ईरान के तेल जहाजों को दूसरे देशों का बताकर चलाने में भारत और तुर्किये से जुड़ी कुछ कंपनियों की भूमिका सामने आई है. अमेरिका ने इन कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. इस कार्रवाई में चंडीगढ़ के एक कारोबारी, उनकी पत्नी और दो अन्य भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. अमेरिका का कहना है कि इन लोगों ने फर्जी कागजात के जरिए ईरान के तेल को दूसरे देशों के नाम पर भेजने में मदद की. इस पूरे मामले में जहाजों की पहचान छिपाने से लेकर उनके रजिस्ट्रेशन तक का खेल सामने आया है.
अमेरिका के वित्त मंत्रालय ने बुधवार को इस कार्रवाई का ऐलान किया. भारत से जुड़े कुल नौ संस्थानों को प्रतिबंधित किया गया है. वहीं, तुर्किये की एक कंपनी पर भी कार्रवाई हुई है. उस पर ईरान की छह प्रतिबंधित एयरलाइंस को जमीन पर जरूरी सेवाएं देने का आरोप है.
जहाजों को दूसरे देशों के नाम पर चलाने का आरोप
अमेरिका की कार्रवाई के केंद्र में चंडीगढ़ के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद हैं. अमेरिकी वित्त मंत्रालय के मुताबिक, दोनों कम से कम 2014 से फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन के काम में शामिल थे. आरोप है कि उन्होंने ऐसी वेबसाइट और संस्थाएं बनाईं, जो अलग-अलग देशों के समुद्री विभागों की तरह काम करने का दावा करती थीं. जबकि उन देशों की सरकारों से उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली थी.
इन वेबसाइटों के जरिए जहाजों का रजिस्ट्रेशन, नाविकों की ट्रेनिंग, सर्टिफिकेट जारी करने और जहाजों की जांच जैसी सेवाएं देने का दावा किया जाता था. अमेरिका का कहना है कि शर्मा के नेटवर्क ने अरूबा, गुयाना, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते जैसे देशों के नाम पर जहाजों का रजिस्ट्रेशन करने का भी दावा किया था. इसके अलावा, भारत से जुड़े दो अन्य नागरिक अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं. दोनों उन कंपनियों में डायरेक्टर थे, जिनका संबंध शर्मा दंपती से था.
दरअसल, हर जहाज पर एक देश का झंडा लगा होता है. यह बताता है कि जहाज किस देश के नियमों के तहत चल रहा है. असली रजिस्ट्रेशन होने पर उस देश की समुद्री एजेंसियां जहाज की निगरानी कर सकती हैं. अमेरिका का आरोप है कि शर्मा और उनकी पत्नी ने इसी व्यवस्था का गलत इस्तेमाल किया. उन्होंने ईरान का तेल ले जाने वाले जहाजों को ऐसे देशों के नाम पर फर्जी रजिस्ट्रेशन दिए, जिनकी सरकारों ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी.
तुर्किये की कंपनी पर भी कार्रवाई
वहीं, तुर्किये की फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर ईरान की छह प्रतिबंधित एयरलाइंस को सेवाएं देने का आरोप है. इनमें ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, सेपेहरान एयरलाइंस, वारेष एयरलाइंस, ताबान एयरलाइंस और अता एयरलाइंस शामिल हैं. कंपनी पर ग्राउंड हैंडलिंग यानी विमान के जमीन पर रहने के दौरान जरूरी सेवाएं देने का आरोप है.
प्रतिबंध लगने का क्या होगा असर?
इस कार्रवाई के बाद उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाली प्रतिबंधित लोगों और कंपनियों की संपत्ति तथा वित्तीय हित फ्रीज कर दिए जाएंगे. अमेरिकी नागरिक और कंपनियां आम तौर पर इनके साथ कारोबार नहीं कर सकेंगी. इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय की विशेष अनुमति जरूरी होगी.
अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि गैर-अमेरिकी कंपनियां और लोग भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं, अगर वे प्रतिबंधों से बचने में किसी की मदद करते हैं. यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का हिस्सा है. इसका मकसद ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकना और उसकी आर्थिक ताकत पर दबाव बनाना है.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान की मदद करने वालों को जमीन, समुद्र या हवाई रास्ते से कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
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