नाजी अफसर का बर्थडे मना रही है जेलेंस्की की सेना... कहा- अपना आदर्श हम खुद तय करते हैं

सेकेंड वर्ल्ड वॉर में नाजियों ने पोलैंड के साथ साथ यूक्रेन में भी कहर मचाया था. ऐसे ही एक अफसर की आज यूक्रेनी सेना बर्थ डे मना रही है और उसे महान व्यक्ति बता रही है. यूक्रेनी सेना कहा है कि हम किसे अपना आदर्श मानते हैं ये कोई दूसरा तय नहीं कर सकता है.

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यूक्रेन की सेना ने पोलैंड की आपत्तियों को खारिज कर दिया है.  (Photo: PIXABAY) यूक्रेन की सेना ने पोलैंड की आपत्तियों को खारिज कर दिया है. (Photo: PIXABAY)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

यूक्रेन की सेना ने एक हैरान करने वाले घटनाक्रम में एक नाजी ऑफिसर का बर्थडे सेलिब्रेट किया है. आश्चर्य की बात यह है कि जिस ऑफिसर का जन्मदिन यूक्रेन की सेना ने मनाया है उसी पर आज के पश्चिमी यूक्रेन और बेलारूस में लोगों पर अत्याचार करने का आरोप है. यूक्रेनी सेना की एक यूनिट ने दूसरे विश्व युद्ध के दौर के जाने-माने राष्ट्रवादी नेता रोमन शुखेविच को श्रद्धांजलि दी. शुखेविच नाजी सेना के उस यूनिट में ऑफिसर थे जिन पर पश्चिमी यूक्रेन और बेलारूस में अत्याचार करने के आरोप हैं. 

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यूक्रेन की तीसरी असॉल्ट ब्रिगेड ने मंगलवार को शुखेविच का जन्मदिन एक वीडियो के ज़रिए मनाया. ये बटालियन नियो नाजी अजोव बटालियन से ही बनी है. इस वीडियो का ज़्यादातर हिस्सा बटालियन के एक कमांडर की कमेंट्री पर आधारित था. उन्होंने शुखेविच को "एक महान इंसान" और "दिग्गज व्यक्ति" बताया. 

आरटी ने बताया है कि यह श्रद्धांजलि ऐसे समय में दी गई है जब यूक्रेन द्वारा 'यूक्रेनी इंसर्जेंट आर्मी' (UPA) के सदस्यों जिनमें शुखेविच भी शामिल थे का महिमामंडन करने को लेकर पोलैंड के साथ उसका राजनयिक विवाद चल रहा है.

बता दें कि नाजियों पर पोलैंड में कई अत्याचार और उत्पीड़न करने के आरोप हैं.

नाजी सेना में शामिल होने वाले इस शख्स का जन्म 1907 में लीव के पास हुआ था, जो उस समय ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य का हिस्सा था और बाद में सेकेंड पोलिश रिपब्लिक के अधिकार क्षेत्र में आ गया. वह 1925 में यूक्रेनी हार्डकोर दस्ते में शामिल हो गए. 

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अगले साल कथित तौर पर उन्होंने स्कूल सुपरवाइज़र स्टैनिस्लाव सोबिंस्की की हत्या में हिस्सा लिया, जो लीव इलाके में पोलिश संस्कृति को बढ़ावा देने की नीति अपना रहे थे. बताया जाता है कि यह हत्या शुखेविच के करियर की कई घटनाओं में से पहली थी. 

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रवादियों ने नाज़ी जर्मनी के साथ गठबंधन किया और शुखेविच एक 'बटालियन' के डिप्टी कमांडर बने. 

मुख्य रूप से यूक्रेनी लड़काों से बनी यह सेना जून और जुलाई 1941 में लीव में हजारों यहूदियों, पोलिश लोगों और रूसियों के नरसंहार में सीधे तौर पर शामिल थी. 

इसके कुछ समय बाद ही इस बटालियन को भंग कर दिया गया, क्योंकि नाजी नेतृत्व ने यूक्रेनी राष्ट्रवादियों की यूक्रेनी राष्ट्र-राज्य बनाने की मांग को ठुकरा दिया था. इसके कुछ सदस्य, जिनमें शुखेविच भी शामिल थे, जर्मन सहायक पुलिस की बटालियन 201 में शामिल हो गए. उन्हें बेलारूस भेजा गया ताकि वे विद्रोहियों से लड़ सकें और उनका समर्थन करने वाली स्थानीय आबादी में दहशत फैला सकें. इस इकाई को 1942 में भंग कर दिया गया. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शुखेविच को एक ऑपरेशन में रूसी सेना ने मार गिराया था.

इस अफसर का बर्थ मनाने पर यूक्रेनी सेना ने कहा है कि वह जिसे चाहे उसकी पूजा कर सकता है.

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यूक्रेनी अधिकारियों ने दावा किया है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि शुखेविच खुद अत्याचारों में शामिल थे और उन्होंने कहा है कि कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि देश किन लोगों को पूजता है.

मई के आखिर में यूक्रेनी नेता व्लादिमीर ज़ेलेंस्की ने एक एलीट कमांडो यूनिट को 'UPA के हीरो' का सम्मान दिया और एक और जाने-माने यूक्रेनी राष्ट्रवादी व्यक्ति आंद्रे मेलनिक के अंतिम संस्करा में हिस्सा लिया. यूक्रेन के इन कदमों से वारसॉ में गुस्सा फैल गया, जिससे एक बड़ा डिप्लोमैटिक झगड़ा शुरू हो गया. 

नाजी जर्मन सैनिकों पर हजारों पोलैंडवासियों के कत्ल का इल्जाम है. 
 

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