सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका, ट्रांसजेंडर कैदियों के हेल्थकेयर बैन पर रोक बरकरार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को झटका देते हुए संघीय जेलों में बंद ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए जेंडर-अफर्मिंग हेल्थकेयर पर लगाए गए प्रतिबंधों को तुरंत लागू करने से रोक दिया है. कोर्ट ने जस्टिस डिपार्टमेंट की अपील खारिज कर निचली अदालत की रोक को बरकरार रखा.

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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप प्रशासन को झटका, ट्रांसजेंडर कैदियों की हेल्थकेयर नीति पर रोक कायम.(File Photo: Reuters) अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का ट्रंप प्रशासन को झटका, ट्रांसजेंडर कैदियों की हेल्थकेयर नीति पर रोक कायम.(File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:55 AM IST

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका दिया. कोर्ट ने संघीय जेलों में बंद ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए जेंडर-अफर्मिंग हेल्थकेयर पर लगाए गए प्रतिबंधों को तुरंत लागू करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही निचली अदालत का वह आदेश बरकरार रहेगा, जिसने फिलहाल इस नीति पर रोक लगा रखी है. मामले में कानूनी लड़ाई अभी जारी रहेगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस डिपार्टमेंट की उस इमरजेंसी अपील को खारिज कर दिया, जिसमें निचली अदालत के आदेश को हटाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने अपने संक्षिप्त आदेश में फैसले की वजह नहीं बताई. हालांकि, कंजरवेटिव जस्टिस क्लेरेंस थॉमस और सैमुअल अलिटो ने इससे असहमति जताई.

ट्रंप प्रशासन ने फरवरी में यह नीति लागू की थी. इसके तहत संघीय जेलों में जेंडर ट्रांजिशन से जुड़े मेडिकल और सर्जिकल इलाज पर रोक लगाई गई थी. इसके अलावा कपड़ों और बाल हटाने वाले उपकरणों जैसी सामाजिक सुविधाओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया था, जिनका इस्तेमाल कैदी अपनी जेंडर पहचान के अनुरूप दिखने के लिए करते हैं. हालांकि, मनोरोग सेवाओं की अनुमति बनी हुई है.

तीन ट्रांसजेंडर कैदियों ने दी थी चुनौती

न्यू जर्सी, फ्लोरिडा और मिनेसोटा की संघीय जेलों में बंद तीन ट्रांसजेंडर कैदियों ने इस नीति को चुनौती देते हुए क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया था. उनका कहना था कि हार्मोन थेरेपी पर रोक से गंभीर नुकसान हो सकता है, जिसमें डिप्रेशन, चिंता, आत्महत्या के विचार और खुद को नुकसान पहुंचाने का खतरा बढ़ सकता है. अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन की वकील अदिति शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला याचिकाकर्ताओं और प्रभावित लोगों को गंभीर और अपूरणीय नुकसान से बचाएगा, जबकि सरकार की नीति के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रहेगी.

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निचली अदालत ने नीति को बताया था संभावित रूप से गैरकानूनी

जून में वॉशिंगटन के अमेरिकी जिला जज रॉयस लैम्बरथ ने इन प्रतिबंधों पर रोक लगा दी थी. उन्होंने कहा था कि नीति संघीय एजेंसी की प्रक्रिया से जुड़े कानून के तहत संभावित रूप से 'arbitrary and capricious' है. जज ने यह भी कहा था कि ब्यूरो ऑफ प्रिजन्स ने अपने ही सबूतों और अनुभवों को नजरअंदाज किया और ट्रंप के ट्रांसजेंडर संबंधी कार्यकारी आदेश को लागू करने के लिए नीति को तैयार किया. 18 सितंबर को अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स ने भी इस रोक को हटाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

ट्रंप प्रशासन पहले भी लगा चुका है कई प्रतिबंध

जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े कई कदम उठाए हैं. सरकार ने संघीय नीति में केवल पुरुष और महिला सेक्स को मान्यता देने का आदेश दिया था. इसके अलावा ट्रांसजेंडर महिलाओं को महिला जेलों में रखने और जेंडर पहचान के अनुरूप इलाज के लिए संघीय फंडिंग से जुड़े प्रतिबंध भी लगाए गए. सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों पर राज्य प्रतिबंधों और सेना में ट्रांसजेंडर लोगों की सेवा पर रोक को लागू रहने दिया है. हालांकि, जेलों में हेल्थकेयर से जुड़े इस मामले में कोर्ट के ताजा आदेश ने ट्रंप प्रशासन की नीति को फिलहाल रोक दिया है. यह फैसला अंतिम नहीं है और मामले की कानूनी लड़ाई आगे जारी रहेगी.

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