब कंपनी ने इलेक्ट्रिक कार की पुरानी बैटरियों के फिर से इस्तेमाल का एक नायाब तरीका निकाला है. इस स्टार्टअप ने Audi की इलेक्ट्र्रिक कारों की पुरानी बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शे बनाए हैं और अब इन्हें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इंडियन मार्केट में टेस्टिंग के लिए भेजा जाना है. Nunam बर्लिन और बेंगलुरू से ऑपरेट करती है. कंपनी के इस प्रोजेक्ट को खुद Audi ने भी मदद की है.

चार्जिंग के लिए बनाया है सोलर एनर्जी सिस्टम
चार्जिंग के लिए बनाया है सोलर एनर्जी सिस्टम

सोलर एनर्जी से चार्ज होती हैं ई-रिक्शा की बैटरी
अभी देश में जो इलेक्ट्रिक रिक्शा उपलब्ध हैं, वो सभी लेड-एसिड की बैटरी से चलते हैं. इनकी लाइफ बहुत कम होती है और खराब होने के बाद इनका निस्तारण भी ठीक से नहीं होता. इसलिए कंपनी ने Audi की बैटरी से चलने वाले इन ई-रिक्शा की बैटरी को चार्ज करने के लिए सोलर चार्जर सिस्टम बनाया है.

Audi e-tron की बैटरी का इस्तेमाल
इन ई-रिक्शों को नूनम ने ऑडी के साथ ही मिलकर तैयार किया है. इसके लिए ऑडी की e-tron सीरीज की बैटरी का इस्तेमाल किया गया है. नूनम के को-फाउंडर प्रदीप चटर्जी का कहना है कि कार के लिए हाई-वोल्टेज बैटरी की जरूरत होती है और एक निश्चित समय के बाद उसकी लाइफ कार के लिए सही नहीं रहती. इसलिए नूनम ने इन बैटरी को दूसरा जीवन देने का रास्ता निकाला और इस पायलट प्रोजेक्ट से ये देखना चाहा कि क्या इन बैटरी को ई-रिक्शों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं

इससे पहले नूनम मोबाइल, लैपटॉप की पुरानी बैटरियों से चलने वाली इलेक्ट्रिक लाइट भी बना चुकी है, जिसका इस्तेमाल रेहड़ी-पटरी वाले आसानी से कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें: 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें