जिसके लिए भारत से गिड़गिड़ा रहे कई देश, खराब बताकर तुर्की ने लौटाया

रूस और यूक्रेन संकट के बीच दुनिया भर में गेहूं संकट चरम पर है. तुर्की को भेजी गई गेहूं की खेप में रुबेला वायरस मिला है. इसके बाद खेप को लौटा दिया है. तुर्की ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब गेहूं संकट बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं खरीदने के विकल्प खोजे जा रहे हैं. 

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन (photo: reuters) तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन (photo: reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2022,
  • अपडेटेड 7:16 PM IST
  • रूस, यूक्रेन युद्ध से दुनियाभर में गेहूं संकट
  • गेहूं निर्यात पर बैन के बीच भारत ने भेजा थी खेप

रूस और यूक्रेन युद्ध की वजह से उपजे गेहूं संकट के बीच तुर्की ने भारत से आए गेहूं की खेप लौटा दी है. तुर्की ने कहा है कि भारत के गेहूं में रुबेला वायरस पाया गया है.

तुर्की ने गेहूं में फाइटोसैनिटरी की समस्या का हवाला दिया है. इसके बाद 29 मई को तुर्की ने भारत से आई गेहूं की खेप लौटा दी.

एसएंडपी ग्लोबल कमोडिटी इनसाइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की का जहाज 56,877 टन गेहूं से लदा पड़ा था. अब इस जहाज को वापस तुर्की से गुजरात के कांधला बंदरगाह लौटा दिया गया है.

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इस्तांबुल के एक ट्रेडर ने बताया, भारत के गेहूं में रुबेला वायरस मिला है. इस वजह से तुर्की के कृषि मंत्रालय ने इस खेप को लेने से इनकार कर दिया.

ट्रेडर ने बताया कि गेहूं से लदा हुआ यह जहाज जून के मध्य तक कांधला लौटेगा.

तुर्की ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब गेहूं संकट बना हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गेहूं खरीदने के विकल्प खोजे जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोदी सरकार के गेहूं निर्यात पर बैन के फैसले के बाद करीब 12 देशों ने भारत से मदद मांगी है. भारत ने गेहूं निर्यात बैन के बाद मिस्र को 60,000 टन गेहूं भेजा था.

रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद से वैश्विक स्तर पर गेहूं की सप्लाई बाधित हुई है. 

बता दें कि रूस और यूक्रेन दोनों ही गेहूं के सबसे बड़े उत्पादक देश हैं. वैश्विक गेहूं बाजार में इन दोनों देशों से विश्व का एक-चौथाई गेहूं सप्लाई होता है.

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एसएंडपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से अन्य निर्यातक देश चिंता में पड़ गए हैं. मिस्र सहित अन्य देशों में अगले कुछ दिनों में गेहूं की अन्य खेप पहुंचने वाली हैं. 

रूस, यूक्रेन युद्ध की वजह से बाजार में गेहूं की कमी होने पर भारत संभावित संकटमोचक के तौर पर उभरा था.

भारत सरकार ने 13 मई को गेहूं के निर्यात पर बैन लगा दिया, जिससे स्थिति और गड़बड़ा गई. भारत ने घरेलू स्तर पर गेहूं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह फैसला लिया था.

भारत के गेहूं के निर्यात पर अचानक बैन लगाने से बंदरगाहों पर लगभग 18 लाख टन अनाज फंस गया. इससे ट्रेडर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

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