अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच इस समय बहुत दोस्ताना बातचीत चल रही है, लेकिन साथ ही उन्होंने तेहरान को चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, 'हमारी अच्छी बातचीत चल रही है. मुझे लगता है कि कुछ होने की अच्छी संभावना है और अगर ऐसा नहीं होता है तो हम दो दिन पहले जो कर रहे थे, उसी पर वापस लौट जाएंगे.'
हालांकि, कुछ घंटे बाद मिशिगन में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप का रुख और सख्त नजर आया. ट्रंप ने कहा, 'आप उन्हें (ईरान) रिश्वत नहीं दे सकते, आपको उन्हें हराना होगा और हम उन्हें बुरी तरह हरा रहे हैं. देखते हैं आगे क्या होता है. फिलहाल बहुत दोस्ताना बातचीत चल रही है.'
ट्रंप ने फिर दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना, वायुसेना, नेतृत्व और एंटी-एयरक्राफ्ट हथियारों को तबाह कर दिया है. उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की ड्रोन और मिसाइल निर्माण क्षमता को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है.
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सख्त रुख नहीं अपनाया होता तो बातचीत की कोई संभावना नहीं बनती. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान अब अमेरिका के साथ समझौते को लेकर बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में कई लोग सैन्य कार्रवाई के खिलाफ थे, लेकिन कार्रवाई के बाद उन्हें लगा कि यह सही फैसला था. ट्रंप ने इसी उदाहरण के जरिए ईरान के मामले में भी अपनी रणनीति को सही ठहराया.
उन्होंने अमेरिकी नौसेना की भी तारीफ की और कहा कि ईरान की समुद्री नाकेबंदी के दौरान अमेरिकी नौसेना ने शानदार काम किया है. ट्रंप ने दावा किया कि एक भी नाव अंदर नहीं जा रही है.
ट्रंप के ये बयान ऐसे समय आए हैं जब सोमवार को सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक ने ड्रोन हमलों की जानकारी दी. इससे क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है. अमेरिका ने शनिवार को ईरान के खिलाफ करीब दो सप्ताह से चल रहे अपने हवाई अभियान को रोक दिया था.
अमेरिका ने क्यों रोका हवाई अभियान?
अमेरिकी अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सैन्य कमांडरों ने ट्रंप को बताया था कि हवाई हमले अपनी क्षमता की सीमा तक पहुंच चुके हैं और ईरान में अमेरिका के लिए उपलब्ध लक्ष्यों की संख्या भी कम होती जा रही है. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने हवाई हमलों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और गोला-बारूद के भंडार में कमी को लेकर भी चिंता जताई थी.
हालांकि, ट्रंप ने अमेरिकी सेना के पास हथियारों की कमी होने की बात को खारिज किया. उन्होंने कहा कि हथियारों का भंडार तेजी से दोबारा तैयार किया जा रहा है और वह और अधिक आधुनिक हथियार प्रणालियां चाहते हैं.
ईरान ने बातचीत की मांग से किया इनकार
उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान ने कूटनीति का रास्ता नहीं छोड़ा है और मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है. हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत की मांग की है. उन्होंने ऐसी खबरों को "मनगढ़ंत" बताया.
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इससे पहले कहा था कि ट्रंप की ओर से घोषित युद्धविराम प्रभावी रहने तक ईरान भी अपने हमले रोक सकता है.
सऊदी अरब और हूती आमने-सामने
सऊदी अरब ने सोमवार को कहा कि उसने तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोन को रोक दिया. इनमें राजधानी रियाद के आसपास स्थित प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले ड्रोन भी शामिल थे. सऊदी अरब ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों को जिम्मेदार ठहराया और जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा.
वहीं, यमन के ईरान समर्थित हूती संगठन ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमले की जिम्मेदारी ली. यह पाइपलाइन लाल सागर के बंदरगाह यानबू तक जाती है. हूतियों ने इसे सऊदी ड्रोन गतिविधियों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया.
होर्मुज बना नया तनाव का केंद्र
ईरान के सैन्य कमान ने अमेरिका पर ईरानी क्षेत्रीय जल में जहाजों और तेल टैंकरों को धमकाने का आरोप लगाया. ईरान ने अमेरिका पर अवैध समुद्री नाकाबंदी लागू करने की कोशिश का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ सकता है.
तेहरान ने यह भी कहा कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण कायम है. यह रणनीतिक समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, सोमवार को छह ऐसे जहाजों को वापस लौटा दिया गया, जिन्होंने कथित तौर पर बिना अनुमति जलडमरूमध्य को पार करने की कोशिश की थी.
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