ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर उस पर दुनियाभर की पाबंदियों का जाल बिछा हुआ है. UN, अमेरिका और EU के सैंक्शन्स ने ईरान के तेल-व्यापार से लेकर बैंकिंग सिस्टम तक को प्रभावित किया है. JCPOA डील के बाद कुछ राहत मिली थी, पर 2018 में डील टूटने के बाद फिर सख्ती लौट आई.
ऐसे में अब अमेरिका और ईरान के बीच MoU होने के बाद उस पर लगे कुछ प्रतिबंध फिर से हट सकते हैं. ऐसे में जानते हैं कि ईरान पर कौन-कौन सी पाबंदियां लगी थीं.
ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध
UN सैंक्शन्स 2006, 2007, 2008 और 2010 में पास हुए थे. इनमें हथियारों पर रोक से लेकर न्यूक्लियर से जुड़ी सामग्री और टेक की सप्लाई पर बैन, IRGC और सरकारी शिपिंग कंपनी की संपत्तियां सीज करना और न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल बनाने पर रोक लगाना शामिल हैं.
2015 JCPOA डील के बाद UN सिक्योरिटी काउंसिल ने सैंक्शन्स हटाने का शेड्यूल तय किया था. लेकिन 2018 में ट्रंप ने डील से किनारा कर लिया. ईरान ने भी शर्तें मानने से मना कर दिया और पिछले साल UN सैंक्शन्स "स्नैपबैक" मैकेनिज्म से फिर लागू हो गए.
अमेरिकी प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान पर पहली पाबंदी 1979 में अमेरिकी दूतावास बंधक संकट के बाद लगाई थी. अब सैंक्शन्स कई लेवल पर हैं. ट्रंप के अरबों डॉलर की ईरानी संपत्ति फ्रीज, हथियारों पर बैन, ईरान से पूरा व्यापार-निवेश बैन, तेल खरीद पर रोक. इन्हें ट्रंप एक कलम के झटके से हटा सकते हैं.
अमेरिका ने IRGC को आतंकी संगठन घोषित किया है. IRGC ईरान की अर्थव्यवस्था में गहराई तक जुड़ी है, इसलिए सैंक्शन हटाना आसान नहीं है.
बैंकिंग सिस्टम पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध
EU ने 2012 से ईरानी तेल पर एम्बार्गो लगाया है. ईरान के सेंट्रल बैंक की संपत्ति फ्रीज की गई. सोना-चांदी और पेट्रोकेमिकल्स के व्यापार पर रोक लगाई गई. 2012 में कई ईरानी बैंक SWIFT सिस्टम से काटे गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय लेन-देन ठप हो गया.
हाल में IRGC और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ब्लॉक करने पर नए सैंक्शन्स लगाए गए थे. JCPOA के तहत कुछ पाबंदियां हटी थीं, पर बाद में वापस लगा दी गईं.
अरबों डॉलर लॉक
सैंक्शन्स की वजह से ईरान के अरबों डॉलर विदेशी बैंकों में फंसे हैं. ज्यादातर तेल-गैस निर्यात का पैसा है. दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, लक्जमबर्ग और इराक के बैंकों में ईरान का पैसा है, जिसे वह निकाल नहीं पा रहा.
क्या सैंक्शन्स हटेंगे?
ट्रंप के एग्जिक्यूटिव ऑर्डर वाले सैंक्शन तुरंत हट सकते हैं. लेकिन कांग्रेस द्वारा पास कानून, UN सैंक्शन और EU के नियमों को हटाने में लंबा वक्त लगेगा. IRGC पर टेररिस्ट का ठप्पा और न्यूक्लियर प्रोग्राम पर भरोसा बहाल हुए बिना पूरा रिलीफ मुश्किल है.
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच डील फिर शुरू होती है तो ही ये जाल टूटेगा. तब तक तेहरान के लिए आर्थिक रास्ते बंद ही रहेंगे.
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